भोपाल। राजधानी के विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) राजीव के पाल के न्यायालय ने नौ वर्ष पुराने मामले में निर्णय देते हुए आरोपित अरुण कुमार मेहरा राजकुमार पंचोली चन्द्रकला की कलसुम बी को ही दोषी मानते हुए 3-3 वर्ष के कारावास और रुपये पन्द्रह पन्द्रह हज़ार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं उक्त मामले में 9 आरोपित फरार हैं और एक की मृत्यु हो चुकी है। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक हेमलता कुशवाहा और महेंद्र सिंह दांगी ने प्रकरण में पैरवी की।
न्यायालय ने माना कि आरोपित राजकुमार और कुलसुम ने : अस्सी-अस्सी हज़ार रुपया वहीं चंद्रकला बाथम ने नब्बे हज़ार रुपये भवन के निर्माण हेतु मध्य प्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ से ऋण प्राप्त किया और उस राशि का भवन के निर्माण में उपयोग न करते हुए स्वयं के व्यक्तिगत उपयोग करने का अपराध किया।
यह है मामला : आरोपित अरुण कुमार मेहरा वर्ष 1994-95 से वर्ष 1998-99 के मध्य प्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ में क्षेत्रीय अधिकारी के पद पर थे पदीय स्थिति का दुरूपयोग कर आरोपित राजकुमार पंचौली, कुलसुम बी चन्द्रकला बाथम जो कि गंगा जमना गृह निर्माण सहकारी संस्था के सदस्य होकर आवास संघ के ऋणी थे फर्जी उपयोगिता प्रमाण और फर्जी भवन अनुज्ञा तैयार कर ऋण की राशि दी गई जिसके बाद सभी आरोपितों पर भारतीय दंड विधान की धारा 420 सपठित धारा 120-ख, 467, 468, 471 एवं धारा 409 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया था।


