एजेंसी, वाराणसी। Sarnath UNESCO World Heritage : उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक शहर वाराणसी में स्थित प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल सारनाथ ने वैश्विक मंच पर एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यूनेस्को ने सारनाथ को अपनी आधिकारिक विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की घोषणा की है। यह महत्वपूर्ण फैसला दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित विश्व धरोहर समिति की 48वें मीटिंग के दौरान सर्वसम्मति से लिया गया। सारनाथ को इस प्रतिष्ठित सूची में 25 जुलाई को आधिकारिक तौर पर स्थान दिया गया, जिसके बाद से पूरे भारत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में खुशी की लहर दौड़ गई है। भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली के रूप में विख्यात सारनाथ को यह वैश्विक पहचान मिलना भारतीय धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।
STORY | 25 new properties added to UNESCO’s World Heritage List; six sites to list of heritage in danger
India’s ancient Buddhist site of Sarnath, Alamut Castle and Related Fortifications in Iran, and Jordan’s Aqaba Marine Reserve are among the 25 sites which have been inscribed… pic.twitter.com/ZK3gZRXI4N
— Press Trust of India (@PTI_News) July 29, 2026
बुसान में आयोजित यूनेस्को की 48वीं मीटिंग में हुआ बड़ा फैसला
दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में 19 जुलाई से 29 जुलाई तक यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति का 48वां सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस 10 दिवसीय विस्तृत सत्र के दौरान दुनिया भर के विभिन्न सांस्कृतिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले स्थलों के प्रस्तावों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। मीटिंग के अंत में समिति ने विभिन्न देशों के कुल 25 नए विशिष्ट स्थलों को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में जोड़ने की अंतिम स्वीकृति प्रदान की। इस निर्णय के साथ ही इन सभी स्थलों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च मान्यता प्राप्त हो गई है, जिससे इनके भावी संरक्षण और देखभाल के लिए वैश्विक फंडिंग तथा तकनीकी सहयोग का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है।
तीन अफ्रीकी राष्ट्रों ने रचा नया इतिहास
यूनेस्को द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, यह वार्षिक सत्र अफ्रीका महाद्वीप के तीन प्रमुख देशों के लिए बेहद ऐतिहासिक और यादगार साबित हुआ। कोमोरोस, साओ टोमे एवं प्रिंसिपे तथा दक्षिण सूडान ऐसे तीन देश बनकर उभरे हैं, जिनके किसी स्थल को इतिहास में पहली बार विश्व धरोहर सूची में स्थान प्राप्त हुआ है। अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनेस्को ने इस अभूतपूर्व उपलब्धि को अपनी ग्लोबल हेरिटेज लिस्ट को अधिक समावेशी, संतुलित और हर क्षेत्र का उचित प्रतिनिधित्व करने वाली बनाने की दिशा में एक बेहद प्रभावी कदम करार दिया है। इससे इन विकासशील देशों में इंटरनेशनल टूरिज्म और लोकल इकोनॉमी को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
दुनिया भर के इन प्रसिद्ध स्थानों को भी मिली ग्लोबल पहचान
सारनाथ के अलावा इस वर्ष की नई सूची में दुनिया के कई अन्य बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक स्थलों ने भी अपनी जगह बनाई है। इनमें ईरान का प्रसिद्ध आलमूत पैलेस और उससे जुड़ा प्राचीन किला, जॉर्डन का खूबसूरत अकाबा मरीन प्रोटेक्टेड एरिया तथा जापान की बेहद पुरानी ऐतिहासिक राजधानियां असुका और फुजिवारा प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही उज्बेकिस्तान की राजधानी का ताशकंद मॉडर्निस्ट आर्किटेक्चर, साओ टोमे एवं प्रिंसिपे का प्रसिद्ध रोकास क्षेत्र और यूनान यानी ग्रीस के पौराणिक माउंट ओलंपस का एक बहुत बड़ा हिस्सा भी इस गौरवशाली सूची में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा है।
ग्लोबल हेरिटेज साइट्स का आंकड़ा पहुंचा 1,273 के पार
यूनेस्को द्वारा 28 जुलाई को जारी की गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस वर्ष शामिल की गई 25 नई एंट्रीज के बाद अब दुनिया भर में कुल यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की संख्या बढ़कर 1,273 हो चुकी है। यह सभी संरक्षित स्थल दुनिया के 173 अलग-अलग देशों में फैले हुए हैं। समिति द्वारा इस बार जिन 25 नए स्थलों को मंजूरी दी गई है, उनमें से 19 सांस्कृतिक स्थल, 5 प्राकृतिक स्थल और 1 मिश्रित श्रेणी का स्थल शामिल है। इसके अलावा समिति ने पहले से ही सूची में मौजूद 2 प्रमुख स्थलों के भौगोलिक दायरे को और अधिक बढ़ाने के प्रस्ताव को भी अपनी हरी झंडी दी, जिसमें दक्षिण कोरिया का प्रसिद्ध गेटबोल टाइडल फ्लैट्स का दूसरा चरण शामिल है।
डेंजर लिस्ट में बदलाव और 2027 के अगले सम्मेलन का शेड्यूल
विश्व धरोहर समिति ने अपनी इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान दुनिया भर के 6 अत्यंत संवेदनशील स्थलों को संकटग्रस्त विश्व धरोहरों की सूची यानी डेंजर लिस्ट में डालने का निर्णय लिया। इन स्थलों के असाधारण ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान में उनके अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरों को देखते हुए उनके तत्काल संरक्षण की सख्त जरूरत महसूस की गई थी। इसके विपरीत ऑस्ट्रिया देश के वियना शहर के ऐतिहासिक केंद्र के लिए एक बहुत अच्छी खबर आई, जिसे समिति ने अब संकटग्रस्त स्थलों की सूची से बाहर कर दिया है। यूनेस्को ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि विश्व धरोहर समिति का अगला यानी 49वां सम्मेलन वर्ष 2027 में तुर्किये के ऐतिहासिक शहर इस्तांबुल में आयोजित किया जाएगा।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: यूनेस्को द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का आयोजन कहाँ किया गया था?
उत्तर: यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र का आयोजन दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में किया गया था।
प्रश्न 2: सारनाथ को किस तिथि को आधिकारिक तौर पर विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया?
उत्तर: सारनाथ को 25 जुलाई को आधिकारिक रूप से इस प्रतिष्ठित सूची में स्थान दिया गया।
प्रश्न 3: इस सम्मेलन में कुल कितने नए स्थलों को विश्व धरोहर सूची में जोड़ा गया?
उत्तर: समिति ने सर्वसम्मति से कुल 25 नए स्थलों को इस सूची में शामिल करने की मंजूरी दी।
प्रश्न 4: इस वर्ष किन अफ्रीकी देशों के स्थलों को पहली बार विश्व धरोहर सूची में जगह मिली?
उत्तर: कोमोरोस, साओ टोमे एवं प्रिंसिपे और दक्षिण सूडान के स्थलों को इतिहास में पहली बार यह गौरव प्राप्त हुआ।
प्रश्न 5: नई प्रविष्टियों के शामिल होने के बाद अब दुनिया में कुल कितने विश्व धरोहर स्थल हो गए हैं?
उत्तर: अब दुनिया भर के 173 देशों में कुल यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की संख्या बढ़कर 1,273 हो गई है।
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