विदेश मंत्रालय

पश्चिम एशिया युद्ध क्षेत्र में बड़ा संकट : विदेश मंत्रालय ने की 14 भारतीयों की मृत्यु की पुष्टि, दो नागरिक अब भी लापता, समुद्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। 14 Indians dead in West Asia : पश्चिम एशिया के अशांत क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के मध्य छिड़े भीषण सैन्य संघर्ष के बीच भारत सरकार ने एक बेहद दुखद और चिंताजनक आधिकारिक रिपोर्ट जारी की है। भारत के केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने देश को सूचित किया है कि इस अंतरराष्ट्रीय युद्ध की चपेट में आने से अब तक कुल 14 भारतीय नागरिकों की असामयिक मृत्यु हो चुकी है, जबकि 2 अन्य भारतीय नागरिक इस खतरनाक संघर्ष क्षेत्र से अब भी पूरी तरह लापता हैं। विदेश मंत्रालय के मुख्य आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने राष्ट्रीय मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इस संवेदनशील मामले पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि इस हिंसक संघर्ष में हताहत हुए भारतीय नौसैनिकों और कर्मियों की एकदम सटीक व विस्तृत संख्या का अंतिम आंकड़ा पूरी तरह संकलित किया जा रहा है, परंतु वर्तमान खुफिया और राजनयिक इनपुट्स के आधार पर 14 नागरिकों की मौत तथा 2 लोगों के लापता होने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है।

फारस की खाड़ी के अशांत पानी में मौजूद हैं 7 भारतीय व्यावसायिक जहाज

वैश्विक समुद्री व्यापार मार्ग पर मंडराते इस बड़े खतरे और अत्यधिक तनावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण फारस की खाड़ी के भीतर भारतीय संप्रभुता के प्रतीक तिरंगे ध्वज वाले 7 बड़े व्यापारिक जहाज अब भी वहां मौजूद हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सुरक्षा चिंताओं पर बोलते हुए कहा कि पूरे क्षेत्र की पल-पल बदलती सुरक्षा स्थिति पर भारत सरकार के शीर्ष अधिकारी और रक्षा विशेषज्ञ लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने देश को भरोसा दिलाया कि इस अंतरराष्ट्रीय संकट की घड़ी में वहां फंसे हुए तमाम भारतीय नागरिकों, इंजीनियरों और बहादुर नाविकों की जान-माल की रक्षा करना ही भारत सरकार की सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य के खतरनाक समुद्री मार्ग को लेकर भारत सरकार की बड़ी एडवाइजरी

पश्चिम एशिया में लगातार बेकाबू होते सैन्य हालातों और युद्ध के विस्तार को देखते हुए भारत सरकार के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सख्त सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। इस सरकारी निर्देश के तहत सभी भारतीय शिपिंग कंपनियों और समुद्री एजेंसियों को यह कड़ा आदेश दिया गया है कि वे इस बेहद संवेदनशील और युद्धग्रस्त समुद्री क्षेत्र, विशेष रूप से भौगोलिक रूप से नाजुक होर्मुज़ जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी के आंतरिक जलमार्गों में जाने वाले किसी भी जहाज पर भारतीय मूल के नाविकों की नई तैनाती को तुरंत प्रभाव से पूरी तरह रोक दें। विदेश मंत्रालय ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि चूंकि इस पूरे पश्चिम एशियाई समुद्री बेल्ट में पारंपरिक रूप से बहुत बड़ी संख्या में भारतीय मर्चेंट नेवी के कर्मी और श्रमिक अपनी सेवाएं देते हैं, इसलिए इस अस्थिर माहौल में उनकी सुरक्षा को पुख्ता करना राज्य का परम कर्तव्य है।

अंतरराष्ट्रीय शिपिंग संकट के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर पल-पल की निगरानी

केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि भारत सरकार न केवल समुद्र में तैनात नाविकों, बल्कि पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों में रह रहे लाखों प्रवासी भारतीय नागरिकों की जमीनी स्थिति की भी निरंतर समीक्षा कर रही है। युद्ध की विभीषिका से प्रभावित विभिन्न संवेदनशील शहरों और तटीय इलाकों में मौजूद भारतीयों को हर संभव आपातकालीन सहायता और सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए भारत की खुफिया एजेंसियां, नौसेना और संबंधित देशों में स्थित भारतीय दूतावास आपस में लगातार मजबूत समन्वय स्थापित कर रहे हैं। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के आसपास के समूचे समुद्री क्षेत्रों में बढ़े इस सैन्य तनाव के कारण वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग गतिविधियों पर भी बेहद बुरा असर पड़ा है, जिसे देखते हुए भारत ने अपने सभी नागरिकों और समुद्री कर्मियों को अत्यधिक सावधानी व सतर्कता बरतने की सख्त हिदायत दी है।

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