‘प्रोजेक्ट चीता’ : कूनो नेशनल पार्क में सीएम मोहन यादव ने दो मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़ा
एजेंसी, श्योपुर (मध्य प्रदेश)। भारत के महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्योपुर जिले के मशहूर कूनो नेशनल पार्क में दो मादा चीतों को बड़े बाड़े से निकालकर खुले जंगल में आजाद कर दिया है। यह दोनों मादा चीतें उस विशेष दल का हिस्सा हैं, जिन्हें इसी साल फरवरी 2026 में अफ्रीका के बोत्सवाना देश से भारत लाया गया था। इस नए कदम के साथ ही अब देश में चीतों की कुल आबादी बढ़कर 57 हो गई है।
कड़े पहरे से मिली कुदरत की आजादी
बोत्सवाना से कुल 9 चीते लाए गए थे, जिनमें 6 मादा और 3 नर शामिल थे। भारत आने के बाद इन सभी को डॉक्टरों की देखरेख में अलग थलग (क्वारंटीन) रखा गया था ताकि वे यहाँ के मौसम और माहौल में खुद को ढाल सकें। इस जरूरी प्रक्रिया के सफलता से पूरे होने के बाद, अब दो मादा चीतों को घने जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़ दिया गया है। बाड़े का दरवाजा खुलते ही दोनों चीतें छलांग लगाते हुए प्राकृतिक वातावरण का हिस्सा बन गईं।
मुख्यमंत्री ने जताई खुशी और चंबल वासियों को दी बधाई
इस ऐतिहासिक मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने हमेशा से जीवों के साथ मिलकर रहने की परंपरा को निभाया है। उन्होंने श्योपुर और चंबल के नागरिकों को इस सफलता की बधाई देते हुए कहा कि अब इन चीतों का निवास क्षेत्र लगभग 5,000 वर्ग किलोमीटर तक बड़ा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि कूनो के चीते अब इतनी तेजी से दौड़ते हैं कि कभी-कभी तो वे सीमा पार कर राजस्थान तक पहुंच जाते हैं। उन्होंने वन्यजीव विभाग, डॉक्टरों और स्थानीय जनता की तारीफ की जिन्होंने चीतों को अपने परिवार की तरह अपनाया है।
देश को मिला ‘चीता स्टेट’ का गौरव
मध्यप्रदेश अब पूरे देश में ‘चीता स्टेट’ के नाम से अपनी धाक जमा चुका है। भारत में चीतों को दोबारा बसाने की इस योजना की शुरुआत करीब साढ़े तीन साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। वर्तमान में मौजूद 57 चीतों में से 54 कूनो नेशनल पार्क में हैं, जबकि 3 चीतों को गांधी सागर अभ्यारण्य में रखा गया है। आने वाले समय में कूनो के अलावा नौरादेही अभ्यारण्य में भी चीतों का कुनबा बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
नई नस्ल से बढ़ेगी चीतों की ताकत
जंगल के जानकारों और वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना से आए चीतों के कारण भारत में चीतों की जेनेटिक विविधता (आनुवंशिक विविधता) मजबूत होगी। इससे भविष्य में पैदा होने वाले चीते ज्यादा सेहतमंद और मजबूत होंगे, जिससे उनकी आबादी को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।
नामीबिया से बोत्सवाना तक का सफर
भारत में चीतों को वापस लाने का सिलसिला साल 2022 में शुरू हुआ था। सबसे पहले सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से आए 8 चीतों को कूनो में छोड़ा था। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते लाए गए। इसी साल फरवरी 2026 में तीसरी बड़ी खेप के रूप में बोत्सवाना से 9 चीते वायुसेना के विशेष विमान से पहले ग्वालियर और फिर वहां से हेलीकॉप्टर द्वारा कूनो लाए गए थे। इस पूरे प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद सालों पहले भारत से खत्म हो चुकी चीतों की प्रजाति को फिर से जंगलों में स्थापित करना है।
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