संसद के शीतकालीन सत्र में 10 बिल पेश होंगे: प्राइवेट कंपनियों को एटॉमिक पावर प्लांट लगाने की परमिशन, यूजीसी खत्म करने वाला बिल भी आएगा

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एजेंसी, नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में एटॉमिक एनर्जी बिल समेत 10 नए बिल पेश हो सकते हैं। लोकसभा बुलेटिन में शनिवार को यह जानकारी दी गई। एटॉमिक एनर्जी बिल में प्राइवेट कंपनियों को भी न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की अनुमति मिल सकेगी। अभी देश में सारे न्यूक्लियर पावर प्लांट्स सरकार के कंट्रोल वाली कंपनियों के जरिए ही बनाए जाते हैं। नए बिल में संशोधन के बाद निजी कंपनियां (भारतीय और विदेशी दोनों) न्यूक्लियर पावर प्रोडक्शन में आ सकेंगी। सत्र के दौरान जो दूसरा बड़ा बिल पेश होगा वो हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल है। इसके तहत अलग-अलग संस्थाओं को खत्म कर उन्हें एक ही कमीशन में जोड़ दिया जाएगा। संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा। 19 दिन में पूरे सत्र के दौरान 15 बैठकें होंगी।

अहम बिल जो पेश होंगे, उनसे क्या बदलाव
न्यूक्लियर सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव: लोकसभा बुलेटिन के अनुसार एटॉमिक एनर्जी बिल भारत में परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल, कंट्रोल एंड रेगुलेशन से जुड़े प्रावधानों को नया फ्रेमवर्क देगा। यह पहली बार होगा जब प्राइवेट कंपनियों को न्यूक्लियर क्षेत्र में एंट्री मिल सकेगी। अब प्राइवेट कंपनियां भी न्यूक्लियर पावर प्लांट लगा सकेंगी। हायर एजुकेशन कमीशन बनाने वाला बिल भी तैयार: सरकार हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल भी पेश करेगी। इसका उद्देश्य कॉलेज और यूनिवर्सिटी को अधिक फ्रीडम देना और सिस्टम को पारदर्शी बनाना है। यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीटीई को खत्म कर उन्हें एक ही कमीशन में जोड़ दिया जाएगा। हाईवे भूमि अधिग्रहण तेज होगा: नेशनल हाईवे (संशोधन) बिल भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज और अधिक पारदर्शी बनाएगा, ताकि नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स में देरी कम हो सके। कंपनी कानून और एलएलपी कानून में बदलाव: सरकार कॉरपोरेट लॉ (संशोधन) बिल, 2025 लाने की तैयारी कर रही है। जो कंपनी अधिनियम 2013 और एलएलपी अधिनियम 2008 में बदलाव कर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और सरल करेगा। सभी बाजार कानून एक बिल में: सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल, 2025 का उद्देश्य सेबी एक्ट, डिपॉजिटरीज एक्ट और सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स एक्ट को मिलाकर एक सरल कानून तैयार करना है। संविधान में संशोधन से जुड़ा बिल: संविधान में 131वां संशोधन करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। इस बिल के तहत खासकर चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी को संविधान के आर्टिकल 240 के दायरे में लाया जाएगा। आर्टिकल 240 के तहत केंद्र सरकार केंद्रशासित प्रदेशों के लिए रेगुलेशन बना सकती है, जिन्हें कानून का दर्जा प्राप्त होता है। कंपनियों के खिलाफ विवाद का जल्द निपटारा: कंपनियों और व्यक्तियों के बीच झगड़े अक्सर सालों कोर्ट में लटकते रहते हैं। आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन (अमेंडमेंट) बिल, 2025 का उद्देश्य है कि मध्यस्थता फैसलों को चुनौती देने की प्रक्रिया सरल हो और झगड़ों का समाधान तेजी से हो सके।

2025 में 19 दिन के शीतकालीन सत्र के दौरान 15 बैठकें होंगी
2024 में शीतकालीन सत्र 25 नवंबर से शुरू हुआ था और 20 दिसंबर को समाप्त हुआ था। पूरे सत्र में कुल 20 बैठकें हुईं थीं। इस बार संसद का शीतकालीन सत्र (विंटर सेशन) 1 दिसंबर से 19 दिसंबर तक चलेगा। 19 दिन में पूरे सत्र के दौरान 15 बैठकें होंगी। इससे पहले 21 जुलाई से 21 अगस्त तक संसद का मानसून सत्र चला था। सत्र के पहले दिन राज्यसभा के तत्कालीन उपसभापति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया। फिर पूरा सत्र बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गया था। मानसून सत्र में कुल 21 बैठकें हुईं। लोकसभा में 120 घंटे चर्चा का समय निर्धारित था, लेकिन सिर्फ 37 घंटे कार्यवाही चली। राज्यसभा में सिर्फ 41 घंटे चर्चा हुई। लोकसभा-राज्यसभा में कुल 27 बिल पास हुए। गिरफ्तार पीएम-सीएम को हटाने वाला संविधान संशोधन बिल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। इसे जेपीसी के पास भेजने का प्रस्ताव पारित हुआ।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग ला सकता है विपक्ष
मानसून सत्र के बीच 17 अगस्त को कांग्रेस, टीएमसी, सपा, डीएमके, राजद समेत 8 विपक्षी दलों ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। संसद के शीतकालीन सत्र में आई.एन.डीि.ए. ब्लॉक मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग ला सकता है। 18 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आई.एन.डीि.ए. ब्लॉक की बैठक हुई थी। बैठक के बाद कांग्रेस, टीएमसी, सपा, डीएमके, राजद समेत 8 विपक्षी दलों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा- संसद के मौजूदा सत्र (मानसून सत्र) में 3 दिन बाकी हैं। महाभियोग लाने के लिए 14 दिन पहले नोटिस देना जरूरी है। सीईसी के रवैये को देखते हुए हम अगले सत्र (शीतकालीन सत्र) में नोटिस देंगे। दरअसल, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 7 अगस्त को चुनाव आयोग पर वोट चोरी के आरोप लगाए थे। 17 अगस्त को सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा था- राहुल वोट चोरी के आरोपों पर हलफनामा दें या देश से माफी मांगे।

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