
गोस्वामी तुलसीदास जी ने एक दोहे के माध्यम से मुखिया की योग्यताओं, सामर्थ्य और उसकी विशेषताओं के बारे में बड़ी बारीकी से लिखा है-
मुखिया मुख सो चाहिए, खान-पान कौ एक।
पाले पोसे सकल अंग, तुलसी सहित विवेक।।
अर्थात मुखिया को मुख के समान होना चाहिए। भावार्थ यह कि मुख सदैव ही अच्छे और बुरे स्वाद को भुगतते हुए, उसकी परवाह किए बगैर, भोजन पदार्थों को ग्रहण करता है । लेकिन उसमें से वह अपने पास कुछ नहीं रखता। बाहर से प्राप्त किए गए भोजन को शरीर के उस हिस्से में भेज देता है, जहां से वह ऊर्जा के रूप में समस्त अंगों को उनकी आवश्यकता अनुसार प्राप्त होता रहता है। फल स्वरुप सभी अंग समान रूप से फलते फूलते हैं और इस प्रकार समूचा शरीर तंदुरुस्त बना रहता है। यही वजह है कि मुखिया परिवार का हो, समुदाय का हो, समाज का हो या फिर सरकार का। सभी को मुख के समान होना चाहिए, भारतीय परंपरा में ऐसी व्यवस्था सनातन काल से चली आ रही है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जब कभी भी जनहित में कोई निर्णय लेते हैं, तब उपरोक्त सभी योग्यताएं उनके भीतर व्यापक रूप में परिलक्षित होने लगती हैं। उदाहरण के लिए – बीते दिनों कैबिनेट के भीतर और बाहर उन्होंने जो निर्णय लिए, उन्होंने समाज के लगभग प्रत्येक वर्ग को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। जैसे की लहसुन की मंडियों में बिक्री को लेकर आढ़त की अपरिहार्यता को अब खत्म कर दिया गया है। अदालत की भावनाओं का मान मन रखते हुए, प्रदेश की मंडियों में लहसुन की सीधे-सीधे नीलामी होने लगी है। इससे एक किसानों को दलाली देने से छुटकारा मिल गया है। वहीं उनको लहसुन की बिक्री में प्रति क्विंटल ₹2000 का अतिरिक्त लाभ होने लगा है। इससे किसानों के बीच हर्ष और उल्लास का वातावरण है। क्योंकि सरकारी नीलामी में लहसुन के भाव बढ़ गए हैं। अब वहां लहसुन की नीलामी मंडी समिति की तरफ से की जा रही है। भुगतान प्रक्रिया सुरक्षित होने से किसान की चिंताएं भी खत्म हुई हैं । वहीं आम आदमी को भी राहत मिलने की उम्मीदें बढ़ गई हैं । क्योंकि अभी तक आड़तिये लहसुन की उपज पर छोटे व्यापारियों से 5% राशि दलाली के रूप में लिया करते थे । फल स्वरुप लहसुन की लागत बढ़ जाती थी। तब होता यह था कि जनता को लहसुन महंगे दामों पर उपलब्ध हो पाता था। लेकिन अब यह प्रथा खत्म होने से इसका सीधा फायदा किसानों के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कर्मचारियों के हित में भी बड़ी घोषणाएं की हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि 1 मई से तबादलों पर से रोक हट जाएगी। यह महीने भर तक चलते रहेंगे। कैबिनेट में इस आशय की जानकारी मंत्रियों को देते हुए उन्होंने बताया कि अगली कैबिनेट बैठक में तबादला नीति का प्रस्ताव मंजूरी के लिए लाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस घोषणा से 7 लाख 50,000 कर्मचारियों को फायदा होने वाला है। इच्छुक लोग तबादलों के लिए अर्जियां लगा सकेंगे। यह भी स्पष्ट किया गया है कि अपनी सुविधा अनुसार आवेदक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों में से कोई एक विकल्प चुन सकेंगे। जिले से बाहर तबादले करने का अधिकार विभागीय मंत्रियों को रहेगा। संभव है जिले के अंदर तबादलों से जुड़े आवेदनों पर प्रभारी मंत्री निर्णय ले सकेंगे। कर्मचारियों के बीच इस बात को लेकर भी प्रसन्नता का वातावरण है कि तबादला नीति अथवा तबादले के परिणामों से असंतुष्ट होने पर कर्मचारियों को सुनवाई के लिए 15 दिनों तक का समय प्राप्त रहेगा। तीसरा निर्णय गांव वालों के पक्ष में आया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अगले महीने से एयर एंबुलेंस की सुविधा ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को भी उपलब्ध कराई जाए फिलहाल यह सुविधा मेडिकल कॉलेज वाले जिला मुख्यालयों तक ही सीमित है। लेकिन अब जल्दी ही इसका दायरा बढ़ाया जा रहा है। इस बाबत मंगलवार को बुलाई गई समीक्षा बैठक में जिम्मेदार अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। स्पष्ट किया गया है कि ग्रामीण स्तर पर भी बहुत से मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें उपचार की तुरंत आवश्यकता होती है। इसे एयर एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराके परिपक्व किया जाना चाहिए। गर्मियों के साथ-साथ जल संकट की आहट मिलने लगती है। यह प्रदेश में विकराल रूप धारण करे, इसके पहले ही मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि मंत्री गण अपने-अपने प्रभाव वाले जिलों में पेयजल से संबंधित स्थितियों की तुरंत समीक्षा करें। यदि कहीं कोई आशंका दिखाई देती है तो तत्काल उसका निराकरण किया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जल संकट आने से पहले हमें जल आपूर्ति की सुनिश्चितता तय कर लेनी चाहिए। निर्णय लेने की तत्परता मध्यप्रदेश के निवासियों को राहत देती है कि उन्हें मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता का लाभ मिलता रहेगा।


