गृह मंत्रालय ने 1,100 से ज्यादा पोस्ट हटाने के लिए ‘एक्स’ को भेजा नोटिस, कंपनी ने कहा- नहीं डिलीट कर सकते क्योंकि…

गृह मंत्रालय ने 1,100 से ज्यादा पोस्ट हटाने के लिए ‘एक्स’ को भेजा नोटिस, कंपनी ने कहा- नहीं डिलीट कर सकते क्योंकि…

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एजेंसी, नई दिल्ली। भारत सरकार का गृह मंत्रालय मार्च 2024 से अब तक एक्स कॉर्प (पहले ट्विटर) को 91 नोटिस भेज चुका है। इसमें कानून के अलग-अलग प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले 1,100 से ज्यादा लिंक्स को हटाने की मांग की गई है।

सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने से संबंधित 566 यूआरएल हटाने की मांग
एक्स कॉर्प को भेजे नोटिसों में 566 यूआरएल ‘सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने’ से संबंधित थे। इसके अलावा, 124 यूआरएल राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियों को टारगेट करने वाले थे। इन सभी को हटाने का अनुरोध किया गया है। मार्च 2024 से नवंबर 2025 तक, गृह मंत्रालय ने एक्स को 58 नोटिस भेजे, जिनमें सार्वजनिक शांति भंग और दुश्मनी बढ़ाने संबंधित 24 आरोप शामिल थे। वहीं, 3 अन्य नोटिस राष्ट्रीय अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा मानते हुए भेजे गए थे।

किस मामले में जारी हुए कौन से नोटिस?
द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 20 महीनों में जारी 91 नोटिस में 14 नोटिस ऐसे थे। जो आपराधिक गतिविधियों जैसे बेटिंग ऐप्स, वित्तीय धोखाधड़ी और बाल शोषण कंटेंट से जुड़े थे। सबसे ज्यादा 115 पोस्ट एक ही नोटिस में थे, जिसे 13 मई को एक्स के खिलाफ जारी किया गया था। यह चुनाव को प्रभावित करने वाले वीडियो से जुड़ा था। इसके अलावा, लोकसभा चुनाव (अप्रैल-मई 2024) के दौरान, 761 पोस्ट फ्लैग किए गए, जिनमें 198 जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का सीधा उल्लंघन कर रहे थे।

एक्स ने लिंक हटाने से किया इनकार
अब गृह मंत्रालय ने दिल्ली हाई कोर्ट में दायर अपने एफिडेविट में जानकारी दी है कि एक्स समूह उन नोटिस में बताए गए गैर-कानूनी कंटेंट पर आपत्ति जता रहा है। इसके साथ ही आईटी एक्ट के सेक्शन 79(3)(बी) के तहत ऐसे कंटेंट को हटाने के लिए नोटिस देने के अथॉरिटी पर भी सवाल उठा रहा है। एक्स कॉर्प का कहना है कि टेकडाउन या ब्लॉकिंग ऑर्डर जारी करने की प्रक्रिया आईटी एक्ट के सेक्शन 69ए के तहत होनी चाहिए। जिसका इस्तेमाल आमतौर पर ऑनलाइन सेंसरशिप निर्देश जारी करने के लिए किया जाता है, लेकिन यह राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े अपराधों तक ही सीमित है। एक्स कॉर्प का यह भी तर्क है कि आईटी एक्ट के सेक्शन 79(3)(बी) के तहत नोटिस बिना न्यायिक प्रक्रिया के कंटेंट हटाने का दायरा बढ़ाते हैं, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए सेफ हार्बर क्लॉज का उल्लंघन है। इसका मतलब है कि सरकार की कार्रवाई से प्लेटफॉर्म्स की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

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