नई संसद में पीएम बोले- यह भवन नहीं, भारतवासियों की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिम्ब, दृढसंकल्प का संदेश

नई दिल्ली राष्ट्रीय

नई दिल्ली| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नए संसद भवन का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद पीएम मोदी ने देशवासियों को लोकतंत्र के इस स्वर्णिम क्षण की बधाई दी। नए संसद भवन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले संबोधन में कहा कि ये सिर्फ एक भवन नहीं, 140 करोड़ भारतवासियों की आकांक्षाओं और सपनों का प्रतिबिम्ब है। ये विश्व को भारत के दृढ़संकल्प का संदेश देता हमारे लोकतंत्र का मंदिर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज नए संसद भवन को देखकर हर भारतीय गौरव से भरा हुआ है। इसमें वास्तू, विरासत, कला, कौशल, संस्कृति और सविंधान भी है। संसद के प्रांगण में राष्ट्रीय वृक्ष बरगद भी है। उन्होंने कहा कि भारत न सिर्फ लोकतंत्र का सबसे बड़ा देश है। बल्कि मदर ऑफ डेमोक्रेसी भी है। यह वैश्विक लोकतंत्र की नींव भी है। लोकतंत्र हमारा संस्कार, विचार और परंपरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन के उद्घाटन के बाद कहा कि नया संसद भवन योजना को यथार्थ से, नीति को निर्माण से, संकल्प को सिद्धि से जोड़ने वाली अहम कड़ी साबित होगा। नया भवन स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने का आधार बनेगा। नया भवन आत्मनिर्भर भारत के नए सूर्य का साक्षी बनेगा। नया भवन नूतन और पुरातन के सह अस्तित्व का भी आदर्श है।

नए संसद भवन से प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पहले संबोधन में कहा है कि नए रास्तों पर चलकर ही नए कीर्तिमान गढ़े जाते है। नया भारत नए लक्ष्य तय कर रहा है। नया जोश है, नया उमंग है, नया सफर है। नई सोच है, दिशा नई है, दृष्टि नई है। संकल्प नया है, विश्वास नया है। उन्‍होंने कहा कि जब भारत आगे बढ़ता है तो विश्व आगे बढ़ता है। संसद का ये नया भवन भारत के विकास से विश्व के विकास का आह्वान करेगा। संसद में पवित्र सेंगोल भी स्थापित हुआ, जो महान चोल साम्राज्य में कर्तव्य पथ का, सेवा पथ का, राष्ट्र पथ का प्रतीक माना जाता था। राजाजी और अधीनम के संतों के मार्ग दर्शन में सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक बना था। तमिलनाडु अधीनम के संत संसद में आशीर्वाद देने आए थे, उन्हें दोबारा श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। पिछले दिनों मीडिया में इसके इतिहास से जुड़ी बहुत सारी जानकारी उजागर हुई है। मैं उसके विस्तार में नहीं जाना चाहता। पीएम मोदी ने क‍हा कि ये समय की मांग थी कि संसद की नई इमारत का निर्माण किया जाए। मुझे खुशी है कि भव्य इमारत आधुनिक सुविधाओं से लैस है। इस समय भी इस हॉल में सूर्य का प्रकाश सीधे आ रहा है। बिजली कम से कम खर्च हो, हर तक लेटेस्ट गैजेट्स हों, इसका ध्यान रखा गया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक राष्ट्र ही नहीं, मदर ऑफ डेमोक्रेसी भी है। वैश्विक लोकतंत्र का बड़ा आधार है। लोकतंत्र हमारे लिए व्यवस्था ही नहीं, संस्कार, विचार और परंपरा है। हमारे वेद हमें सभाओं और समितियों के लोकतांत्रिक आदर्श सिखाते हैं। महाभारत में गणों और गणतंत्रों का उल्लेख मिलता है। हमने वैशाली के गणतंत्र को जीकर दिखाया है। तमिलनाडु में मिला 900 ईस्वी का शिलालेख सभी को हैरान कर देता है। लोकतंत्र ही प्रेरणा है और संविधान ही संकल्प है। इस प्रेरणा और संकल्प की सबसे श्रेष्ठ प्रतिनिधि ही संसद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन का लोकार्पण करने के बाद ट्वीट कर नए भवन को भव्य और दिव्य बताया। पीएम मोदी ने लिखा, आज का दिन हम सभी देशवासियों के लिए अविस्मरणीय है। उन्होंने अपने ट्वीट में आगे कहा कि संसद का नया भवन हम सभी को गर्व और उम्मीदों से भर देने वाला है। मुझे पूरा विश्वास है कि यह दिव्य और भव्य इमारत जन-जन के सशक्तिकरण के साथ ही, राष्ट्र की समृद्धि और सामर्थ्य को नई गति और शक्ति प्रदान करेगी।

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