फर्जी ईपीआईसी नंबर विवाद : तेजस्वी यादव की बढ़ीं मुश्किलें, चुनाव आयोग ने शुरू की जांच

नई दिल्ली बिहार राष्ट्रीय राष्ट्रीय

एजेंसी, बिहार| बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। उन पर दो अलग-अलग वोटर आईडी कार्ड रखने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले को लेकर चुनाव आयोग ने तत्काल जांच शुरू कर दी है।

तेजस्वी का दावा और शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत तब हुई, जब तेजस्वी ने पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत जारी मतदाता सूची में उनका नाम गायब है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने ईपीआईसी नंबर (आरएबी2916120) को चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जांचा, लेकिन वहां ‘कोई रिकॉर्ड नहीं’ का संदेश मिला। तेजस्वी ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

चुनाव आयोग का जवाब: तेजस्वी का नाम सूची में मौजूद
चुनाव आयोग ने तेजस्वी के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि तेजस्वी का नाम मतदाता सूची में मतदान केंद्र संख्या 204, क्रमांक 416 लिखा हुआ है, और उनका वैध ईपीआईसी नंबर आरएबी0456228 है।

फर्जी ईपीआईसी नंबर का खुलासा
चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि तेजस्वी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ईपीआईसी नंबर आरएबी2916120 पिछले एक दशक के रिकॉर्ड में कहीं नहीं मिला। आयोग को शक है कि यह नंबर अवैध या फर्जी तरीके से बनाया गया हो सकता है। वहीं, दूसरा ईपीआईसी नंबर आरएबी0456228 यह है, जिसके आधार पर तेजस्वी यादव ने साल 2015 और साल 2020 के विधानसभा चुनाव लड़े, आधिकारिक रिकॉर्ड में पूरी तरह वैध है।

जांच के दायरे में राष्ट्रीय जनता दल
चुनाव आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। आयोग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या राष्ट्रीय जनता दल कार्यालय से अन्य फर्जी वोटर आईडी कार्ड बनाए गए हैं। अगर दूसरा ईपीआईसी नंबर फर्जी साबित हुआ, तो यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत गंभीर अपराध माना जाएगा।

विपक्ष का हमला
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने तेजस्वी पर तीखा हमला बोला है। चौधरी ने इसे ‘चुनावी धांधली’ करार देते हुए सख्त जांच की मांग की है। वहीं, नीरज कुमार ने धारा 171एफ आईपीसी के तहत मामला दर्ज करने और तेजस्वी के मतदान अधिकार को अस्थायी रूप से निलंबित करने की मांग उठाई है। इस विवाद ने बिहार की सियासत में नया तूफान खड़ा कर दिया है, और सभी की नजरें अब चुनाव आयोग की जांच के नतीजों पर टिकी हैं।

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