एजेंसी, नई दिल्ली। Sonam Wangchuk 21st day fast : देश की राजधानी के ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर पिछले 3 सप्ताह से जारी एक शांत आंदोलन शनिवार को अचानक तनावपूर्ण संघर्ष में बदल गया। देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग को लेकर दृढ़ संकल्पित प्रसिद्ध शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का शनिवार को 21वां दिन था। लगातार भोजन का त्याग करने के कारण उनके शरीर के अत्यंत कमजोर होने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन वहां से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में दाखिल कराया। इस प्रशासनिक कदम के बाद प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हुई, जिसने पूरे देश का ध्यान इस आंदोलन की तरफ खींच लिया है।
मेडिकल बुलेटिन में स्वास्थ्य को लेकर चिंताजनक खुलासे और वांगचुक का अडिग रुख
सफदरजंग अस्पताल प्रशासन की ओर से जारी किए गए आधिकारिक स्वास्थ्य बुलेटिन के मुताबिक, सोनम वांगचुक को सुबह 7:40 बजे वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में लाया गया था। डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल में प्रवेश के वक्त वह पूरी तरह से होश में थे और उनके महत्वपूर्ण शारीरिक सूचकांक जैसे नाड़ी की गति, रक्तचाप और ऑक्सीजन का स्तर पूरी तरह से स्थिर पाया गया। हालांकि, लगातार 21 दिनों तक उपवास पर रहने के कारण उनके शरीर पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और उनका कुल वजन 9.5 किलोग्राम तक घट गया है। गहन चिकित्सीय परीक्षण में उनके शरीर में पानी की भारी कमी (गंभीर डिहाइड्रेशन) पाई गई है और खून की जांच में सीरम पोटेशियम का स्तर सामान्य से काफी नीचे दर्ज किया गया है। इसके अलावा, उनके रक्त में शुगर की मात्रा 78 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर पाई गई है और यूरिन में कीटोन का स्तर एक से बढ़कर तीन पर पहुंच गया है, जो बेहद चिंताजनक है। इस गंभीर स्थिति के बावजूद, सोनम वांगचुक ने डॉक्टरों द्वारा दी जा रही अंतःशिरा (आईवी) फ्लूइड, ओआरएस घोल और किसी भी प्रकार की जीवन रक्षक दवाएं लेने से साफ मना कर दिया है। इसी बीच, उनकी जीवनसंगिनी गीतांजली अंगमो ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक भावुक संदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि उनके पति की लिखित सहमति और पिछले 20 दिनों से उनकी देखरेख कर रहे पारिवारिक डॉक्टरों की अनुमति के बिना उन्हें कोई भी दवा या ड्रिप न दी जाए।
बॉलीवुड सितारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का मिला अभूतपूर्व समर्थन
इस आंदोलन की गूंज अब देश के मनोरंजन जगत और डिजिटल माध्यमों पर भी साफ तौर पर सुनाई देने लगी है। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ऋतिक रोशन ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर सोनम वांगचुक का एक वीडियो साझा करते हुए छात्रों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। अभिनेता ने अपनी लोकप्रिय फिल्म ‘सुपर 30’ की शूटिंग के दिनों को याद करते हुए लिखा कि एक शिक्षक की भूमिका निभाने के दौरान ही उन्हें इस बात का गहरा अहसास हुआ था कि देश के युवा किस कदर मानसिक तनाव और प्रतियोगिता के दबाव से गुजरते हैं। उन्होंने कहा कि आज के छात्रों की वास्तविक समस्याओं को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ समझा जाना चाहिए। दूसरी ओर, देश की जानी-मानी अभिनेत्री और सोशल मीडिया क्रिएटर कुशा कपिला ने भी इस विषय पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सोनम वांगचुक का यह ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन हम सभी को यह याद दिलाता है कि देश के युवाओं और छात्रों की जायज चिंताओं को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि देश की भावी पीढ़ी एक पारदर्शी और भरोसेमंद शिक्षा प्रणाली की हकदार है, जो उनके भविष्य को अंधकार में धकेलने के बजाय उम्मीद की नई किरण दे सके।
राहुल गांधी और डिंपल यादव का केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला
सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाए जाने की घटना ने एक बड़ा राजनीतिक रूप अख्तियार कर लिया है, जिसके बाद विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं ने मौजूदा सत्तासीन सरकार को आड़े हाथों लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर सरकार की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान शासन का मूल आधार ही असत्य और हिंसा पर टिका हुआ है। उन्होंने कहा कि एक शांतिपूर्ण और अहिंसक मार्ग पर चलकर देश के युवाओं के भविष्य की लड़ाई लड़ रहे एक प्रतिष्ठित व्यक्ति को इस तरह से उठाना पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और गलत है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि पेपर लीक, शिक्षा का बढ़ता बाजारीकरण और छात्रों में बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्तियां बेहद गंभीर राष्ट्रीय चिंताएं हैं और कोई भी दमनकारी शक्ति विपक्ष को इन मुद्दों को उठाने से नहीं रोक सकती। इसी क्रम में, समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ सांसद डिंपल यादव ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब देश में शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आवाजों को जबरन दबाया जाता है, तो असल में हमारे देश के संविधान और लोकतंत्र की आत्मा पर चोट होती है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों को देशविरोधी बताते हुए इस पूरी कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की।
जंतर-मंतर पर टकराव, पुलिस की सफाई और संसद मार्च की बड़ी चेतावनी
शनिवार सुबह जंतर-मंतर पर हुई इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भारी गतिरोध पैदा हो गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने पुलिस प्रशासन पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की और उन्हें जबरन हिरासत में ले लिया। हालांकि, इन तमाम आरोपों के विपरीत नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सचिन शर्मा ने आधिकारिक बयान जारी कर पूरी स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व में दिए गए दिशा-निर्देशों और डॉक्टरों की आपातकालीन सलाह के मद्देनजर ही सोनम वांगचुक की जान बचाने के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ उपद्रवी तत्वों ने मेडिकल टीम और पुलिस के सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने अधिकतम संयम का परिचय देते हुए पूरी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न किया। इस बीच, आंदोलनकारियों और कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए ऐलान किया है कि देश में संसद के आगामी मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले, यानी 20 जुलाई को, वे अपनी मांगों को लेकर संसद भवन तक एक बहुत बड़ा शांति मार्च निकालेंगे और उन्होंने देश की जनता से इस महामार्च में रिकॉर्ड संख्या में शामिल होने का पुरजोर आह्वान किया है।
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