एजेंसी, कलपक्कम। तमिलनाडु के कलपक्कम से भारत के लिए एक गौरवशाली खबर आई है, कलपक्कम में 500 मेगावॉट का रिएक्टर अंतिम चरण में । देश के 500 मेगावॉट वाले ‘प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ ने सोमवार रात अपना दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। अब यह परमाणु रिएक्टर पूरी तरह चालू होने से मात्र एक कदम दूर है। इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें 80 प्रतिशत से भी ज्यादा स्वदेशी तकनीक और घरेलू उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ी मिसाल है।
रूस के क्लब में शामिल होगा भारत
दुनिया में वर्तमान में केवल रूस ही ऐसा देश है जिसके पास कमर्शियल स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की तकनीक मौजूद है। जैसे ही भारत का यह रिएक्टर अंतिम चरण पूरा कर लेगा, भारत इस विशिष्ट क्लब में शामिल होने वाला दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि भारत ने अपनी परमाणु यात्रा में एक बड़ी सफलता पाई है और अब देश का न्यूक्लियर प्रोग्राम नई ऊंचाइयों को छुएगा।
खर्च से ज्यादा ईंधन पैदा करने की अद्भुत क्षमता
इस रिएक्टर का डिजाइन इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा तैयार किया गया है। इसकी कार्यप्रणाली बेहद अनोखी है; यह जितना ईंधन इस्तेमाल करता है, उससे कहीं अधिक मात्रा में ईंधन पैदा करने की क्षमता रखता है। इसमें यूरेनियम और प्लूटोनियम के मिश्रण (MOX) का प्रयोग ईंधन के रूप में होता है। यह तकनीक भारत के लिए भविष्य का रास्ता इसलिए खोलती है क्योंकि यह आगे चलकर थोरियम को भी यूरेनियम में बदलने में सक्षम होगी।
भारत के लिए क्यों है यह गेम चेंजर
भारत के पास यूरेनियम का भंडार सीमित है लेकिन थोरियम के मामले में भारत दुनिया में सबसे संपन्न देश है। यह तकनीक भारत को थोरियम का उपयोग कर बिजली बनाने में सक्षम बनाएगी, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा हमेशा के लिए सुनिश्चित हो सकेगी। कोयले पर निर्भरता कम करने और साल 2070 तक प्रदूषण मुक्त (नेट-जीरो) भारत के लक्ष्य को पाने के लिए यह परमाणु संयंत्र बेहद जरूरी है। इसके अलावा, कम जगह में लाखों घरों को रोशन करने की क्षमता इसे सोलर या विंड एनर्जी से अधिक टिकाऊ बनाती है।
दो दशकों की मेहनत और भविष्य का लक्ष्य
इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट की नींव साल 2003 में रखी गई थी और इसे पूरा करने में देश की 200 से अधिक कंपनियों ने मिलकर काम किया है। फिलहाल भारत की कुल बिजली का केवल 3 प्रतिशत हिस्सा परमाणु ऊर्जा से आता है, लेकिन सरकार का लक्ष्य साल 2047 तक इसे 12 गुना बढ़ाकर देश की ऊर्जा जरूरतों का मुख्य आधार बनाना है। जहाँ चीन और अमेरिका इस क्षेत्र में पुरानी और नई चुनौतियों से जूझ रहे हैं, वहीं भारत अपनी स्वदेशी फास्ट ब्रीडर तकनीक से दुनिया को अपनी ताकत का अहसास करा रहा है।
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