सोनभद्र खदान दुर्घटना; 4 और शव मिले, अब भी 11 श्रमिक भीतर फँसे, राहत अभियान जारी 

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एजेंसी, सोनभद्र। यूपी के सोनभद्र में हुई खदान दुर्घटना में चार और शव बरामद किए गए हैं। इससे मृतकों की संख्या बढ़कर पाँच हो गई है। अभी भी 11 श्रमिक अंदर फँसे हुए हैं। उन्हें बाहर निकालने के लिए राहत अभियान लगातार जारी है। शनिवार शाम हुए इस हादसे के बाद से पुलिस, प्रशासन, निजी कंपनियों के विशेषज्ञ तथा एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें घटनास्थल पर डटी हुई हैं। इसी दौरान जिले के प्रभारी मंत्री रवीन्द्र जायसवाल भी सोमवार को यहाँ पहुँचे और अधिकारियों से बचाव कार्य की स्थिति जानी। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। पीड़ितों को सम्भव हर सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया। ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी में शनिवार दोपहर बाद ड्रिलिंग के दौरान लगभग 150 फीट की अधिक ऊँचाई से पर्वत का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिर पड़ा था। इससे कई मजदूर दब गए। लगभग आठ घंटे बाद रात 12 बजे एक मजदूर का शव मिला। इसके बाद रविवार देर रात एक और तथा सोमवार भोर में दो शव बरामद हुए।

पाँच परिवारों ने दर्ज कराई अपनों के लापता होने की सूचना 
इस बीच, खदान दुर्घटना में पाँच परिवारों ने अपने परिजनों के लापता होने की शिकायत मौके पर कराई है। श्रम विभाग के अधिकारी संबंधित विवरण एकत्र करने में लगे थे। ओबरा के पनारी निवासी सुनीता ने 30 वर्षीय भाई संतोष, पार्वती ने अपने पति 32 वर्षीय इंद्रजीत, पनारी के टोला खड़री निवासी बचिया देवी ने पति 40 वर्षीय रामखेलावन, पनारी के कर्मसार टोला की सुरसतिया देवी ने पति 32 वर्षीय कृपाशंकर के लापता होने की सूचना दी है। वहीं, कोन के कचनरवा गाँव निवासी रविन्द्र उर्फ़ राजकुमार भी कार्य के उद्देश्य से खदान गया था। उसके परिजनों ने भी शिकायत प्रस्तुत की।

शासन ने शुरू की जाँच, संयुक्त निदेशक पहुँचे सोनभद्र 
वाराणसी। भू-तत्व एवं खनन विभाग की निदेशक माला श्रीवास्तव ने इस प्रकरण की शासन स्तर से जाँच प्रारम्भ करा दी है। संयुक्त निदेशक डॉ। राजेश कुमार सिंह को सोनभद्र भेजा गया है। हालाँकि मानवीय दृष्टि से सभी को सुरक्षित बाहर निकालने हेतु बचाव तथा राहत कार्य लगातार चल रहा है। इसमें जिला प्रशासन और विशेषज्ञों की सहायता ली जा रही है। दुर्घटना में फँसे लोगों से सम्बंधित वास्तविक स्थिति जानी जा रही है। सोमवार तक हादसे से संबंधित जाँच की प्रारम्भिक रिपोर्ट मिलने की सम्भावना है। उसके बाद दुर्घटना के कारणों पर स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।

टूटा पर्वत का विशाल हिस्सा और जोखिमभरे रास्ते बन रहे बाधा 
डाला/सोनभद्र। बिल्ली मारकुंडी में हुई इस दुर्घटना के बाद बचाव कार्य में खदान के जोखिमभरे मार्ग बड़ी बाधा सिद्ध हो रहे हैं। टीम को रास्ता दुरुस्त करने में भी काफी समय लग रहा है। इसके अतिरिक्त जिस चट्टान के नीचे श्रमिकों के दबे होने की आशंका है, उसके ऊपर पर्वत का बड़ा हिस्सा टूटकर अटक गया है। ऐसे में राहत टीम को पहले ऊपर की भारी चट्टान हटानी होगी, तभी नीचे दबे श्रमिकों को बाहर निकाला जा सकेगा। बचाव कार्य में जुटी टीम के लिए भोजन और पानी पहुँचाने में भी कठिनाइयाँ सामने आ रही हैं।

 

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