अजय सिंह की चुनावी शुचिता को न्यायालयीन प्रामाणिकता

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“सत्य परेशान हो सकता है किंतु पराजित नहीं” इस कहावत को एक बार फिर देश के सर्वोच्च न्यायालय से प्रामाणिकता प्राप्त हुई है। ज्ञात हो कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने चुरहट विधायक अजय सिंह “राहुल भैया” के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। उल्लेखनीय है कि उक्त याचिकाएं उस शपथ पत्र को गलत करार देते हुए दायर की गई थीं, जो श्री सिंह द्वारा विधानसभा चुनाव के दौरान अपने नाम निर्देशन पत्र के साथ रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। यह भी गौर करने योग्य है कि उनसे पराजित हुए भाजपा प्रत्याशी शरदेंदु तिवारी की ओर से उक्त शपथ पत्र को लेकर पूर्व में आपत्ति दर्ज कराई जा चुकी है। उक्त मामले में सभी तथ्यों पर गौर करने के पश्चात सर्वोच्च न्यायालय ने चुरहट विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित कांग्रेस विधायक अजय सिंह के खिलाफ दायर चुनाव याचिकाओं को खारिज कर दिया है। यहां एक बात स्मरण करने योग्य है कि बीते विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी श्री अजय सिंह द्वारा दाखिल किए गए, नामांकन के साथ लगाए गए शपथ पत्र में दी गई जानकारी को लेकर बीजेपी प्रत्याशी ने अनेक सवाल खड़े किए थे। इस मामले में बीजेपी के उम्मीदवार शरदेंदु तिवारी की ओर से आपत्ति भी की गई थी। इन आपत्तियों पर सुनवाई के बाद निर्वाचन अधिकारी ने शपथपत्र को वैध मानते हुए उसे खारिज कर दिया था।
उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव में अजय सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी। इस चुनाव के बाद शपथ पत्र संबंधी आपत्तियों और अन्य बिंदुओं को लेकर अजय सिंह के खिलाफ दो याचिकाएं भले ही रामगरीब और राकेश कुमार पांडे नाम के दो व्यक्तियों द्वारा दायर की गई थीं। लेकिन जन चर्चाओं से यह स्पष्ट होता रहा कि निर्वाचन अधिकारी के समक्ष गलत साबित होने के बाद इन्हें उपरोक्त व्यक्तियों के माध्यम से सुनियोजित रणनीति के तहत दायर कराया गया था। किंतु जैसा कहा गया है कि “झूठ को बार-बार और जोर से कहने पर वह सच साबित नहीं हो जाता” याचिकाओं का वही हश्र हमारे सर्वोच्च न्यायालय में हुआ। इन याचिकाओं पर विचार करने के बाद वहां के विद्वान न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा है कि चुनाव याचिकाओं में उठाए गए आधार, कानून के तय प्रावधानों को देखते हुए नहीं बनाए गए हैं। इसलिए दोनों चुनाव याचिकाएं खारिज की जाती हैं।
जाहिर है इस फैसले से चुरहट विधायक अजय सिंह राहुल भैया के खेमे में खुशी की लहर दौड़ना थी, सो वह स्पष्ट देखने को मिल रही है। चुरहट विधानसभा क्षेत्र से उनके निर्वाचन को चुनौती देने के लिए दायर की गईं दोनों याचिकाओं के खारिज होने की जानकारी जैसे ही चुरहट विधायक अजय सिंह राहुल के समर्थकों एवं शुभचिंतकों को मिली तो उनके द्वारा खुशी का इजहार किया जा रहा है। सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से सत्य की जीत एवं असत्य की हार का जिक्र करते हुए कार्यकर्ताओं ने खुशी व्यक्त करते हुए अनेक स्थानों पर मिष्ठान वितरित किया है तो कहीं-कहीं से आतिशबाजी होने की खबर भी मिल रही है। जैसा कि हमेशा होता आया है‌। चुनाव परिणाम हों या फिर उनसे जुड़ी हुई कोई भी घटना, इसमें से एक ओर हार की हताशा होती ही है तो दूसरी ओर जीत का जश्न मनाया जाता है। इससे अलग हटकर देखें तो एक बार फिर यह सवाल जेहन में उठता है कि जब चुनावी मैदान में हार जीत का फैसला हो जाता है और जनता जनार्दन अनेक में से किसी एक को अपना जन प्रतिनिधि चुन लेती है, तब हार जीत के मैदान से हटकर राजनेताओं द्वारा इस तरह के कानूनी दाव पेंच अपना कर न केवल मतदाताओं को भ्रमित करने का प्रयास किया जाता है, बल्कि इससे माननीय न्यायालय का बेशकीमती समय भी बर्बाद होता है।
जबकि सर्व विदित है कि अजय सिंह न केवल कांग्रेस के स्थापित राजनेता है बल्कि उनके बारे में यह धारणा आमतौर पर स्थापित है कि उन्होंने प्रतिकूल हालातो में भी समस्याओं अथवा चुनौतियों के सामने ना तो हार मानी है और ना ही अपने सिद्धांतों को लेकर कभी समझौता किया है। अजय सिंह सदैव ही जनता के अधिकारों के लिए व्यवस्थाओं में व्याप्त विसंगतियों से जूझते और उनसे संघर्ष करते रहे हैं।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर अंततः चुरहट विधायक श्री अजय सिंह राहुल भैया की राजनीतिक सुचिता को प्रमाणिकता ही प्रदान की है।

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