लखनऊ| यूपी एटीएस को लंबे समय से देश में आईएसआई के लिए काम कर रहे जासूसों की जानकारी मिल रही थी। इसके बाद एजेंसी ने अपनी जांच तेज कर दी और सुराग मिलने पर एक गुप्त ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान यूपी एटीएस को पता चला कि आगरा में रहने वाला रविंद्र सिंह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को गोपनीय जानकारी भेज रहा है। यूपी एटीएस को सूचना मिली थी कि एक संदिग्ध व्यक्ति सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप्स के जरिए पाकिस्तान की महिला एजेंट से संपर्क में था। कई महीनों तक चली निगरानी के बाद एजेंसी ने रविंद्र सिंह और उसके एक साथी को धर दबोचा।
पाकिस्तानी एजेंट से संपर्क में था आरोपी
यूपी एटीएस की जांच में खुलासा हुआ कि रविंद्र सिंह एक महिला एजेंट के संपर्क में था, जिसने खुद को ‘नेहा शर्मा’ नाम बताकर उससे दोस्ती की थी। पहले तो वे सामान्य बातचीत करते थे, लेकिन धीरे-धीरे महिला ने उसे गोपनीय सूचनाएं जुटाने के लिए तैयार किया। महिला ने रविंद्र को लालच देकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां निकलवानी शुरू कर दीं। व्हाट्सएप चैट और फोन कॉल्स के जरिए रविंद्र ने कई संवेदनशील दस्तावेज और जानकारियां साझा कीं। यूपी एटीएस को आरोपी के फोन से कई महत्वपूर्ण चैट और गोपनीय दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिन्हें उसने पाकिस्तान भेजा था।
आरोपी को पैसे का लालच देकर बनाया गया जासूस
यूपी एटीएस की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने पैसों के लालच में यह काम किया। उसे महिला एजेंट ने वि श्वास दिलाया कि उसके बदले उसे भारी रकम दी जाएगी। यूपी एटीएस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी को आईएसआई द्वारा वित्तीय मदद का लालच दिया गया था, जिससे वह देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने को तैयार हो गया।” यूपी एटीएस अधिकारियों ने बताया कि “ऐसे मामलों में अक्सर दुश्मन एजेंसियां लोगों को पैसे और भावनात्मक जुड़ाव का लालच देकर जाल में फंसाती हैं।
यूपी एटीएस ने कैसे पकड़ा आरोपी
यूपी एटीएस की टीम ने आरोपी की गतिविधियों पर महीनों से नजर बनाए रखी थी। एजेंसी ने उसके सोशल मीडिया प्रोफाइल्स, कॉल रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजेक्शनों की जांच की। यूपी एटीएस ने आरोपी की चैट हिस्ट्री खंगाली, जिससे उसके पाकिस्तान की एजेंट से संपर्क होने की पुष्टि हुई। आरोपी के फोन से मिले दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। दूसरे गिरफ्तार आरोपी से भी पूछताछ की जा रही है कि वह किस हद तक इस साजिश में शामिल था। यूपी एटीएस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस गिरोह में और भी लोग शामिल हैं।
आईएसआई के निशाने पर भारतीय सेना और खुफिया एजेंसियां
आईएसआई लंबे समय से भारत की खुफिया जानकारी जुटाने के लिए विभिन्न तरीकों से जासूसी करवा रही है। हाल के वर्षों में कई मामलों में भारतीय नागरिकों को हनी ट्रैप में फंसाकर उनसे गोपनीय जानकारी निकलवाई गई है। सोशल मीडिया जासूसी: दुश्मन एजेंसियां सोशल मीडिया के जरिए भारतीय नागरिकों से संपर्क कर उन्हें जाल में फंसाती हैं। पैसे का लालच: आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को पैसे देकर उनसे संवेदनशील जानकारी निकलवाई जाती है। हनी ट्रैप: दुश्मन देश की महिला एजेंटों द्वारा लोगों को बहला-फुसलाकर जासूसी करने के लिए तैयार किया जाता है। इस तरह के मामलों में पहले भी कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिससे यह साफ होता है कि ISI लगातार भारत के खिलाफ साजिश रच रही है।
यूपी एटीएस ने किया अलर्ट जारी
इस मामले के सामने आने के बाद यूपी एटीएस और अन्य खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट जारी कर दिया है। सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप्स के जरिए हो रही संदिग्ध गतिविधियों पर खास नजर रखी जा रही है। यूपी एटीएस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति से बातचीत करते समय सतर्क रहें और किसी अनजान व्यक्ति को अपने निजी दस्तावेज या महत्वपूर्ण जानकारी न दें।
जासूसी की साजिश को नाकाम किया गया
यूपी एटीएस ने इस बड़ी गिरफ्तारी से देश की सुरक्षा को मजबूत किया है। रविंद्र सिंह और उसके साथी की गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि दुश्मन देश किस तरह भारतीय नागरिकों को अपने जाल में फंसाकर जासूसी करवा रहा है। यूपी एटीएस अब इस पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच को और आगे बढ़ा रही है। आम जनता को भी सतर्क रहने की जरूरत है ताकि इस तरह की देशविरोधी गतिविधियों को समय रहते रोका जा सके।


