चंद्रयान-5 से लेकर डिफेंस तक… जापान के साथ भारत की धमाकेदार डील, 21 समझौतों पर हस्ताक्षर

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भारत में पूंजी केवल बढ़ती नहीं, बल्कि कई गुना बढ़ती है, जापान से पीएम मोदी का मैसेज

एजेंसी, टोक्यो, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत और जापान मिलकर स्थिरता, वृद्धि और समृद्धि के लिए एशियाई सदी को आकार देंगे। मोदी ने यहां आयोजित भारत-जापान आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए कहा कि जापान की उत्कृष्टता एवं भारत की व्यापकता एक आदर्श साझेदारी और पारस्परिक वृद्धि का निर्माण कर सकती है। प्रधानमंत्री आज सुबह दो दिवसीय यात्रा पर जापान की राजधानी टोक्यो पहुंचे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार और शुल्क नीतियों को लेकर अमेरिका के साथ भारत के संबंधों में तनाव है। भारत को एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में पेश करते हुए मोदी ने कहा कि देश में राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ नीतिगत निर्णयों में पारदर्शिता के साथ भरोसेमंद होना है। उन्होंने कहा कि भारत में पूंजी केवल बढ़ती ही नहीं, बल्कि कई गुना बढ़ती है। मोदी ने कहा, ‘‘भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और बहुत जल्द यह तीसरी सबसे बड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था बन जाएगा।’’ पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने कृत्रिम मेधा (एआई), सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में साहसिक एवं महत्वाकांक्षी पहल की हैं। उन्होंने कहा कि जापान की प्रौद्योगिकी और भारत की प्रतिभा मिलकर इस सदी की प्रौद्योगिक क्रांति का नेतृत्व कर सकती है। मोदी ने कहा कि भारत और जापान… मोटर वाहन क्षेत्र जैसी सफल साझेदारी अब रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, जहाज विनिर्माण और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में भी बना रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा में जापान सदैव एक महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। मेट्रो से लेकर विनिर्माण तक, सेमीकंडक्टर से लेकर स्टार्टअप तक हर क्षेत्र में भारत-जापान साझेदारी आपसी विश्वास का प्रतीक बनी है। मोदी ने कहा कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ में जापानी कंपनियों को एक आधार प्रदान करता है। भारत और जापान ‘ग्लोबल साउथ’ खासकर अफ्रीका के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। ‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित और विकासशील देशों के लिए किया जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता के साथ ही नीतियों में पारदर्शिता ने इसे विशेष रूप से हरित ऊर्जा, विनिर्माण और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में एक आकर्षक निवेश स्थल बना दिया है। उन्होंने कहा कि जापानी कंपनियों ने भारत में 40 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिसमें पिछले दो वर्षों में 13 अरब डॉलर का निवेश शामिल है।जोर दिया है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों जापान दौरे पर हैं. यहां उन्होंने जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा से मुलाकात की. इस मुलाकात में दोनों देशों ने मिलकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा की और भविष्य की साझेदारी की दिशा तय की. नतीजा ये हुआ कि भारत और जापान के बीच कुल 21 समझौतों पर दस्तखत हुए. इन समझौतों में सुरक्षा, रक्षा, तकनीक, पर्यावरण और संस्कृति से जुड़े बड़े फैसले शामिल हैं. ये समझौते कौन-कौन से हैं और किस तरह दोनों देशों का रिश्ता आगे और मज़बूत होने वाला है.

1- भारत-जापान अगले दशक की संयुक्त दृष्टि
दोनों देशों ने अगले दस सालों के लिए एक संयुक्त रणनीति तैयार की है. इसमें आर्थिक साझेदारी, सुरक्षा, टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे आठ बड़े क्षेत्रों पर मिलकर काम करने की बात हुई है.
2- सुरक्षा और रक्षा पर बड़ा कदम
भारत और जापान ने सुरक्षा सहयोग पर एक संयुक्त घोषणा की है. इसके तहत दोनों देश मिलकर नई सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए रक्षा साझेदारी को और मजबूत करेंगे.
3- मानव संसाधन का आदान-प्रदान
दोनों देशों ने अगले पांच साल में करीब 5 लाख लोगों के आपसी आदान-प्रदान का लक्ष्य रखा है. इसमें भारत से 50,000 कुशल और अर्धकुशल लोग जापान में काम करने जाएंगे.
4- कार्बन उत्सर्जन और निवेश
कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए दोनों देश मिलकर नई तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देंगे. इस समझौते से जापानी निवेश भी भारत में बढ़ेगा और सतत विकास को ताकत मिलेगी.
5- डिजिटल साझेदारी 2.0
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल टैलेंट और एआई, आईओटी और सेमीकंडक्टर्स जैसे हाई-टेक सेक्टर में दोनों देश मिलकर काम करेंगे.
6- खनिज संसाधनों पर सहयोग
महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, खनन और प्रोसेसिंग के लिए भारत और जापान ने साझेदारी की है. इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और संयुक्त निवेश को बढ़ावा मिलेगा.
7- चंद्रयान-5 मिशन में साथ
भारत की इसरो और जापान की जाक्सा मिलकर चंद्रयान-5 मिशन पर काम करेंगे. दोनों देश चांद के ध्रुवीय इलाकों की खोज के लिए एक साथ मिशन चलाएंगे.
8- स्वच्छ हाइड्रोजन और अमोनिया
दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा पर भी जोर दिया है. रिसर्च, निवेश और नई तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर मिलकर काम होगा.
9- कला और संस्कृति का आदान-प्रदान
भारत और जापान कला, संग्रहालय और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में भी साझेदारी करेंगे.
10- अपशिष्ट जल और पर्यावरण पर काम
शहरों में वेस्ट वाटर मैनेजमेंट और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी समझौते हुए हैं. प्रदूषण कम करने और क्लाइमेट चेंज से लड़ने में दोनों देश मिलकर काम करेंगे.
11- राजनयिक प्रशिक्षण और विज्ञान सहयोग
भारत का सुशमा स्वराज इंस्टीट्यूट और जापान का विदेश मंत्रालय आपसी प्रशिक्षण में साथ देंगे. साथ ही दोनों देशों के वैज्ञानिक और स्टार्टअप भी रिसर्च और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट में मिलकर काम करेंगे.

अन्य बड़े फैसले
इन समझौतों के अलावा भी कई बड़े नतीजे सामने आए हैं.
जापान अगले दस साल में भारत में 10 ट्रिलियन येन का निजी निवेश करेगा.
आर्थिक सुरक्षा पहल की शुरुआत हुई है, जिसमें सेमीकंडक्टर्स, क्लीन एनर्जी, दूरसंचार और खनिजों की सप्लाई चेन पर काम होगा.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक नई पहल शुरू होगी, जिसमें बड़े भाषा मॉडल और स्टार्टअप्स को मदद मिलेगी.
रेलवे, एविएशन, पोर्ट और लॉजिस्टिक्स में दोनों देशों के बीच पार्टनरशिप बढ़ेगी.
छोटे और मझोले उद्योगों के बीच सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा.
बायोगैस और बायोफ्यूल जैसे टिकाऊ ईंधन पर भी रिसर्च और साझेदारी होगी.
भारत के अलग-अलग राज्यों और जापान के प्रांतों के बीच डेलीगेशन विज़िट बढ़ाई जाएंगी.
जापान के कंसाई और क्यूशू क्षेत्रों में नए व्यापार मंच बनाए जाएंगे ताकि व्यापार और सांस्कृतिक रिश्ते गहरे हों.

 

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