मंदसौर गोलीकांड : मध्यप्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, विधानसभा में जांच आयोग की रिपोर्ट पेश नहीं करने पर सकलेचा ने दायर की याचिका

नई दिल्ली प्रादेशिक मंदसौर मध्‍य प्रदेश राष्ट्रीय राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली| सात साल पुराने मंदसौर गोलीकांड को लेकर पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट विवेक तन्खा और सर्वम रितम खरे ने सकलेचा की ओर से पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है।

क्या है पूरा मामला ? : मंदसौर जिले के पिपलिया मंडी में 6 जून 2017 को पार्श्व नाथ चौपाटी पर आंदोलन कर रहे 5 किसानों की पुलिस के गोली चलाने से मौत हो गई थी। इसके बाद गोलीकांड की सीबीआई जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रकरण दर्ज करने की मांग को लेकर पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने साल 2017 में हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में पिटीशन लगाई थी। न्यायाधीश पीके जायसवाल और जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने मप्र सरकार द्वारा जैन आयोग का गठन किए जाने पर पिटीशन को खारिज कर दिया था। सरकार ने गोलीकांड की जांच के लिए 12 जून 2017 को जैन आयोग का गठन किया। जैन आयोग ने अपनी रिपोर्ट 13 जून 2018 को यानी एक साल में राज्य शासन को सौंप दी थी।

6 साल बाद भी विधानसभा में रिपोर्ट पेश नहीं
पूर्व विधायक सकलेचा ने बताया कि जैन आयोग की रिपोर्ट को 6 साल बाद भी विधानसभा के पटल पर नहीं रखा गया। पारस सकलेचा ने बताया कि इस मामले को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर खंड़पीठ में पिटीशन 3 मई 2022 को पेश कर कोर्ट से सरकार को जैन आयोग की रिपोर्ट पर कार्रवाई कर विधानसभा के पटल पर रखने का अनुरोध किया। पारस सकलेचा ने कोर्ट से कहा कि जांच आयोग अधिनियम 1952 की धारा 3(4) के तहत जांच आयोग की रिपोर्ट मिलने के 6 महीनों के अंदर उस पर कार्रवाई कर विधानसभा के पटल पर रखना शासन का दायित्व है ।

हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे सकलेचा
पारस सकलेचा की पिटीशन को हाईकोर्ट इंदौर के न्यायाधीश विवेक रूसिया और बिनोद कुमार द्विवेदी‌ ने 14 अक्टूबर 2024 को खारिज करते‌ हुए कहा कि घटना को 6-7 साल हो जाने पर उसकी रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखने का कोई आधार नजर नहीं आ रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पारस सकलेचा ने 8 जनवरी 2025 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। जहां सीनियर एडवोकेट विवेक तन्खा और सर्वम रितम खरे के तर्क सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी करने का आदेश दिया।

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