सौरभ शर्मा से बड़ी शातिर निकली पत्नी दिव्या, दस्तावेजों में कहीं भी पति के नाम या सरनेम का जिक्र नहीं

ग्वालियर प्रादेशिक भोपाल मध्‍य प्रदेश

भोपाल, ग्वालियर। परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा ने काली कमाई के पैसे से ग्वालियर और भोपाल में खूब जमीनों की खरीद-फरोख्त की। उसने न सिर्फ अपनी पत्नी दिव्या तिवारी, मां उमा शर्मा बल्कि रिश्तेदारों के नाम से भी संपत्ति खरीदी। फिर दान के जरिए संपत्ति की हेराफेरी की। इससे जुड़े कई दस्तावेज सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के निशाने पर यह संपत्तियां हैं। इनसे जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। नईदुनिया के पास भी दस्तावेज हैं।

पत्नी ने बहन को दान की जमीन
इन दस्तावेजों के मुताबिक, सौरभ की मां को हाल ही के सालों में दो रिश्तेदारों से जमीनें दान में मिलीं। यह जमीनें सौरभ के नौकरी में आने के बाद दान में मिली। वहीं सौरभ की पत्नी दिव्या तिवारी ने अपनी बहन को संपत्ति दान की।
दस्तावेजों के मुताबिक, सौरभ की मां उमा शर्मा को उनकी रिश्तेदार चंपा खेमरिया निवासी विनय नगर में 26 जुलाई 2023 को 1400 वर्गफीट का महाराणा प्रताप नगर में एक प्लाट दान में दिया। इसका बाजार मूल्य करीब 27 लाख रुपए है।
इसके एक दिन बाद ही 27 जुलाई 2023 को श्यामा खेमरिया ने 0.387 एकड़ भूमि दान में दी। इसका बाजार मूल्य 14.24 लख रुपए बताया गया है। सौरभ की पत्नी दिव्या ने 1 अप्रैल 2022 को भोपाल में 2.61 हेक्टेयर जमीन काशीराम से खरीदी।
यह कृषि भूमि है। इसमें से 1.01 हेक्टेयर भूमि बहन रेखा तिवारी को दान में दी। इसका बाजार मूल्य करीब 19 लाख रुपए बताया गया है। 13 अक्टूबर 2023 को भेरोपुर में भी दिव्या ने कृषि भूमि खरीदी।

शातिर तरीका…दिव्या ने पति का न नाम उपयोग किया, न सरनेम
सौरभ की काली कमाई को मैनेज उसकी पत्नी दिव्या तिवारी ही करती थी। दिव्या ने शातिर तरीका अपनाया था। उसने दस्तावेजों में अपना नाम दिव्या तिवारी लिखा, साथ में पिता सलिल तिवारी का नाम लिखती थी। दानपत्र में भी उसने पिता के नाम का उपयोग किया है। सौरभ का न तो नाम साथ में उपयोग किया, न ही सरनेम।

रिश्तेदारों के नाम खरीदी, फिर दान में वापस ली जमीन
इस मामले में आशंका है कि रिश्तेदारों के नाम सौरभ ने काली कमाई से जमीन खरीदी। फिर दान के रूप में इन्हें अपने स्वजनों के नाम वापस लिया। इस तरह काले पैसे को सफेद किया।

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