ईडी को नोटिस जारी नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, कहा- अधिकारी खुद को ‘सुपर सीजेआई’ समझते हैं
एजेंसी, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही रजिस्ट्री कार्यालय पर निशाना साधते हुए उसके रवैये को ”अनुचित” करार दिया और कहा कि उसके अधिकारी खुद को ”सुपर सीजेआई” (प्रधान न्यायाधीश) समझते हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 37,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित निवेश धोखाधड़ी के मामले में आरोपी आयुषी मित्तल उर्फ आयुषी अग्रवाल द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। प्रधान न्यायाधीश ने याचिका पर 23 मार्च को पारित एक आदेश का हवाला दिया और आश्चर्य जताया कि रजिस्ट्री अधिकारियों ने यह कैसे समझा कि पीठ ने याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी नहीं किया। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ”रजिस्ट्री ने बिल्कुल अनुचित व्यवहार किया है। रजिस्ट्री का यह रवैया बेहद बिल्कुल ठीक नहीं है… यहां बैठा हर व्यक्ति खुद को ‘सुपर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया’ समझता है।”
#BREAKING Supreme Court says Registry acting “very nasty”
CJI Surya Kant: Very nasty registry. Each one sitting here considers themselves as super Chief Justice of India.
CJI: Notice has not been issued to ED director stating no such order was passed. Let a fact finding… pic.twitter.com/ekStCIGUcH
— The Chief Justice Of India (@Cjikant) May 4, 2026
पीठ ने अपने नए आदेश में कहा, ”ईडी निदेशक को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है और कहा गया कि ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया गया था। (शीर्ष अदालत के) न्यायिक रजिस्ट्रार इस बात का तथ्यान्वेषण करें कि 23 मार्च के हमारे आदेश का अर्थ ईडी को नोटिस जारी न करना कैसे है। प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस भेजा जाए।” याचिकाकर्ता आयुषी मित्तल, उनके पति और उनकी कंपनी पर बड़े पैमाने पर निवेश संबंधी धोखाधड़ी करने के आरोप हैं। बचाव पक्ष का दावा है कि निवेशकों को धनराशि का एक बड़ा हिस्सा लौटा दिया गया है, लेकिन फिलहाल ईडी द्वारा ‘फ्रीज’ किए गए बैंक खातों में कई सौ करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। पीठ ने 23 मार्च के अपने आदेश में मामले में पक्षकार राजस्थान सरकार के वकील द्वारा ईडी को कार्यवाही में पक्षकार बनाने के मौखिक अनुरोध को स्वीकार कर लिया था।
इसका उद्देश्य यह निर्धारित करना था कि याचिकाकर्ता और उसके परिवार से संबंधित सभी चल और अचल संपत्ति को विधिवत कुर्क किया गया है या नहीं। पीठ ने दोहराया कि संपत्ति का ”विस्तृत विवरण” प्रदान किए जाने तक वह जमानत याचिका के गुण-दोष पर विचार नहीं करेगी। अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए कानूनी प्रतिनिधि को याचिकाकर्ता, उसके पति, उनके बच्चों, माता-पिता, भाई-बहनों और सास-ससुर की अचल संपत्ति का विस्तृत ब्योरा देते हुए एक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। अदालत ने कंपनी के निदेशकों, प्रबंधकों और प्रमुख कर्मचारियों की संपत्ति का विवरण भी मांगा था। पीठ ने कहा था, ”जब तक ये संपूर्ण विवरण उपलब्ध नहीं कराए जाते, हम जमानत याचिका पर विचार नहीं करेंगे।” न्यायिक रजिस्ट्रार को रजिस्ट्री के भीतर प्रशासनिक चूक की जांच करने का कार्य सौंपा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अदालत के पिछले निर्देशों की अनदेखी क्यों की गई। पीठ ने कहा कि वह याचिका को मई में किसी दिन सूचीबद्ध करेगी।
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