हिमंत विश्व शर्मा

असम में नई सरकार के गठन की तैयारी तेज, हिमंत विश्व शर्मा ने राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा

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एजेंसी, नई दिल्ली, गुवाहाटी। असम की राजनीति में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बुधवार को अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया। इसके साथ ही राज्य में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को मिली प्रचंड जीत के बाद यह कदम राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राज्य में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारी बहुमत हासिल किया था। चुनाव परिणामों के बाद से ही नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज थी। अब मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के इस्तीफे के साथ नई सरकार के गठन की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से आगे बढ़ने लगी है।

राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार हिमंत विश्व शर्मा ने लोक भवन पहुंचकर राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य को अपना इस्तीफा सौंपा। उनके साथ मंत्रिमंडल के अन्य सहयोगियों ने भी अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया। यह प्रक्रिया नई सरकार के गठन के लिए संवैधानिक औपचारिकताओं का हिस्सा मानी जाती है।

राज्यपाल ने मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। हालांकि नई सरकार के शपथ ग्रहण तक हिमंत विश्व शर्मा को कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में काम जारी रखने का अनुरोध किया गया है ताकि प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

चुनाव में गठबंधन को मिला भारी बहुमत

असम विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। 126 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन ने 102 सीटों पर जीत दर्ज कर मजबूत बहुमत प्राप्त किया। इस जीत को राज्य की राजनीति में भाजपा की मजबूत पकड़ का संकेत माना जा रहा है।

चुनाव एक चरण में संपन्न हुए थे और मतगणना के बाद परिणामों ने स्पष्ट कर दिया कि राज्य की जनता ने एक बार फिर भाजपा नेतृत्व पर भरोसा जताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिमंत विश्व शर्मा की नेतृत्व क्षमता, विकास योजनाओं और संगठनात्मक मजबूती ने इस जीत में बड़ी भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री को शपथ ग्रहण में बुलाने की तैयारी

इस्तीफा सौंपने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 11 मई के बाद आयोजित किए जाने की संभावना है। उन्होंने बताया कि यह जीत राज्य के लिए ऐतिहासिक है और इसी कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस अवसर पर आमंत्रित किया गया है।

उन्होंने कहा कि पार्टी चाहती है कि इस महत्वपूर्ण मौके पर देश के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी रहे। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि शपथ ग्रहण समारोह को बड़े स्तर पर आयोजित किया जा सकता है।

विधायक दल की बैठक में होगा नए नेता का चयन

हिमंत विश्व शर्मा ने यह भी जानकारी दी कि असम के नए मुख्यमंत्री का चयन भाजपा विधायक दल की बैठक में किया जाएगा। इस बैठक में पार्टी द्वारा नियुक्त केंद्रीय पर्यवेक्षक भी मौजूद रहेंगे। विधायक दल की बैठक में सभी निर्वाचित विधायक भाग लेंगे और औपचारिक रूप से नेता का चयन किया जाएगा।

हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हिमंत विश्व शर्मा को ही दोबारा मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, क्योंकि चुनाव में मिली बड़ी सफलता का श्रेय काफी हद तक उनके नेतृत्व को दिया जा रहा है। फिर भी अंतिम फैसला विधायक दल की बैठक और पार्टी नेतृत्व की सहमति से होगा।

असम की राजनीति में भाजपा की मजबूत पकड़

पिछले कुछ वर्षों में असम में भाजपा ने अपनी राजनीतिक स्थिति काफी मजबूत की है। राज्य में लगातार दूसरी बार भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मजबूत जनाधार तैयार कर लिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार की कई योजनाओं, आधारभूत ढांचे के विकास और कानून व्यवस्था को लेकर उठाए गए कदमों का लाभ भाजपा को चुनाव में मिला। इसके अलावा संगठन स्तर पर लगातार सक्रियता और जमीनी स्तर पर मजबूत संपर्क अभियान ने भी पार्टी की स्थिति मजबूत की।

नई सरकार से जनता को बड़ी उम्मीदें

राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर जनता के बीच भी उत्सुकता बनी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि नई सरकार विकास कार्यों को और तेज करेगी तथा रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में नए कदम उठाए जाएंगे।

विशेष रूप से युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की अपेक्षाएं सरकार से काफी बढ़ गई हैं। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने कई बड़े वादे किए थे और अब जनता को उनके पूरा होने का इंतजार रहेगा।

राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चाएं

इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में मंत्रिमंडल गठन और संभावित नए चेहरों को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि नई सरकार में कुछ नए नेताओं को मौका मिल सकता है। पार्टी संगठन और सहयोगी दलों के बीच भी लगातार बैठकें जारी हैं।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि असम में भाजपा की यह जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं बल्कि पूर्वोत्तर भारत में पार्टी की बढ़ती ताकत का प्रतीक भी है। आने वाले समय में इसका प्रभाव क्षेत्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।

 

 

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