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बस्तर में लाल आतंक की कमर टूटी : भारी इनाम वाले सात नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता, सुरक्षाबलों को सौंपी घातक एके-47 राइफल

छत्तीसगढ़ देश/प्रदेश राष्ट्रीय

एजेंसी, रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के दो अलग-अलग जिलों में चार महिला माओवादियों समेत कुल सात नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की जानकारी साझा की। बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टलिंगम ने बताया कि दंतेवाड़ा जिले में सक्रिय माओवादियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े पांच नक्सलियों ने दंतेवाड़ा पुलिस लाइंस में पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष घुटने टेक दिए। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर सामूहिक रूप से नौ लाख रुपये का इनाम घोषित था।

पुलिस महानिरीक्षक ने जानकारी दी कि इन नक्सलियों ने पुलिस द्वारा चलाई जा रही ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ नामक विशेष मुहिम से प्रभावित होकर शस्त्र त्यागने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वालों में भैरमगढ़ एरिया कमेटी का सदस्य सोमे कडती (42) शामिल है, जिस पर पांच लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा एक-एक लाख रुपये के इनामी चार अन्य सदस्य लखमा ओयाम (19), सरिता पोड्याम (21), जोगी कलमू (20) और मोती ओयाम (19) ने भी आत्मसमर्पण किया है।

अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों से प्राप्त खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने माओवादियों के गुप्त ठिकानों पर छापेमारी कर 40 हथियार बरामद किए हैं। इन हथियारों में आठ एसएलआर राइफल, तीन इंसास राइफल, एक कार्बाइन, एक .303 राइफल और पांच बीजीएल लांचर जैसे घातक हथियार शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में हथियारों की बरामदगी से इस प्रतिबंधित संगठन की सैन्य ताकत को गहरा आघात पहुंचा है।

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इसी कड़ी में कांकेर जिले से भी सफलता की खबर आई है, जहां दो सक्रिय नक्सलियों शंकर (प्लाटून पार्टी समिति सदस्य) और हिडमा डोडी (प्लाटून सदस्य) ने सुरक्षाबलों के सामने समर्पण कर दिया। इन नक्सलियों ने पुलिस को एक एके-47 राइफल भी सौंपी है। सुंदरराज पट्टलिंगम ने बताया कि क्षेत्र में सक्रिय अन्य माओवादी कैडरों से भी निरंतर संपर्क साधा जा रहा है और उन्हें हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने के प्रयास युद्ध स्तर पर जारी हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण और सरकारी पुनर्वास योजना का लाभ उठाने की समय सीमा समाप्त होने में अब केवल कुछ ही घंटों का समय शेष बचा है। ऐसे में उन्होंने शेष नक्सलियों से भावुक अपील करते हुए कहा कि वे इस अवसर का विवेकपूर्ण उपयोग करें, अपने हिंसक अतीत को त्यागें और एक शांतिपूर्ण तथा गरिमामय जीवन की नई शुरुआत करें।

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