कांग्रेस ने नर्सिंग घोटाले की सीबीआइ जांच पर उठाए सवाल, कहा- सबने मिलकर लीपापोती की

प्रादेशिक भोपाल मध्‍य प्रदेश

पूरे घोटाले में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, नर्सिंग काउंसिल और कालेज संचालकों की मिलीभगत है।
हेमंत कटारे ने कहा कि विधानसभा के आगामी सत्र में नर्सिंग घोटाले को जोर-शोर से उठाया जाएगा।
मुकेश नायक ने सीबीआइ जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब नया शब्द उपयुक्त निकाला है।

भोपाल। मध्य प्रदेश में हाई कोर्ट के निर्देश पर नर्सिंग कालेजों की अनियमितता की सीबीआइ द्वारा की जा रही जांच पर प्रदेश कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि उपयुक्त, कमी वाले और अयोग्य कालेजों की सूची बनाने में अनियमितता की गई। जांच के घेरे में जो कालेज हैं, उनमें प्रवेश ले चुके विद्यार्थियों के पंजीयन के लिए तीन दिन पहले अनुमति दे दी। इस पूरे घोटाले में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, नर्सिंग काउंसिल और कालेज संचालकों की मिलीभगत है। मीडिया से चर्चा में गुरुवार को विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने कहा कि विधानसभा के आगामी सत्र में नर्सिंग घोटाले को जोर-शोर से उठाया जाएगा। पहले ही मध्य प्रदेश व्यापमं घोटाले में बदनाम हो चुका है। वहीं, मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने सीबीआइ जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब नया शब्द उपयुक्त निकाला है।

इस श्रेणी में 169, कमियों वाले 73 और अयोग्य 66 कालेज बताए गए। जांच में जिन्हें उपयुक्त बताया गया वे फर्जीवाड़े में शामिल पाए गए। इनके अध्यक्ष, निदेशक, प्राचार्य सहित अन्य लोगों की गिरफ्तारी की गई। जिन्हें जांच करके रिपोर्ट देनी थी, वो स्वयं इस घोटाले पर परदा डालने में सहयोगी बन गए। यह बेहद गंभीर मामला है क्योंकि नर्सिंग स्टाफ के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी रहती है। इस पूरे मामले को न्यायालय तक ले लाने वाले भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन की मेडिकल विंग के अध्यक्ष रवि परमार ने बताया कि यह मामला कोई आज का नहीं है। भाजपा के मंत्री, नेता और अधिकारियों के संरक्षण में यह काफी समय से चल रहा है।

नर्सिंग काउंसिल में जब मान्यता देने के नाम पर गड़बड़ियां की गईं तो इसका विरोध हुआ पर सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया। अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए कालेज स्थापना के नियमों में संशोधन किए गए। निरीक्षण के नाम पर आंख बंद कर ली गई। एक भवन में दो-दो कालेज संचालित होना बताया। फैकल्टी के नाम पर भी बड़ी धांधली हुई। एक व्यक्ति को आठ-आठ जगह कार्यरत दिखाया गया। इसका कभी सत्यापन नहीं किया गया। जिन कालेजों को उपयुक्त बताया गया, वे फर्जीवाड़े में घिर गए। जिनके नाम एफआइआर में आए, उन्हें वर्ष 2022-23 के लिए विद्यार्थियों के पंजीयन की अनुमति दे दी गई। इस पूरे मामले में गंभीरता से जांच हो, तभी पर्दे के पीछे से घोटाले को अंजाम देने वाले सामने आ पाएंगे।

हाईकोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में हो जांच
कांग्रेस ने नर्सिंग घोटाला की जांच के मामले में जिस तरह सीबीआइ के अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है, उसके आधार पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने की मांग की है। विधानसभा में उपनेता हेमंत कटारे ने कहा कि यह बात चौकाने वाली है कि गिरफ्तारी के बाद सीबीआइ के अधिकारी फोन पर बात करते रहे। वे किससे बात कर रहे थे। जबकि, सामान्य मामले में भी पहले मोबाइल फोन जब्त किया जाता है। मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय और मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल में अभी भी वे लोग पदस्थ हैं, जिनको लेकर हाईकोर्ट टिप्पणियां कर चुका है। यह बिना सरकार के संरक्षण के संभव नहीं है। विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

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