पुलिस कस्टडी में युवक की मौत, थाने के सामने धरने पर बैठे जीतू पटवारी, बोले- पूरे थाने को सस्पेंड करो

देवास प्रादेशिक मध्‍य प्रदेश

देवास। जिले के सतवास पुलिस थाने में हुई युवक की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। रविवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा सतवास पहुंचे। थाने के बाहर धरना दिया। भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी और जयस कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल हुए। मामले में एसपी पुनीत गेहलोद ने सतवास थाना प्रभारी आशीष राजपूत को निलंबित कर दिया है। प्रदशर्न कर रहे नेताओं ने पुलिस पर आरोप लगाए और मांग की कि पूरे थाना स्टाफ को निलंबित किया जाए। आमरण अनशन पर बैठे। हंगामे के चलते शव का पोस्टमार्टम भी नहीं हो पाया। बता दें कि शनिवार देर शाम को सतवास थाने में बयान के लिए बुलाए गए युवक मुकेश लोंगरे (35) ने विवेचक कक्ष में फांसी लगा ली। युवक के खिलाफ एक महिला ने छेड़छाड़ की शिकायत की थी। इसकी जांच के चलते पुलिस ने युवक को बयान के लिए बुलाया था। बयान लिखने की कार्रवाई चल ही रही थी कि युवक ने अपने गमछे से खिड़की से फंदा बनाकर फांसी लगा ली। यह देख पुलिसकर्मियों ने उसे फंदे से अलग किया और अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने जांच करके मृत घोषित कर दिया।

परिजनों का पुलिस पर गंभीर आरोप
जानकारी मिलने पर पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद देवास से सतवास पहुंचे। पूरे मामले की जानकारी लेकर सीसीटीवी फुटेज की जांच की। युवक की मौत की जानकारी मिलने के बाद थाना परिसर में परिजनों व ग्रामीणों की भीड़ लग गई। लोगों ने पुलिस पर युवक से मारपीट, प्रताड़ना के आरोप लगाए। यह भी कहा कि घटना की उनको सूचना तक नहीं दी गई। शव को अस्पताल में छोड़कर आ गए। मामले में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

युवक के साथ नहीं हुई मारपीट- एसपी
एसपी पुनीत गेहलोद ने घटना को लेकर कहा कि युवक के खिलाफ 26 दिसंबर को शिकायती आवेदन मिला था। बयान के लिए उसे थाने बुलवाया गया था। बयान के बाद मौका पाकर युवक गमछे से फंदा बनाकर लटक गया। तत्काल पुलिस जवानों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। युवक के साथ किसी तरह की मारपीट नहीं की गई। मामले की न्यायिक जांच करवाई जाएगी। घटनास्थल व सीसीटीवी फुटेज प्रिजर्व करवाए हैं। डॉक्टरों की पैनल से रविवार को पीएम करवाया जाएगा। सारी प्रक्रिया ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में होगी।

परिजनों ने की मुआवजे की मांग
शनिवार देर रात से ही परिजन थाने के बाहर बैठे रहे। रविवार दोपहर को पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी, सज्जन वर्मा समेत अन्य नेता पहुंचे। उन्हें पुलिस अधिकारियों ने समझाया कि मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। सीसीटीवी फुटेज दिखाने की बात भी सामने आई। परिजन ने 25 लाख रुपये का मुआवजा और बच्चों के नाम जमीन देने की मांग की। एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी रखी। परिजन ने कहा कि पांच फीट की खिड़की से फांसी लगाना असंभव है।

पुलिस ने मांगी थी छह हजार की रिश्वत- जीतू पटवारी
पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि यह मप्र में इस साल की चौथी घटना है, जब दलित की मौत हुई है। घर में बुजुर्ग मां है, दो छोटे बच्चे हैं, कोई कमाने वाला नहीं है। छह हजार की रिश्वत नहीं मिली तो थाने में हत्या हुई। यह बात सामने आई है कि थाने के आसपास शराब बिकती है, सट्टा चलता है और इनमें पुलिस का इन्वाल्वमेंट है। मुख्यमंत्री मोहन यादव में संवेदना होती तो पूरे थाना स्टाफ को सस्पेंड कर देते। ऊपर से नीचे तक सबको प्रश्रय मिला है। दलितों के वोट से सरकार बनती है और उससे ही बेरूखी क्यों। ये आरोप नहीं है, एनसीआरबी के आंकड़े है कि कैसे दलितों पर मप्र में अत्याचार हो रहे। सरकार न्याय नहीं करना चाहती। रावण जैसा अहंकार हो गया है। हमारी मांग यही है कि पूरे स्टाफ को सस्पेंड करो, अगर जांच में दोष सिद्ध नहीं हुआ तो बहाल कर दो। कलेक्टर एसपी का रवैया ठीक नहीं है। पद का अहंकार है। भगवान उनका भला करे। भविष्य में हम भी ध्यान रखेंगे।

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