एजेंसी, नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक पर अब वित्तीय गड़बड़ी के कारणों के चलते केंद्रीय बैंक की तलवार लटक गई है। केन्द्रीय बैंक ने एचडीएफसी बैंक में पर्यवेक्षी मूल्यांकन करने के लिए वैधानिक निरीक्षण किया था, जिसमें गड़बड़ी पाकर रिजर्व बैंक ने 91 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगा दिया है। यह जांच बैंक की 31 मार्च, 2024, तक की वित्तीय स्थिति पर की गई थी, जिसमें नियमों का पालन न करने, बैंकिंग केवाईसी में कमियां और नियामकीय अनुपालन में कमियां शामिल हैं। हालांकि आरबीआई ने स्थिति को साफ करते हुए कहा है कि यह जुर्माना बैंक की वैधानिक और नियामकीय अनुपालन की कमियों से जुड़ा है। इसका उद्देश्य ग्राहक और बैंक के बीच होने वाले लेनदेन और समझौतों की वैधता पर सवाल खड़े करना नहीं है।
एचडीएफसी देश का सबसे बड़ा क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता
एचडीएफसी पर पहले भी क्रेडिट कार्ड के मामले में कार्रवाई की गई थी। 2020 में एचडीएफसी की आईटी सुरक्षा प्रणाली में कमियों के चलते एचडीएफसी को नए क्रेडिट कार्ड ग्राहकों को जोड़ने से प्रतिबंधित कर दिया था। यह प्रतिबंध एक साल तक चलने के बाद बैंक ने अपनी सुरक्षा में सुधार किया, और आज एचडीएफसी बैंक देश का सबसे बड़ा क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता है।
आरबीआई ने दी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया
आरबीआई ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए कहा कि एचडीएफसी बैंक ने एक ही ऋण श्रेणी में कई प्रकार के मानक अपनाए। साथ ही बैंक ने अपना केवाईसी का काम थर्ड पार्टी को सौंप दिया था। कार्रवाई में पता चला कि बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, जो बैंकिंग विनियमन अधिनियम की धारा 6 के तहत मान्यता प्राप्त नहीं है, उसके साथ मिलकर बैंक ने काम किया। हालांकि बैंक ने यह भी बताया कि यह कार्रवाई ग्राहकों की बैंकिंग प्रक्रिया की वैधता पर आधारित नहीं है। बैंकिंग विनियमन अधिनियम के कुछ प्रावधानों के उल्लंघन करने, अग्रिमों पर ब्याज दर के मामले में, बैंक द्वारा वित्तीय सेवाओं की आउटसोर्सिंग करने के लिए, आचार संहिता संबंधी दिशानिर्देशों में कमी होने और केवाईसी मानदंडों का ठीक से पालन न करने के लिए लगाया गया है।


