मनरेगा के बाद इस कानून में होगा बदलाव, जल्द पेश हो सकता है नया बिल

मनरेगा के बाद इस कानून में होगा बदलाव, जल्द पेश हो सकता है नया बिल

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। केंद्र सरकार अब मनरेगा के बाद यूपीए सरकार के दौर में बने दो अहम कानूनों शिक्षा का अधिकार और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में व्यापक सुधार की तैयारी कर रही है। सरकार का मकसद है कि इन योजनाओं का लाभ हर वास्तविक और पात्र व्यक्ति तक पहुंचे और सभी लाभार्थियों का 100% पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।

संसद में पेश हो सकते है नए बिल
सरकार पहले इन कानूनों से जुड़े नियमों और आदेशों में बदलाव के जरिए सुधार करने की कोशिश करेगी। अगर इससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिले, तो संसद में नए संशोधन विधेयक  भी लाए जा सकते हैं। इसके साथ ही सरकार यह भी विचार कर रही है कि आवास के अधिकार को एक कानूनी अधिकार का दर्जा दिया जाए।

कानूनों में 3 बड़ी कमियां
परामर्श प्रक्रिया से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मनमोहन सिंह सरकार के समय बनाए गए विकास से जुड़े अधिकार आधारित कानूनों में तीन बड़ी खामियां सामने आई हैं-

सरकार के लक्ष्य
सरकार ने शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आवास इन पांच बुनियादी जरूरतों को लेकर तीन ठोस लक्ष्य तय किए हैं-

पूरी कवरेज के लिए समय-सीमा तय लक्ष्य
– डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए क्रियान्वयन और रियल टाइम मॉनिटरिंग
– हर नागरिक की पहचान सुनिश्चित करना और राष्ट्रव्यापी रजिस्ट्रेशन अभियान
– सरकार का मानना है कि किसी योजना को कानूनी अधिकार बना देना काफी नहीं, जब तक उसका जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन न हो।

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क्या है खाद्य सुरक्षा और मानक कानून, 2006?
भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 लागू किया गया है। इसका उद्देश्य देश के नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है। इस कानून के तहत एफएसएसएआई की स्थापना की गई। यह कानून किसानों और खाद्य उत्पादकों, प्रोसेसिंग यूनिट्स, होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, थोक और खुदरा विक्रेताओं, स्ट्रीट फूड विक्रेताओं, ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर लागू होता है। अगर कोई इसका उल्लंघन करता है तो ₹10 लाख तक जुर्माना, लाइसेंस रद्द और गंभीर मामलों में जेल की सजा तक का प्रावधान है।

शिक्षा का अधिकार कानून, 2009: क्या कहता है?
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत भारत में 6 से 14 वर्ष तक के हर बच्चे को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21ए में निहित है। कानून 1 अप्रैल 2010 से पूरे देश में लागू हुआ था। कॉलेज और विश्वविद्यालय इस कानून के दायरे में नहीं है। 14 वर्ष से अधिक उम्र के छात्र इसमें शामिल नहीं होते हैं।

विपक्ष का विरोध
संसद के शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार ने मनरेगा की जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल पेश किया था। यह बिल लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पारित हो गया। दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन गया। हालांकि, इस कानून से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

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