PoK Protest

शहबाज सरकार के खिलाफ पीओके में भारी प्रोटेस्ट, प्रदर्शनकारियों ने दी भारत के साथ मर्जर की खुली वॉर्निंग

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एजेंसी, इस्लामाबाद। PoK Protest Against Pakistan : पाकिस्तान के नाजायज कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके के रावलकोट शहर में इस समय पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ एक बहुत बड़ा जनआक्रोश फूट पड़ा है। यहां रहने वाले हजारों स्थानीय नागरिक और आंदोलनकारी अब खुलेआम इस पूरे क्षेत्र को पाकिस्तान का हिस्सा मानने से साफ इनकार कर रहे हैं। पिछले 22 दिनों से रावलकोट के विभिन्न इलाकों में वहां की शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ लगातार और बेहद उग्र प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि वे अब पाकिस्तानी हुकूमत की दमनकारी नीतियों और इस क्षेत्र पर उनके जबरन नियंत्रण को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। हालात इतने ज्यादा बिगड़ चुके हैं कि आंदोलनकारियों ने अब पाकिस्तान को छोड़कर भारत के साथ शामिल होने की खुली चेतावनी दे डाली है।

ईदगाह ग्राउंड में गूंजी बगावत की आवाज और शहबाज सरकार को अल्टीमेटम

रावलकोट के प्रसिद्ध ईदगाह ग्राउंड में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान विभिन्न नागरिक संगठनों और वक्ताओं ने पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ जमकर अपनी भड़ास निकाली। इस रैली में एकत्रित हुए हजारों लोगों के सामने नेताओं ने एलान किया कि इस पूरे भूभाग को अब किसी भी परिस्थिति में पाकिस्तान के प्रशासनिक नियंत्रण में नहीं माना जाना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए इस्लामाबाद की सरकार को एक बड़ा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि यदि उनके अधिकारों का दमन इसी तरह जारी रहा, तो वे बहुत जल्द भारत के साथ अपने विलय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर हो जाएंगे। यह विरोध प्रदर्शन अब केवल स्थानीय स्तर तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि विदेशों में रहने वाले इस क्षेत्र के समर्थकों ने भी दुनिया के कई बड़े देशों में स्थित पाकिस्तानी दूतावासों और उनके राजनयिक मिशनों के बाहर जोरदार प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है।

नागरिक अधिकार कार्यकर्ता सरदार अमन खान का नेतृत्व और सेना प्रमुख का विरोध

इस ऐतिहासिक और बड़े जनआंदोलन की अगुवाई रावलकोट के स्थानीय नेताओं और प्रमुख नागरिक अधिकार कार्यकर्ता सरदार अमन खान द्वारा की जा रही है। पिछले 2 हफ्तों से पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा इस इलाके में खाने-पीने की जरूरी चीजों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है, जिसके बाद से आम जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है और यह आंदोलन और अधिक तेज हो गया है। रैली को संबोधित करते हुए सरदार अमन खान ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि पीओके कभी भी पाकिस्तान का कानूनी हिस्सा नहीं रहा है। उन्होंने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि असल में पाकिस्तान को इस रणनीतिक क्षेत्र की सबसे ज्यादा जरूरत है, जबकि यहां के स्थानीय निवासियों को पाकिस्तान से कोई लाभ नहीं मिल रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में प्रदर्शनकारियों ने यह भी साफ एलान किया है कि उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को अपना मिलिट्री कमांडर मानने से पूरी तरह इनकार कर दिया है और वे अब किसी भी सैन्य तानाशाह के हुक्म को नहीं मानेंगे।

एलओसी के पास जारी धरना और भारत से मदद की गुहार

इस मुख्य आंदोलन के समानांतर ही गत 9 जून से एलओसी के बिल्कुल नजदीक एक अन्य स्थान पर भी अलग से धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है। एक बड़े प्रदर्शन के दौरान नागरिक नेता खान ने अपने हजारों समर्थकों के बीच घोषणा की कि यदि पाकिस्तानी हुकूमत द्वारा उनके राशन, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर लगाई गई पाबंदियां तुरंत वापस नहीं ली गईं, तो इस क्षेत्र के सभी नागरिक अपनी जीवन रक्षा और मदद के लिए पड़ोसी देश भारत की तरफ रुख करने पर मजबूर होंगे। सरदार अमन खान का मानना है कि यदि इस संकट की घड़ी में उन्हें भारत सरकार की तरफ से किसी भी प्रकार की मानवीय या राजनीतिक सहायता प्राप्त होती है, तो इस पूरे क्षेत्र के राजनीतिक हालात हमेशा के लिए बदल जाएंगे। इससे न केवल स्थानीय जनता को राहत मिलेगी, बल्कि इस्लामाबाद की शहबाज सरकार और पाकिस्तानी सेना पर एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय दबाव बनेगा जिसे वे झेल नहीं पाएंगे।

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