एजेंसी, ग्वालियर। Gwalior Hitech Nursery : मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर से प्रदेश के अन्नदाताओं और कृषक समाज के लिए एक बेहद बड़ी और उत्साहजनक कूटनीतिक खबर सामने आई है। ग्वालियर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के भव्य परिसर में आयोजित एक दिवसीय संभागीय कृषि कार्यशाला के मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने अपने कूटनीतिक संबोधन में प्राकृतिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीक के समावेशन और उन्नत पशुपालन को किसानों की वास्तविक आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा मूल मंत्र बताया। इस उच्च स्तरीय संभागीय कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री ने करोड़ों रुपए की लागत वाली महत्वपूर्ण कृषि परियोजनाओं का शिलान्यास और भूमि पूजन किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में अपनी मेहनत से कृषि क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने वाले सफल प्राकृतिक किसानों को सम्मानित किया और उपस्थित किसानों से सीधे संवाद कर खेती को घाटे से उबारकर लाभ का एक स्थाई व्यवसाय बनाने का आह्वान किया।
हर खेत तक पानी, हर किसान तक समृद्धि
🌾 सिंचाई क्षमता में निरंतर बढ़ोतरी से मध्यप्रदेश के किसानों को नई ताकत मिल रही है। अब खेतों तक पानी की बेहतर पहुंच से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में वृद्धि हो रही है…@DrMohanYadav51 @minmpkrishi #CMMadhyaPradesh… pic.twitter.com/kjwvkCKDPV
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) July 7, 2026
मुख्यमंत्री यादव ने विश्वविद्यालय परिसर में किया पौधारोपण, नई कूटनीतिक इकाइयों का किया लोकार्पण
ग्वालियर हवाई अड्डे पर उतरते ही मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव का स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया, जिसके बाद वे सीधे कृषि विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे। वहां उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सबसे पहले एक फलदार पौधे का रोपण किया। इसके तुरंत बाद कूटनीतिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय में नवनिर्मित समन्वित कृषि प्रणाली और व बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाई का फीता काटकर भव्य लोकार्पण किया। इस ऐतिहासिक गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान मंच पर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना, उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह और क्षेत्रीय सांसद भारत सिंह कुशवाह समेत कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और आला प्रशासनिक अधिकारी विशेष रूप से मौजूद रहे।
49 करोड़ की लागत से तैयार होगी हाईटेक नर्सरी, हितग्राहियों को मिला सीधा लाभ
किसानों को उन्नत किस्म के पौधे और फूल उपलब्ध कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विश्वविद्यालय परिसर में कुल 49 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनने वाली अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी और फ्लोरीकल्चर गार्डन का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन किया। इस महत्वाकांक्षी और दूरगामी कृषि परियोजना की महत्ता को देखते हुए इसके पहले चरण के निर्माण कार्यों के लिए 13 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति सरकार द्वारा पहले ही अग्रिम रूप से जारी की जा चुकी है। इसके अलावा, कार्यक्रम के मुख्य मंच से मुख्यमंत्री ने पीएमएफएमई योजना के तहत चयनित दर्जनों स्थानीय लघु उद्यमियों और हितग्राहियों को व्यवसाय बढ़ाने के लिए सरकारी वित्तीय लाभ के चेक और प्रमाण पत्र वितरित किए। साथ ही, जैविक और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट व अनुकरणीय कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों को शॉल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित भी किया गया।
रासायनिक खेती छोड़ें किसान, आय बढ़ाने के लिए पशुपालन को बनाएं प्रभावी जरिया
समारोह में उपस्थित हजारों किसानों के साथ बेहद आत्मीय और सीधा संवाद स्थापित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाला समय पूरी तरह से प्राकृतिक और जैविक कृषि उत्पादों का ही है। उन्होंने किसानों से एक अभिभावक के तौर पर अपील की कि वे अपने खेतों में जहरीले रासायनिक खादों और कीटनाशकों पर अपनी निर्भरता को धीरे-धीरे पूरी तरह कम करें और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए प्राकृतिक खेती के मॉडल को अपनाएं। मुख्यमंत्री ने कृषि के साथ-साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को किसानों की आय दोगुनी करने का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने किसानों को प्रेरित करने के लिए इंदौर में सरकारी सहयोग से संचालित की जा रही 10 हजार गौवंश की विशाल क्षमता वाली आधुनिक गौशाला का विशेष उदाहरण दिया और कहा कि ऐसी गौ-आधारित कृषि प्रणाली को अपनाकर किसान खाद और बिजली दोनों मामलों में आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
समर्थन मूल्य पर कांग्रेस और भाजपा सरकारों के कामकाज की कूटनीतिक तुलना
अपने विस्तृत और ओजस्वी संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने कृषि उपजों के सरकारी समर्थन मूल्य यानी एमएसपी को लेकर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार और वर्तमान भाजपा सरकार के नीतिगत फैसले की कूटनीतिक तुलना भी की। उन्होंने ठोस आंकड़ों के साथ दावा किया कि भाजपा की विकासवादी सरकार ने हमेशा किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा है और गेहूं सहित अन्य सभी रबी व खरीफ फसलों का ऐतिहासिक व बेहतर मूल्य सीधे किसानों के बैंक खातों में दिलाने का पूरी ईमानदारी से काम किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार लगातार किसानों की शुद्ध आय बढ़ाने की दिशा में नए नीतिगत फैसले ले रही है। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि आधुनिक कृषि तकनीक, बहु-स्तरीय फसल प्रणाली, उन्नत उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती के आपसी समन्वय से ही भारतीय कृषि को वैश्विक स्तर पर अधिक लाभकारी, टिकाऊ और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
तकनीक, प्रकृति और पशुपालन के संतुलित मॉडल से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
ग्वालियर में मुख्यमंत्री का यह पूरा दौरा पूरी तरह से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान कल्याण पर केंद्रित रहा। करोड़ों रुपये की नई कूटनीतिक कृषि परियोजनाओं की सौगात देने, प्राकृतिक खेती को सरकारी स्तर पर बढ़ावा देने, आधुनिक ड्रोन और सैटेलाइट जैसी तकनीकों के कृषि में विस्तार और सीधे जमीनी स्तर के किसानों से संवाद स्थापित करने के जरिए मध्य प्रदेश सरकार ने देश को एक बेहद साफ और कूटनीतिक संदेश दिया है। सरकार का यह स्पष्ट विजन है कि भविष्य में कृषि को एक पूर्ण लाभकारी उद्योग के रूप में स्थापित करने के लिए आधुनिक विज्ञान (तकनीक), प्राचीन परंपरा (प्रकृति) और पशुधन (पशुपालन) इन तीनों का एक संतुलित और एकीकृत कूटनीतिक मॉडल ही प्रदेश की तरक्की और विकास की असली दिशा तय करेगा।
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