एजेंसी, जम्मू। Amarnath Shivling Melted : सनातन धर्म के करोड़ों आस्थावान लोगों के सबसे पवित्र और प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक बाबा अमरनाथ की वार्षिक यात्रा से जुड़ी एक बेहद बड़ी और मायूस करने वाली खबर सामने आ रही है। जम्मू-कश्मीर के हिमालयी क्षेत्र में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा के भीतर बनने वाला प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग समय से काफी पहले लगभग पूरी तरह से पिघल गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस वर्ष की आधिकारिक यात्रा शुरू हुए अभी महज 5 दिन का ही समय बीता है और बाबा बर्फानी का हिमलिंग पूरी तरह विलीन हो चुका है। कुल 57 दिनों तक चलने वाली यह ऐतिहासिक और कठिन तीर्थयात्रा इसी महीने 3 जुलाई 2026 से शुरू हुई थी। इतनी जल्दी शिवलिंग के अदृश्य होने के बाद अब वहां पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं को केवल पवित्र गुफा के ही दर्शन हो सकेंगे, जिससे भक्तों में थोड़ी मायूसी देखी जा रही है।
Today, I chaired a meeting to review the ongoing Shri Amarnath Ji Yatra. I have directed senior officials to ensure that devotees are properly registered and well-assisted by officers on the ground. Our goal is to make this pilgrimage a truly memorable experience for everyone and… pic.twitter.com/Smg8Qm0YK4
— Manoj Sinha (@manojsinha_) July 7, 2026
पांचवें दिन 1 लाख के पार पहुंची श्रद्धालुओं की संख्या, आस्था में नहीं आई कमी
भले ही पवित्र गुफा के भीतर हिमलिंग लगभग पूरी तरह पिघल चुका है, लेकिन देश के कोने-कोने से आने वाले शिव भक्तों के उत्साह और अटूट आस्था में कोई कमी नहीं आई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस पवित्र यात्रा के शुरुआती पहले चार दिनों के भीतर ही करीब 86000 श्रद्धालुओं ने बेहद कठिन पहाड़ों और रास्तों को पार करते हुए पवित्र गुफा में बाबा के दरबार में मत्थरी टेका और दर्शन किए। अमरनाथ श्राइन बोर्ड और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार को यात्रा के पांचवें दिन दर्शन करने वाले कुल श्रद्धालुओं का यह आंकड़ा आसानी से 100000 के पार पहुंच जाने की उम्मीद जताई गई है। भारी सुरक्षा व्यवस्था और दुर्गम रास्तों के बावजूद रोजाना हजारों नए जत्थे बाबा के जयकारों के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
4 लाख से ज्यादा लोगों ने कराया है रजिस्ट्रेशन, भारी तादाद में यात्री अभी कतार में
श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड से प्राप्त ताजा जानकारी के मुताबिक, इस साल बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए देश और दुनिया भर से करीब 400000 श्रद्धालुओं ने अपना अग्रिम पंजीकरण यानी ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन कराया है। इस लिहाज से देखा जाए तो अभी भी लगभग 300000 से ज्यादा पंजीकृत श्रद्धालुओं का पवित्र गुफा में पहुंचकर दर्शन करना बाकी है, जो अभी रास्ते में हैं या अलग-अलग आधार शिविरों में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि अमरनाथ के इतिहास में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब शिवलिंग समय से पहले पिघला हो, लेकिन यात्रा के शुरुआती हफ्ते में ही ऐसा हो जाना निश्चित रूप से पर्यावरण और बढ़ते तापमान की ओर इशारा करता है।
मई में 7 फीट का था आकार, महज कुछ ही दिनों में 90% तक गायब हुआ हिमलिंग
बाबा बर्फानी के शिवलिंग के पिघलने की रफ्तार ने इस बार वैज्ञानिकों और श्राइन बोर्ड के अधिकारियों को भी हैरत में डाल दिया है। बीते 23 मई 2026 को सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ के जवानों ने पवित्र गुफा के भीतर से जो पहली तस्वीर आधिकारिक रूप से जारी की थी, उसमें शिवलिंग का आकार बेहद भव्य और करीब 7 फीट ऊंचा दिखाई दे रहा था। इसके बाद जब 29 जून 2026 को गुफा में पहली पूजा और पारंपरिक आरती का आयोजन किया गया, तब भी हिमलिंग की ऊंचाई 5 फीट से काफी ज्यादा दर्ज की गई थी। लेकिन इसके बाद मौसम में आए अचानक बदलाव और गुफा के भीतर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण बढ़े तापमान की वजह से 6 जुलाई 2026 को जो नई तस्वीर सामने आई है, उसमें हिमलिंग लगभग 90% तक पूरी तरह गायब हो चुका है और वहां अब केवल बर्फ का एक बेहद छोटा हिस्सा ही शेष बचा है।
नुनवान-पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों से लगातार बढ़ रहे हैं शिव भक्त
अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए मुख्य रूप से दो पारंपरिक रास्तों का उपयोग किया जाता है और इन दोनों ही रूटों पर इस समय श्रद्धालुओं का रेला लगा हुआ है। पहला रास्ता करीब 48 किमी लंबा नुनवान-पहलगाम मार्ग है, जो थोड़ा लंबा है लेकिन इसकी चढ़ाई अपेक्षाकृत आसान मानी जाती है। वहीं दूसरा रास्ता महज 14 किमी लंबा बालटाल मार्ग है, जो काफी छोटा है लेकिन इसकी खड़ी चढ़ाई बेहद संकरी और अत्यंत कठिन मानी जाती है। इन दोनों ही रास्तों से लगातार मौसम की परवाह किए बिना यात्री पवित्र गुफा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। मंगलवार को पहाड़ों पर हुई तेज बारिश के चलते कई जगहों पर श्रद्धालु रेनकोट और तिरपाल ओढ़े नजर आए, लेकिन उनके कदम नहीं रुके। सुरक्षा के लिहाज से सेना, सीआरपीएफ और महिला सुरक्षाकर्मी जगह-जगह तैनात हैं जो यात्रियों से बातचीत कर उनका हौसला बढ़ा रहे हैं। यह यात्रा 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के पावन पर्व के दिन छड़ी मुबारक की पूजा के साथ आधिकारिक रूप से समाप्त होगी।
जानिए कैसे बनता है अमरनाथ का बाबा बर्फानी का यह अलौकिक शिवलिंग
अमरनाथ गुफा की सबसे बड़ी वैज्ञानिक और धार्मिक विशेषता यह है कि यहां का हिम शिवलिंग किसी कृत्रिम बर्फ के ब्लॉक को तराशकर या इंसानों द्वारा नहीं बनाया जाता, बल्कि यह पूरी तरह से एक प्राकृतिक आइस स्टैलेग्माइट संरचना है। भूवैज्ञानिक विज्ञान के अनुसार, जिस तरह चूना-पत्थर की गहरी गुफाओं में जमीन के ऊपर छत से खनिज टपक कर जमा होते हैं और धीरे-धीरे एक ठोस स्तंभ यानी स्टैलेग्माइट का रूप ले लेते हैं, ठीक उसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत अमरनाथ की इस ऐतिहासिक गुफा में भी पहाड़ के ऊपर जमी बर्फ का पानी छत से बूंद-बूंद करके टपकता है। गुफा के भीतर का तापमान बेहद कम होने के कारण वह पानी नीचे गिरते ही तुरंत ठोस बर्फ में बदल जाता है और धीरे-धीरे एक पवित्र शिवलिंग का आकार ले लेता है। इस हिमलिंग का आकार हर साल वहां के स्थानीय मौसम, सर्दियों में हुई बर्फबारी की मात्रा, गुफा के अंदरूनी तापमान और पानी की उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग होता है, जो कि प्रकृति का एक बेहद अनोखा और अद्भुत चमत्कार माना जाता है।
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