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रजनीकांत बोले- ‘मैं हाथ हिलाता रहा पर किसी ने मुड़कर नहीं देखा’, अहंकार को पूरी तरह खत्म कर चुका हूं

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रजनीकांत बोले- ‘मैं हाथ हिलाता रहा पर किसी ने मुड़कर नहीं देखा’, अहंकार को पूरी तरह खत्म कर चुका हूं

एजेंसी, चेन्नई। दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रजनीकांत अपनी सादगी और बेहतरीन सेंस ऑफ ह्यूमर के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं। अक्सर सार्वजनिक मंचों पर वे स्वयं का मजाक उड़ाकर लोगों को हंसने पर मजबूर कर देते हैं। हाल ही में सुपरस्टार रजनीकांत का एक नया भाषण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अपने साथ घटी एक ऐसी घटना साझा की जिसने उनके अहंकार को पूरी तरह खत्म कर दिया। रजनीकांत बेंगलुरु में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के जन्मदिन के अवसर पर उनके आश्रम पहुंचे थे, जहां उन्होंने हजारों लोगों की मौजूदगी में एक बेहद दिलचस्प और भावुक किस्सा सुनाया।

आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम में बिताया लंबा समय

रजनीकांत ने बताया कि वे श्री श्री रविशंकर के आश्रम ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ की शांति और वहां के वातावरण से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी योजना बदल दी। सुपरस्टार ने कहा कि शुरुआत में उन्होंने वहां केवल दो दिन रुकने का मन बनाया था, लेकिन वहां की हरियाली, सुंदर झीलें और मूक पशुओं के साथ-साथ वहां रहने वाले लोगों की निस्वार्थ मुस्कान ने उनका दिल जीत लिया। यही कारण था कि वे दो दिन के बजाय पूरे 15 दिनों तक वहां ठहरे। उन्होंने यह भी साझा किया कि हिमालय की यात्रा करने के बाद अगर उन्हें कहीं इतना मानसिक सुकून मिला है, तो वह यही स्थान है।

जब रजनीकांत को किसी ने नहीं पहचाना

भाषण के दौरान रजनीकांत ने एक ऐसा वाकया सुनाया जिसे सुनकर खुद श्री श्री रविशंकर भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। अभिनेता ने बताया कि जब वे आश्रम में घूम रहे थे, तो उन्हें लगा कि वहां मौजूद लोग उन्हें देखकर उत्साहित हो जाएंगे और उनके पास आएंगे। रजनीकांत ने कहा कि वहां कई तमिल भाषी लोग भी मौजूद थे, इसलिए उन्हें पूरा भरोसा था कि उन्हें पहचान लिया जाएगा। वे लोगों को देखकर हाथ भी हिला रहे थे, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि किसी ने भी उनकी ओर मुड़कर तक नहीं देखा। लोग अपनी आध्यात्मिक साधना और आश्रम की गतिविधियों में इतने मग्न थे कि सुपरस्टार की मौजूदगी का उन पर कोई असर नहीं पड़ा।

अहंकार का हुआ अंत

रजनीकांत ने हंसते हुए स्वीकार किया कि इस घटना ने उनके भीतर छिपे ‘ईगो’ यानी अहंकार को पूरी तरह चकनाचूर कर दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर बड़े सितारों को आदत हो जाती है कि जहां भी वे जाएं, लोग उनकी ओर भागें, लेकिन इस आश्रम में उन्हें एक सामान्य इंसान की तरह महसूस हुआ। उन्होंने बताया कि यह अनुभव उनके लिए बहुत बड़ा सबक था क्योंकि इसने उन्हें सिखाया कि पद और प्रतिष्ठा से ऊपर भी एक दुनिया है जहां शांति और अध्यात्म का वास होता है। रजनीकांत के इस बेबाक अंदाज ने वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया।

सादगी और मजाक के लिए प्रसिद्ध हैं थलाइवा

यह पहली बार नहीं है जब रजनीकांत ने खुद का मजाक उड़ाया हो। इससे पहले भी वे अपनी फिल्म ‘रोबोट’ के समय का एक मशहूर किस्सा सुना चुके हैं, जब एक व्यक्ति ने उनसे पूछा था कि ऐश्वर्या राय जैसी सुंदर अभिनेत्री उनकी हीरोइन कैसे हो सकती हैं। रजनीकांत अपनी फिल्म की छवि और वास्तविक जीवन की सादगी के बीच के अंतर को बहुत ही खूबसूरती से बयां करते हैं। यही कारण है कि करोड़ों प्रशंसक उन्हें न केवल एक अभिनेता के रूप में, बल्कि एक महान व्यक्तित्व के रूप में भी पूजते हैं। इस ताजा वायरल वीडियो ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि रजनीकांत असल मायने में जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं।

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