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होर्मुज में अमेरिका को बड़ा झटका! सऊदी अरब ने रोका रास्ता, ट्रम्प का मिशन बीच में ठप, खाड़ी में बढ़ा तनाव

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एजेंसी, यूएई। होर्मुज में अमेरिका को बड़ा झटका! : खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की महत्वाकांक्षी समुद्री रणनीति को बड़ा झटका लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा और तेज आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया अमेरिका का विशेष अभियान अचानक बीच में ही रोक दिया गया। बताया जा रहा है कि सऊदी अरब की असहमति और सहयोग से इनकार के बाद अमेरिकी प्रशासन को पीछे हटना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है और अब अमेरिका तथा उसके पारंपरिक सहयोगी देशों के संबंधों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका ने शुरू किया था बड़ा अभियान

जानकारी के अनुसार अमेरिका ने चार मई को ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नाम से एक विशेष अभियान शुरू किया था। इस अभियान का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक और तेल वाहक जहाजों की सुरक्षा बढ़ाना बताया गया था। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिने जाने वाले इस क्षेत्र में लंबे समय से तनाव बना हुआ है और अमेरिका यहां अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करना चाहता था।

अमेरिकी प्रशासन का दावा था कि इस अभियान के जरिए समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाया जाएगा और किसी भी संभावित खतरे से जहाजों की रक्षा की जाएगी। लेकिन अभियान शुरू होने के कुछ ही समय बाद परिस्थितियां तेजी से बदलने लगीं।

सऊदी अरब ने एयरस्पेस देने से किया साफ इनकार

पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह सऊदी अरब का वह फैसला बना, जिसमें उसने अमेरिका को अपने एयरस्पेस और सैन्य एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि अमेरिकी विमानों को होर्मुज क्षेत्र में निगरानी, राहत और सुरक्षा अभियान चलाने के लिए सऊदी हवाई क्षेत्र की आवश्यकता थी।

एजेंसी रिपोर्टों के मुताबिक सऊदी नेतृत्व इस बात से नाराज था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बिना विस्तृत कूटनीतिक चर्चा किए इस अभियान की घोषणा कर दी। सोशल मीडिया के जरिए अचानक किए गए इस ऐलान से खाड़ी के कई सहयोगी देश असहज हो गए और उन्हें लगा कि इतने बड़े सैन्य अभियान पर उनसे पहले कोई राय नहीं ली गई।

ट्रम्प और क्राउन प्रिंस के बीच बढ़ी तल्खी

सूत्रों के अनुसार सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच इस मुद्दे को लेकर बातचीत भी हुई, लेकिन दोनों पक्ष किसी समझौते तक नहीं पहुंच सके। सऊदी अरब अपने फैसले पर कायम रहा, जिसके बाद अमेरिका के लिए अभियान को जारी रखना मुश्किल हो गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम अमेरिका और सऊदी अरब के संबंधों में बढ़ती दूरी का संकेत हो सकता है। लंबे समय से दोनों देशों के बीच सामरिक और आर्थिक साझेदारी मजबूत रही है, लेकिन हाल के वर्षों में कई मुद्दों पर मतभेद भी सामने आए हैं। ऐसे में यह विवाद दोनों देशों के रिश्तों में नई दरार पैदा कर सकता है।

शुरुआती दौर में ही कमजोर पड़ गया मिशन

जानकारी के मुताबिक अभियान के शुरुआती दो दिनों में अमेरिका केवल तीन जहाजों को ही सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से पार करा सका। इसके बाद मिशन की गति लगभग थम गई और रणनीतिक स्तर पर कई समस्याएं सामने आने लगीं।

खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने भी इस अभियान को लेकर सतर्क रुख अपनाया। उन्हें आशंका थी कि अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती हैं। यही कारण रहा कि अमेरिका को अपेक्षित क्षेत्रीय समर्थन नहीं मिल पाया।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उठे कई बड़े सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका अब अपने पुराने सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए रखने में कमजोर पड़ रहा है। कई रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों की विदेश नीति अब पहले की तुलना में अधिक स्वतंत्र होती जा रही है।

विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि चीन और रूस जैसे देशों की बढ़ती सक्रियता के कारण खाड़ी क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल रहा है। ऐसे में अमेरिका के लिए अपने प्रभाव को पहले जैसा बनाए रखना आसान नहीं रह गया है।

ईरान की प्रतीकात्मक प्रतिक्रिया ने बढ़ाई चर्चा

इस बीच ईरान से भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतीकात्मक प्रतिक्रिया सामने आई है। तेहरान में लगाए गए एक बड़े अमेरिका विरोधी होर्डिंग की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। इस होर्डिंग में राष्ट्रपति ट्रम्प की मूंछ को होर्मुज जलडमरूमध्य के रूप में दर्शाया गया है।

होर्डिंग के सामने एक महिला ईरानी झंडा लहराती दिखाई दी, जिसे स्थानीय स्तर पर अमेरिका की नीतियों पर व्यंग्य माना जा रहा है। ईरान समर्थक समूह इसे अमेरिका की रणनीतिक विफलता के प्रतीक के रूप में प्रचारित कर रहे हैं।

खाड़ी क्षेत्र में और बढ़ सकता है तनाव

विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति का संवेदनशील केंद्र बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच बढ़ती दूरी का असर वैश्विक तेल बाजार और समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल अमेरिका की ओर से इस मामले में सीमित प्रतिक्रिया ही सामने आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटनाक्रम को बड़ी रणनीतिक असफलता के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में खाड़ी क्षेत्र की राजनीति और अमेरिका की नई रणनीति पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

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