विकास और रोजगार मध्य प्रदेश सरकार के महत्वपूर्ण लक्ष्य

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अनेक राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार अब स्पष्ट रूप से एक्शन मोड में दिखाई देती है। अभी तक मुख्यमंत्री श्री यादव के बारे में टिक टिप्पणियां की जा रही थीं की वह नए हैं, उन्हें कुछ नहीं आता, वह ज्यादा दिन नहीं चल पाएंगे। अक्सर उनकी तुलना पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेहद सक्रिय व्यवहार से भी की जा रही थी। लेकिन डॉक्टर मोहन यादव और उनकी टीम इन आलोचनाओं की परवाह न करते हुए उन लक्ष्यों की प्राप्ति में लगी थी जो उन्हें पार्टी हाई कमान की ओर से उपलब्ध कराई गई थीं। इनमें सबसे पहले काम था लोकसभा चुनाव में भाजपा को मध्य प्रदेश से अधिकतम सीटों पर जीत दिलाना। सर्व विदित है कि इस मामले में तो मध्य प्रदेश में एक इतिहास ही रचा जा चुका है। इसके बाद विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री और प्रदेश के मंत्रिमंडल की सेवाएं लगीं तो वहां भी भाजपा को सकारात्मक परिणाम ही मिले और मध्य प्रदेश भाजपा के हिस्से में अनेक कामयाबियां हासिल हुईं। इस पर केंद्रीय हाई कमान ने प्रदेश भाजपा के साथ-साथ सूबे की डॉक्टर मोहन यादव सरकार की भी मुक्त कंठ से सराहना की। अब लगभग सभी बड़े चुनाव संपन्न हो गए हैं सो डॉक्टर मोहन यादव अपनी पूरी टीम के साथ एक्शन मोड में आ चुके हैं। हम उनकी कैबिनेट की मीटिंग को देखें या फिर नौकरशाहों के साथ होने वाली समीक्षा बैठकों को , हर कहानी विकास के नए प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए जा रहे हैं। समीक्षाएं हो रही है और परिणाम भी देखने को मिलने लगे हैं। यह तो सभी जानते हैं कि मोहन सरकार ने प्रभाव में आते ही राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगपतियों की अनेक समिटें आयोजित कीं। अरबों रुपए के वचन पत्र साइन हुए। यह कागजों तक ही सीमित ना रहें, इसलिए लगातार समीक्षा होती रहीं। नतीजा यह निकला की उद्योगपतियों की ओर से जो कमिटमेंट किए गए अब वह धरातल पर दिखाई देने लगे हैं और नए कारखाने अस्तित्व में आने लगे हैं। इनमें बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार मिलने की संभावनाएं है बनी हुई हैं। नए राजस्व संसाधनों के माध्यम से सरकार का खजाना भरने वाला है सो अलग। इससे भी एक कदम आगे बढ़कर अब मुख्यमंत्री ने फैसला लिया है कि रोजगार बढ़ाने और उद्योग स्थापित करने के लिए सभी जिलों में इन्वेस्टर समिटें आयोजित होंगी‌ हर संभाग और जिले में रोजगार मेला लगाए जाएंगे। हमारा लक्ष्य प्रदेश को देश का नंबर वन राज्य बनाना है। स्वास्थ्य सुविधाओं को भी उन्नत किया जाएगा। बात नौकरियों की कहें तो इस बाबत भी अधिकतम आंकड़े मुख्यमंत्री की टेबल पर हैं, ऐसा विश्वस्त्र सूत्र बताते हैं। संभावना यह तलाशी जा रही हैं कि किस प्रकार विभिन्न विभागों में पड़े खाली पद सुनियोजित तरीके से भरे जाएं, ताकि जो लोग प्रदेश सरकार से नौकरी की आस लगाए बैठे हैं उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरा जा सके। जैसा कि सभी जानते हैं, बीते रोज मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने घोषणा की है कि इस साल एक लाख पदों पर भरती की जाएगी। तीन से चार साल के दौरान पीएससी की जो परीक्षाएं लंबित बनी रहीं, उन्हें भी इस दौरान पूरा किया जाए गा। जितने भी पद खाली पड़े हैं फिर भले ही वह किसी भी श्रेणी के हों, उन्हें भरने के समुचित प्रयास होंगे। यही नहीं, किसानों की आय पर ध्यान केंद्रित करते हुए यह आश्वस्त किया गया है कि अगले 5 सालों में मध्य प्रदेश की सिंचाई क्षमता को बढ़ाकर 1 लाख करोड़ हेक्टर तक किया जाएगा। यह भी किसी से छुपा नहीं है कि सिवनी जिले के सभी गांवों में सिंचाई का पानी पहुंचाने, संजय सरोवर बांध में फ्लोटिंग सोलर पंप लगाने, धनोरा में कॉलेज खोलने की घोषणाएं की जा चुकी है और इन्हें पूरा करने हेतु विभागीय अधिकारियों को ताकीद किया जा चुका है। इन सभी कार्यों में मध्य प्रदेश सरकार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का पूरा संरक्षण और सहयोग मिल रहा है। जैसा कि सभी ने देखा। बीते रोज देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 12 राज्यों के साथ वर्चुअल जुड़े और उन्होंने भू अधिकार स्वामित्व योजना के माध्यम से सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के उन लोगों को आधिकारिक संपत्ति कार्ड वितरण किया जो अभी तक दस्तावेजों के लिहाज से स्थाई संपत्ति होने के बावजूद खाली हाथ ही बने हुए थे। अब गांव में खेत जमीन या मकान कुछ भी हो, हर एक स्थाई संपत्ति का दस्तावेज इन लोगों के हाथ में रहेगा । इनके माध्यम से ग्रामीण लोग बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थानों से लोन भी ले सकेंगे। दस्तावेजों के अभाव में अब उन्हें निराश नहीं होना पड़ेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मविश्वास के नए पैमाने तय होंगे। स्वरोजगार की नई इबारत लिखी जाएंगी तथा ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में उछा ल आएगा। इसका एक उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माध्यम से सीहोर में देखने को मिला। जहां के एक किसान मनोहर मेवाड़ा ने वर्चुअल जुड़कर प्रधानमंत्री को बताया कि उनके पास पहले जमीन का कागज नहीं था। तब कोई बैंक लोन नहीं देती थी। लेकिन संपत्ति कार्ड मिल जाने से मुझे 10 लाख का लोन मिल गया। जिससे डेरी फार्म शुरू किया है। अब मेरे पास गाय भैंसों की पर्याप्त उपलब्धता है। इनके माध्यम से प्रति माह न्यूनतम ₹30000 की आय शुरू हो चुकी है। जिसमें से वह बैंक की किस्त भी सहज भाव से चुका पा रहा है। मध्य प्रदेश के युवा और उनके अभिभावक भी नई ऊर्जा के साथ तरक्की की ऊंचाइयां छू सकें, इसके भी इंतेजामात किये जा रहे हैं। इसी योजना के तहत अब मध्य प्रदेश शासन ने फैसला लिया है कि मध्य प्रदेश के जो युवा खेल के क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रहे हैं, उनकी माताओं को जीजा माता सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। इस अलंकार से उन ग्रहणियों को नई प्रेरणा मिलेगी जो अभी तक घर की चार दिवारी में रहकर परिवार का पालन पोषण करती हैं और नौकरी पेशा महिलाओं की अपेक्षा खुद को दोयम दर्जे का समझने को अभिशप्त हैं। विडंबना यह है कि हमारा समाज भी यही सोच रखता है। लेकिन यह सम्मान सीख देगा कि ग्रहणियां घर में रहकर अपने बच्चों को योग्य और प्रतिभाशाली बनाएंगी।फल स्वरुप उनके बच्चे विकास के नए आयाम स्थापित करें और उन्हें उत्कृष्ट माता होने का सम्मान दिलाएंगे।

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