डोभाल बोले- गलवान की घटना ने भारत-चीन के बीच विश्वास को खत्म किया, चीनी डिप्लोमैट ने कहा- हमारे रिश्तों का असर दुनिया पर पड़ेगा

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जोहान्सबर्ग : जोहान्सबर्ग में फ्रेंड्स ऑफ ब्रिक्स मीटिंग के दौरान मंगलवार को भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) अजीत डोभाल और चीन के टॉप डिप्लोमैट वांग यी से मुलाकात हुई। इस दौरान डोभाल ने दोटूक कहा कि गलवान की घटना ने भारत-चीन के बीच रणनीतिक विश्वास को खत्म कर दिया है। वहीं, वांग यी ने कहा कि भारत और चीन एक दूसरे के दुश्मन नहीं है और नई दिल्ली को अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। दोनों देश चाहे एक-दूसरे का समर्थन करें या विरोध, इसका सीधा असर भारत-चीन के विकास और वैश्विक परिदृश्य पर पड़ेगा।

वांग यी ने दावा किया कि पिछले साल बाली में हुई बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय संबंधों को फिर से शुरू करने को लेकर सहमति बनी थी। चीन की इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी बीवाईडी मोटर्स का भारत में प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव खारिज होने के बाद वांग यी ने इस पर दोबारा विचार करने की अपील की है। इसके अलावा डोभाल ने दुनिया में साइबर सिक्योरिटी और एआई से जुड़े चैलेंज पर भी बात की। उन्होंने कहा कि एआई, बिग डेटा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी टेक्नोलॉजी के आने से साइबर खतरों की गंभीरता तेजी से बढ़ेगी। उन्होंने साइबर स्पेस की चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त कोशिशों पर जोर दिया। डोभाल ने कहा कि इन चैलेंज का सामना करने के लिए भारत हमेशा ग्लोबल साउथ के साथ खड़ा रहेगा।

चीनी न्यूज एजेंसी शिनहुआ के मुताबिक बैठक के दौरान दोनों राजनयिकों के बीच तनाव खत्म करने पर सहमति बनी। दोनों डिप्लोमैट्स ने इस बात पर भी सहमति जताई कि भारत-चीन के बीच अच्छे द्विपक्षीय रिश्ते सिर्फ दोनों देशों के विकास के लिए ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी हैं। वांग ने डोभाल से दोनों देशों के बीच संबंधों को स्थिर करने की बात कही। इसके जवाब में डोभाल ने भी दोनों देशों के आपसी हितों का जिक्र किया।

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