मुंबई| शरद पवार ने जब यह ऐलान किया, तब अजित पवार समेत तमाम बड़े नेता मौजूद थे। यह ऐलान सबके लिए हैरान करने वाले हैं। उनके ऐलान के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया और मनाने की कोशिश की। हंगामे के बीच अजित पवार ने भी उन्हें मनाने की कोशिश की। अजित पवार ने पहले तो कहा कि आप फैसले पर एक बार फिर विचार कर लीजिए, लेकिन बाद में बोले कि पवार साहब अपना फैसला नहीं बदलेंगे। वहीं बैठक में मौजूद सुप्रिया सुले भी चुप रहीं। बता दें, इस मौके पर पवार ने एक चिट्ठी भी लिखी है, जिसमें उन्होंने कहा है कि नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए एक कमेटी का गठन किया जाए। कमेटी में कौन-कौन शामिल होगा, उनके नाम भी उन्होंने सुझाए हैं। शरद पवार ने मराठी में कहा कि मुझे सक्रिय राजनीति में 60 साल से अधिक समय का वक्त हो गया है। मैं चाहता हूं कि अब यह जिम्मेदारी दूसरे संभाले। मैं अपने संसदीय क्षेत्र बारामती को समय देना चाहता हूं। मैं सिर्फ अध्यक्ष पद से रिटायर हो रहा हूं, न कि सक्रिय राजनीति से। जानकारी के मुताबिक, पिछले दिनों से एनसीपी में नई पीढ़ी को आगे लाने की बात कही जा रही है। पवार के ऐलान को उसी सिलसिले में देखा जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी पवार को मनाएगी कि वे अभी कुछ साल और नेतृत्व करें। बता दें, शरद पवार का स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता है। पार्टी का अध्यक्ष पद छोड़ने के पीछे इसे भी कारण बताया जा रहा है। महाराष्ट्र समेत देश की राजनीति पर पड़ेगा असर शरद पवार के इस फैसले के असर महाराष्ट्र ही नहीं, देश की राजनीति पर पड़ सकता है। महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। यह गठबंधन टूटा तो इस बात की गारंटी नहीं होगी कि 2024 का लोकसभा चुनाव ये तीनों दल साथ मिलकर लड़ें।


