एजेंसी, शिलांग/इंदौर। विवादास्पद निर्णय : मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी राजा रघुवंशी की सनसनीखेज हत्या के मामले में एक बड़ा और चौकाने वाला मोड़ सामने आया है। मेघालय की एक स्थानीय अदालत ने मंगलवार को मामले की मुख्य अभियुक्त सोनम रघुवंशी की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया है। सोनम पर अपने ही पति की हत्या का षड्यंत्र रचने और उसे अंजाम देने का अत्यंत गंभीर आरोप है। मेघालय के पुलिस अधीक्षक विवेक एस ने इस न्यायिक निर्णय की पुष्टि करते हुए अवगत कराया कि आरोपी को न्यायालय द्वारा जमानत प्रदान की गई है, जबकि पुलिस विभाग इस प्रकरण में आगामी कानूनी औपचारिकताओं और ठोस साक्ष्यों के संकलन पर कार्य कर रहा है।
हनीमून की यात्रा और रहस्यमयी ढंग से अंत
इस पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि अत्यंत दुखद और रोंगटे खड़े कर देने वाली है। राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम के साथ तेईस मई को नव-विवाह के पश्चात हनीमून मनाने हेतु मेघालय की पहाड़ियों में गए थे, जहाँ से वे संदिग्ध परिस्थितियों में लुप्त हो गए। निरंतर खोजबीन के उपरांत, दो जून को उनका शव पूर्वी खासी हिल्स जनपद के सोहरा (चेरापूंजी) स्थित एक दुर्गम जलप्रपात के समीप क्षत-विक्षत अवस्था में पाया गया। शव की स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट था कि यह साधारण दुर्घटना नहीं अपितु सोची-समझी हत्या थी।
प्रेम प्रसंग और जघन्य षड्यंत्र का आरोप
प्रारंभिक जांच और कड़ियों को जोड़ने के पश्चात पुलिस ने इस हत्याकांड का पर्दाफाश किया था। पुलिस अन्वेषण के अनुसार, सोनम रघुवंशी ने अपने कथित प्रेमी और कुछ अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर अपने पति को मार्ग से हटाने की योजना तैयार की थी। इस घटनाक्रम में पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए सोनम और उसके साथियों को कारागार भेज दिया था। जांच दल का दावा था कि वैवाहिक संबंधों के मध्य आए इस प्रेम प्रसंग के कारण ही राजा रघुवंशी की निर्मम हत्या की गई।
अदालती निर्णय और कानून की आगामी दिशा
सोनम रघुवंशी को जमानत मिलने के पश्चात इंदौर और मेघालय दोनों ही स्थानों पर यह मामला पुनः चर्चा का विषय बन गया है। जहाँ मृतका के परिजन इस निर्णय से आहत और न्याय की प्रतीक्षा में हैं, वहीं अभियोजन पक्ष अब इस निर्णय के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। पुलिस अधीक्षक ने आश्वस्त किया है कि जमानत मिलने के बावजूद मामले की गंभीरता कम नहीं हुई है और पुलिस अदालत में कड़ी पैरवी कर दोषियों को दंड दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस निर्णय ने यह प्रश्न भी खड़ा कर दिया है कि क्या मुख्य अभियुक्त के बाहर आने से साक्ष्यों और गवाहों पर प्रभाव पड़ेगा।
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