नई दिल्ली| भारत का आदित्य स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी को छोड़कर अपने मिशन सूर्य की यात्रा पर निकल गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि आदित्य स्पेसक्राफ्ट ट्रांस-लैग्रेंजियन प्वाइंट (एल1) में प्रवेश कर लिया है। यहां से स्पेसक्राफ्ट अपना 15 लाख किलोमीटर का सफर शुरू करेगा। ये 110 दिन बाद जनवरी 2024 में एल1 प्वाइंट पर पहुंचेगा। इसरो ने बताया कि ट्रांस-लैग्रेंजियन प्वाइंट 1 इंसर्टेशन के लिए यान के थ्रस्टर कुछ देर के लिए फायर किए गए।
इससे पहले सोमवार को इसरो ने बताया था कि आदित्य एल1 ने साइंटिफिक डेटा कलेक्ट करना शुरू कर दिया है। स्पेसक्राफ्ट पर लगे सुप्रा थर्मल एंड एनर्जेटिक पार्टिकल स्पेक्ट्रोमीटर (स्टेप्स) इंस्ट्रूमेंट को 10 सिंतबर को पृथ्वी से 50,000 किलोमीटर दूर एक्टिवेट किया गया था। डेटा की मदद से सूर्य पर उठने वाले तूफान और अंतरिक्ष के मौसम के बारे में जानकारी मिलेगी।स्टेप्स इंस्ट्रूमेंट आदित्य सोलर विंड पार्टिकल एक्सपेरिमेंट (एएसपीईएक्स) पेलोड का हिस्सा है। स्टेप्स में छह सेंसर लगे हैं। हर एक सेंसर अलग-अलग दिशाओं में निरीक्षण करता है। लैगरेंज प्वाइंट का नाम इतालवी-फ्रेंच मैथमैटीशियन जोसेफी-लुई लैगरेंज के नाम पर रखा गया है। इसे बोलचाल में एल1 नाम से जाना जाता है। ऐसे पांच प्वाइंट धरती और सूर्य के बीच हैं, जहां सूर्य और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल बैलेंस हो जाता है और सेंट्रिफ्यूगल फोर्स बन जाती है।
ऐसे में इस जगह पर अगर किसी ऑब्जेक्ट को रखा जाता है तो वह आसानी उस प्वाइंट के चारों तरफ चक्कर लगाना शुरू कर देता है। पहला लैगरेंज प्वाइंट धरती और सूर्य के बीच 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर है। इस प्वाइंट पर ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता। आदित्य एल1 को 2 सितंबर को सुबह 11.50 बजे पीएसएलवी-सी57 के एक्सएल वर्जन रॉकेट के जरिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से लांच किया गया था। लांचिंग के 63 मिनट 19 सेकेंड बाद स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी की 235 किमीx 19 500 किमी की कक्षा में स्थापित कर दिया था। इसके बाद 4 बार स्पेसक्राप्ट के थ्रस्टर फायर कर उसकी ऑर्बिट बढ़ाई गई थी।


