इसरो को फिर से बम उड़ाने की धमकी, बेंगलुरु के हेडक्वार्टर में आया मेल

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इसरो को फिर से बम उड़ाने की धमकी, बेंगलुरु के हेडक्वार्टर में आया मेल

एजेंसी, बेंगलुरु। भारत की स्पेस एजेंसी इंडियन स्पेक्स रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। बेंगलुरु स्थिति स्पेस एजेंसी के हेडक्वार्टर में यह धमकी भरा मेल भेजा गया है। इससे पहले 29 जून को भी इसरो सहित भारत सरकार के अन्य संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। एक ईमेल के जरिये एनआईए, डीआरडीओ, एनपीसीआईएल और नागरिक उड्डयन मंत्रालय जैसे हाई सिक्योरिटी वाले ठिकानों पर बम होने का दावा किया गया था।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
ईमेल में कहा गया कि इन जगहों पर बम लगाए गए हैं और बड़ा ब्लास्ट हो सकता है। जानकारी मिलते ही सभी एजेंसियां अलर्ट हो गईं। सुरक्षा प्रोटोकॉल के मुताबिक तुरंत जांच शुरू की गई। बम निरोधक दस्ते और पुलिस की टीमों ने सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन कहीं कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला। बाद में साफ हो गया कि पूरी धमकी फर्जी थी।

पकड़ा गया आरोपी
पुलिस ने तकनीकी जांच से ईमेल के सुराग पकड़े। मोबाइल नंबर और अन्य डिटेल्स से पता चला कि आरोपी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के संयोग नगर में रहता है। 36 साल के निशांत त्यागी को 30 जून को घर से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पता चला कि निशांत 2008 से मानसिक बीमारी का इलाज करा रहा है। उसका लंबा मेडिकल इतिहास है। परिवार ने भी इस बात की पुष्टि की। पुलिस कह रही है कि अभी मकसद की जांच चल रही है। कोई विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई है।

इसरो पर क्या असर पड़ा?
बता दें कि भारत की स्पेस एजेंसी पहले से ही हाई सिक्योरिटी में रहती है। चांद पर मिशन, गगनयान जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, ऐसे में ऐसी धमकी से अस्थायी रूप से हलचल जरूर हुई। लेकिन सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हैं। पिछले कुछ समय में दिल्ली, बेंगलुरु और दूसरे शहरों में स्कूलों, एयरपोर्ट, डीआरडीओ, और पासपोर्ट ऑफिस जैसी जगहों पर ऐसी फर्जी ईमेल धमकियां आ चुकी हैं। ज्यादातर मामलों में ये होक्स निकलती हैं, लेकिन हर बार सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट होना पड़ता है।

सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियां
इसरो समेत सभी संवेदनशील संस्थानों में सुरक्षा पहले से कड़ी है। सीआईएसएफ, लोकल पुलिस और इंटेलीजेंस एजेंसियां 24 घंटे नजर रखती हैं। लेकिन डिजिटल दुनिया में ईमेल जैसे आसान तरीके से धमकी देना आसान हो गया है। इसलिए साइबर सुरक्षा को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

 

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