भोपाल में सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 5 दर्जन से ज्यादा अधिकारियों, इंजीनियरों को हटाया

भोपाल में सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 5 दर्जन से ज्यादा अधिकारियों, इंजीनियरों को हटाया

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एजेंसी, भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। भोपाल नगर निगम यानि बीएमसी में 5 दर्जन से ज्यादा अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है। इनमें से अधिकांश इंजीनियर हैं जिनके कार्यभार बदले गए हैं। नगर निगम के 64 असिस्टेंट और सब इंजीनियरों को हटाया गया है।

इसे निगम इतिहास का सबसे बड़ा फेरबदल बताया जा रहा है। कार्यपालन यंत्रियों को अतिक्रमण हटवाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसी के साथ मेट्रोपॉलिटन रीजन का ड्राफ्ट आने के पहले नगर निगम का नया सेटअप तैयार कर लिया गया है। भोपाल नगर निगम में बड़े पैमाने पर कार्यपालन यंत्रियों के कार्यभार बदले गए हैं। नगर निगम आयु€क्त संस्कृति जैन ने 30 अ€क्टूबर को आयोजित नगर परिषद की बैठक में आई पार्षदों की लिखित शिकायत को दूर करते हुए अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र में इंजीनियर वर्ग को उनकी कार्य क्षमता के हिसाब से पोस्ट करने के आदेश जारी किए हैं।

कई जोनल अधिकारियों का तबादला किया
कार्यपालन यंत्रियों को शहर की अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र में तैनात किया गया है। विशेष टीमों का गठन किया गया है जो सिविल कार्य के साथ अतिक्रमण हटवाने का काम भी करेंगे। इसके अलावा कई जोनल अधिकारियों का भी तबादला किया गया है। उपस्वच्छता पर्यवेक्षक विजय शाक्य को सहायक स्वास्थ्य अधिकारी एसएचओ बनाकर जोन 14 का दायित्व दिया गया है। अंकित गौतम, संदीप मंडलेकर, भावना पटेरिया को भी अलग अलग जोन में सहायक स्वास्थ्य अधिकारी एसएचओ की जिम्मेदारी दी गई है।

मेट्रोपॉलिटन रीजन में बड़े पैमाने पर जुटानी है जमीन
उल्लेखनीय की भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन में बड़े पैमाने पर जमीनों की उपलŽब्धता सुनिश्चित की जाना है। इसके लिए सरकारी जमीनों से कब्जे को हटाना सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में कार्यपालन यंत्री बृजेश कौशल को गोविंदपुरा, अनिल टटवाड़े को मध्य एवं उत्तर विधानसभा, एसके राजेश को दक्षिण पश्चिम एवं हुजूर विधानसभा, अनिल कुमार साहनी को नरेला विधानसभा क्षेत्र में सिविल शाखा एवं अतिक्रमण हटवाने की ज्मिेदारी दी गई है। इसके अलावा कार्यपालन यंत्री प्रमोद मालवीय को नरेला से हटाकर झील संरक्षण प्रकोष्ठ, उद्यान विभाग, प्रवेश द्वार प्रोजे€ट की जिम्मेदारी दी गई है। उल्लेखनीय है कि पूर्व नगर निगम आयु€क्त हरेंद्र नारायण ने आदेश जारी कर सभी इंजीनियर्स के विभाग बदल दिए थे। पिछले 4 महीने से इस पर विवाद बना हुआ था। पार्षदों का आरोप था कि इंजीनियर उनके वार्ड एवं जोन में काम नहीं कर रहे हैं।

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