उदासीन पुलिस अधिकारियों पर कुपित मोहन सरकार की कड़ी कार्रवाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सीधी के कलेक्टर और गुना के पुलिस अधीक्षक पर की गई त्वरित और कठोर दंडात्मक कार्रवाई केवल दो अधिकारियों के स्थानांतरण या निलंबन का मामला नहीं है, बल्कि यह मध्य प्रदेश की प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में एक गहरे और निर्णायक बदलाव का उद्घोष है। भारतीय लोकतंत्र में सुशासन की अवधारणा तब तक केवल कागजी आदर्श बनी रहती है, जब तक कि व्यवस्था के शीर्ष पर बैठा व्यक्ति जवाबदेही की लक्ष्मण रेखा स्वयं न खींचे। डॉ. यादव ने रविवार को सीधी के अपने आकस्मिक दौरे और उसके बाद लिए गए फैसलों से यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता का केंद्र अब ‘वल्लभ भवन’ के बंद कमरों में नहीं, बल्कि उन गलियों और चौराहों पर है जहां आम नागरिक अपनी समस्याओं के साथ खड़ा होता है। मुख्यमंत्री का यह कहना कि ‘मैदान में काम करने वालों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए, अन्यथा वे मंत्रालय में बैठें’, एक ऐसी कड़वी सच्चाई है जो राज्य के पूरे प्रशासनिक अमले के लिए एक गंभीर चेतावनी और मार्गदर्शन दोनों है।
प्रशासनिक दक्षता का असली पैमाना फाइलों का समय पर निपटारा मात्र नहीं है, बल्कि उस संवेदनशीलता में निहित है जो एक अधिकारी अपने जिले की जनता के प्रति प्रदर्शित करता है। सीधी में कलेक्टर और जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक के खिलाफ की गई कार्रवाई दर्शाती है कि मुख्यमंत्री की नजर निचले स्तर पर हो रही गड़बड़ियों और आम आदमी के असंतोष पर टिकी है। जब एक मुख्यमंत्री स्वयं सड़क पर उतरकर जनसंवाद करता है और सीधे जनता से प्राप्त फीडबैक को आधार बनाकर फैसले लेता है, तो वह न केवल नौकरशाही के भीतर के ‘जड़त्व’ को तोड़ता है बल्कि लोकतंत्र के प्रति जनमानस के विश्वास को भी पुनर्जीवित करता है। यह कदम इस बात का प्रमाण है कि वर्तमान सरकार ‘एसी चैंबर्स’ की रिपोर्टों के बजाय ‘धरातल की हकीकत’ को प्राथमिकता दे रही है। गुना में पुलिस अधीक्षक के विरुद्ध की गई कार्रवाई पुलिस महकमे के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि वर्दी की गरिमा और कर्तव्यनिष्ठा के साथ किसी भी तरह का समझौता, चाहे वह आर्थिक भ्रष्टाचार से जुड़ा हो या प्रक्रियात्मक चूक से, अक्षम्य है।
राजस्व और कानून व्यवस्था किसी भी राज्य की रीढ़ होते हैं। जब इन दोनों विभागों के शीर्ष जिला अधिकारी अपनी भूमिका में विफल होते हैं, तो उसका प्रभाव अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पड़ता है। मुख्यमंत्री ने नकदी लेनदेन और भ्रष्टाचार के कथित मामलों में जिस तरह की तत्परता दिखाई है, वह यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है कि ‘जीरो टॉलरेंस’ केवल एक नारा नहीं बल्कि एक कार्यपद्धति है। मध्य प्रदेश जैसे विशाल राज्य में, जहां विकास की नई इबारत लिखने की असीम संभावनाएं हैं, वहां प्रशासनिक शिथिलता विकास की गति में सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो सकती है। डॉ. यादव की यह कार्यशैली दर्शाती है कि वे प्रदेश को एक ऐसी ‘प्रो-पीपल’ यानी जनता की अपनी सरकार के रूप में स्थापित करना चाहते हैं, जहां शिकायतों का निवारण केवल औपचारिक पत्रचार नहीं बल्कि परिणामोन्मुखी क्रियान्वयन हो।
अक्सर देखा जाता है कि प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई के मामले में सरकारें राजनीतिक नफा-नुकसान या नौकरशाही के दबाव में हिचकिचाती हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ने जिस निडरता और स्पष्टता के साथ ये निर्देश दिए हैं, वह उनके सुदृढ़ राजनीतिक संकल्प को दर्शाता है। यह एक नए मध्य प्रदेश की तस्वीर है, जहाँ पद और प्रतिष्ठा को जिम्मेदारी के साथ जोड़ा जा रहा है। अधिकारियों को यह समझना होगा कि उनकी नियुक्ति जनता की सेवा के लिए है, न कि सत्ता के उपभोग के लिए। सीधी और गुना की घटनाएं उन सभी लोक सेवकों के लिए एक सबक हैं जो अपने दायित्वों के प्रति लापरवाह हैं। साथ ही, यह उन ईमानदार और कर्मठ अधिकारियों के लिए प्रोत्साहन भी है जो दिन-रात जनहित में जुटे रहते हैं, क्योंकि अब प्रदर्शन के आधार पर ही पद और प्रतिष्ठा का निर्धारण हो रहा है।
मुख्यमंत्री का यह कड़ा रुख प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता और शुचिता को बढ़ावा देने वाला है। जब शीर्ष नेतृत्व इतना सजग होता है, तो उसका प्रभाव निचले पायदान के कर्मचारियों तक स्वतः ही पहुंचने लगता है। सरकार की यह प्राथमिकता कि ‘लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी’, प्रदेश में एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण करेगी जहाँ नियम और न्याय का शासन होगा। अंततः, इस तरह की कार्रवाइयां आम जनता में यह भरोसा पैदा करती हैं कि उनकी आवाज सुनी जा रही है और उनके हितों की रक्षा के लिए शासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। डॉ. मोहन यादव ने अपने नेतृत्व से यह सिद्ध किया है कि एक प्रभावी प्रशासक वही है जो नियम और अनुशासन की मर्यादा को बनाए रखते हुए जन-कल्याण के मार्ग में आने वाली हर बाधा को दृढ़ता से दूर करे। यह सुशासन की दिशा में बढ़ता एक उज्ज्वल और आशाजनक अध्याय है।
ये भी पढ़ें : नारी सम्मान के संकल्प के साथ घट स्थापना ही भगवती की सफल पूजा
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


