एजेंसी, दिल्ली। Dhiraj Seth Army Chief : भारतीय सैन्य इतिहास में 30 जून 2026 का दिन एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बना है। देश की सीमाओं की रक्षा में 40 वर्षों से भी अधिक समय तक अपनी गौरवशाली और बेमिसाल सेवाएं देने के बाद सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी आज सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनके स्थान पर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के 31वें सेना प्रमुख के रूप में पूरी कमान संभाल ली है। इस कमान परिवर्तन के दौरान जहां एक तरफ चार दशकों की सेवा के समापन पर विदाई की भावुकता देखी गई, वहीं दूसरी तरफ देश की सुरक्षा को नए दौर में ले जाने का दृढ़ संकल्प भी साफ नजर आया।
At farewell ceremony, outgoing Chief of Army Staff General Upendra Dwivedi says,
“Today, I am handing over this responsibility to General Dhiraj Seth. He is an experienced soldier and a capable administrator… As I hand over this responsibility today, I am fully confident… pic.twitter.com/7TqYFEy7VI
— All India Radio News (@airnewsalerts) June 30, 2026
जनरल उपेंद्र द्विवेदी की भावुक विदाई और गार्ड ऑफ ऑनर
मंगलवार को नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक के लॉन में एक बेहद गरिमामय और औपचारिक विदाई समारोह का आयोजन किया गया था। इस विशेष अवसर पर निवर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी को सेना की टुकड़ी द्वारा पारंपरिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। इस भावुक क्षण में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि आज जब वह सेनाध्यक्ष के रूप में अपना कार्यकाल पूरा कर रहे हैं, तो उनके दिल में अत्यंत कृतज्ञता, गर्व और गहरा संतोष है। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए भावुक अंदाज में कहा कि सैनिक स्कूल से शुरू हुआ उनका यह सफर आज इस सर्वोच्च पद तक पहुंचने के साथ बहुत ही शानदार और यादगार रहा है।
राष्ट्रीय समर स्मारक पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि
अपने विदाई समारोह की औपचारिक शुरुआत करने से पहले जनरल उपेंद्र द्विवेदी राष्ट्रीय समर स्मारक यानी नेशनल वार मेमोरियल पहुंचे। वहां उन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों को पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें नमन किया। इसके बाद भारतीय सेना ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर इस भावुक और ऐतिहासिक पल की खूबसूरत तस्वीरें साझा कीं। सेना ने इन तस्वीरों के साथ जनरल द्विवेदी के अटूट समर्पण, नेतृत्व क्षमता और देश के प्रति की गई उनकी निस्वार्थ सेवा की दिल से सराहना की।
भविष्य के युद्धों के लिए संयुक्त सैन्य अभियान का मूल मंत्र
सेवानिवृत्त होने के बाद जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश की भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों और सैन्य आधुनिकीकरण को लेकर एक बेहद दूरदर्शी और बड़ा बयान दिया है। उन्होंने बहुत जोर देकर कहा कि आने वाले समय में युद्ध की प्रकृति पूरी तरह बदल जाएगी। भविष्य के युद्ध बहुत अधिक एकीकृत, संयुक्त और पूरी तरह से समन्वित सैन्य अभियानों पर केंद्रित होने वाले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बदलते दौर में हमारे सशस्त्र बलों की दिशा और लक्ष्य पूरी तरह साफ होने चाहिए। उन्होंने भारतीय सेना की भविष्य की तैयारियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण मूल मंत्र दिया, जो है: “साथ मिलकर देखना, साथ मिलकर निर्णय लेना और साथ मिलकर त्वरित कार्रवाई करना।”
सैनिकों और नागरिकों का अटूट भरोसा ही असली ताकत
जून 2024 में भारतीय सेना के 30वें प्रमुख का पदभार ग्रहण करने वाले जनरल द्विवेदी ने सेना की वास्तविक शक्ति को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय सेना को अपनी वास्तविक ताकत किसी एक व्यक्ति या केवल नेतृत्व से नहीं मिलती है। सेना की असली ताकत उसके साहसी सैनिकों, मोर्चे पर डटे कमांडरों, देश के पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और सबसे बढ़कर देश के 140 करोड़ नागरिकों के अटूट भरोसे और प्यार से मिलती है। यही वह भरोसा है जो हर विपरीत परिस्थिति में भारतीय सेना को दुनिया की सबसे मजबूत सेनाओं में से एक बनाए रखता है।
ऑपरेशन स्नो लेपर्ड और ऑपरेशन सिंदूर से न्यू नॉर्मल की स्थापना
जनरल द्विवेदी ने पिछले कुछ वर्षों में देश की सुरक्षा के मोर्चे पर हासिल की गई बड़ी उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पिछले 2 वर्षों के दौरान भारतीय सेना ने हर मोर्चे पर अपनी अभियानगत तैयारियों को असाधारण रूप से मजबूत किया है। चीन सीमा पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ के तहत भारतीय सैनिकों की तैनाती आज बेहद मजबूत, रणनीतिक और पूरी तरह सतर्क है। इसके साथ ही उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष रूप से उदाहरण दिया, जो सेना की मुस्तैदी का एक ज्वलंत प्रतीक है।
मई 2025 में पहलगाम में हुए एक कायराना आतंकी हमले के बाद सेना ने यह ऑपरेशन शुरू किया था। इस ऑपरेशन के दौरान थल सेना, नौसेना और वायु सेना ने जिस अद्वितीय तालमेल, साझा रणनीति और अद्भुत एकजुटता का परिचय दिया, उसने देश की सुरक्षा व्यवस्था में एक नया इतिहास रच दिया है। जनरल द्विवेदी के अनुसार, इन तीनों सेनाओं के संयुक्त प्रयास ने दुश्मनों के खिलाफ देश की रक्षा प्रणाली में एक ‘न्यू नॉर्मल’ यानी एक नया सुरक्षा मानक स्थापित कर दिया है।
31वें सेना प्रमुख के रूप में जनरल धीरज सेठ का स्वागत
जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के तुरंत बाद लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने आधिकारिक तौर पर देश के 31वें सेना प्रमुख की अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अपने हाथों में ले ली है। जनरल धीरज सेठ सैन्य कौशल और रणनीतिक सूझबूझ के मामले में एक बेहद प्रतिष्ठित नाम हैं। वह देश के सबसे प्रीमियम रक्षा संस्थान राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला के पूर्व छात्र रहे हैं। दिसंबर 1986 में उन्हें भारतीय सेना की प्रतिष्ठित आर्म्ड कोर में कमीशन मिला था। लगभग 4 दशकों के अपने बेहद शानदार और बेदाग मिलिट्री करियर के दौरान उन्हें सैन्य संचालन, रणनीतिक योजना, क्षमता विकास और विभिन्न संस्थागत क्षेत्रों में काम करने का बहुत व्यापक और गहरा अनुभव प्राप्त है। उन्होंने समय-समय पर भारतीय सेना की युद्ध क्षमता को बढ़ाने और आंतरिक सुधारों को लागू करने में बेहद अहम भूमिका निभाई है।
विभिन्न चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में कमान संभालने का अनूठा अनुभव
जनरल धीरज सेठ का अब तक का सैन्य करियर विभिन्न प्रकार की चुनौतीपूर्ण और विविध भौगोलिक परिस्थितियों में नेतृत्व करने का रहा है। उन्होंने देश के बेहद कठिन रेगिस्तानी इलाकों में एक आर्म्ड रेजिमेंट की कमान संभाली है, तो वहीं पश्चिमी थिएटर में एक पूरी आर्म्ड ब्रिगेड का सफल नेतृत्व किया है। इसके अलावा उन्होंने जम्मू और कश्मीर जैसे बेहद संवेदनशील और उग्रवाद-प्रभावित क्षेत्रों में आतंकवाद-विरोधी ताकतों का भी कुशलतापूर्वक नेतृत्व किया है। लेफ्टिनेंट जनरल के ऊंचे पद पर पदोन्नत होने के बाद उन्होंने भारतीय सेना के सबसे महत्वपूर्ण स्ट्राइक फॉर्मेशन में से एक, सुदर्शन चक्र कोर की कमान अपने हाथों में ली थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में भी अपनी बेहतरीन सेवाएं दीं, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मिलिट्री कार्यक्रमों और औपचारिक जिम्मेदारियों को बहुत ही शानदार तरीके से संभाला।
दो संचालन सेना कमानों की रणनीतिक देखरेख का दुर्लभ सम्मान
सैन्य क्षेत्र में उनकी असाधारण योग्यता को देखते हुए उन्हें सेना कमांडर के पद पर प्रमोट किया गया था, जिसके बाद उन्होंने देश की दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान जैसी दो अत्यंत महत्वपूर्ण कमानों की जिम्मेदारी संभाली। जनरल धीरज सेठ को भारतीय सेना में दो प्रमुख संचालन सेना कमानों और लगभग ढाई साल से भी ज्यादा समय तक देश के सबसे संवेदनशील और अहम थिएटरों में रणनीतिक देखरेख करने का एक बेहद दुर्लभ और विशिष्ट सम्मान हासिल है। उन्होंने सेना मुख्यालय के भीतर कई बेहद महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक पदों पर भी काम किया है, जिनका सीधा असर देश की सैन्य संचालन योजना, बल प्रबंधन और सेना की क्षमता विकास पर पड़ा है।
सेना के आधुनिकीकरण और भविष्य की तकनीकों में विशेष योगदान
जनरल धीरज सेठ को विशेष रूप से भारतीय सेना के आधुनिकीकरण में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने सेना मुख्यालय के रणनीतिक नियोजन और क्षमता विकास विभागों में कई ऊंचे पदों पर रहते हुए देश की रक्षा प्राथमिकताओं को तय किया है। उन्होंने सेना के भविष्य के आधुनिकीकरण की दिशा, क्षमता के रोडमैप और लंबे समय की ‘फोर्स स्ट्रक्चरिंग’ जैसी महत्वपूर्ण पहलों को एक नया और मजबूत आकार दिया है। वर्तमान समय की संचालन जरूरतों को दुनिया की नई तकनीकों और भविष्य के युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं के साथ जोड़ने में उनका योगदान बहुत ही निर्णायक रहा है।
वैश्विक स्तर की उच्च सैन्य शिक्षा और व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण
एक बेहद कुशल, अनुशासित और मेधावी मिलिट्री पेशेवर के रूप में जनरल धीरज सेठ ने पेशेवर सैन्य शिक्षा के क्षेत्र में भी हमेशा शीर्ष स्थान हासिल किया है। उन्होंने अपने सेवा काल के दौरान विभिन्न सैन्य प्रशिक्षण कोर्सों में हमेशा पहला स्थान प्राप्त किया है। वह देश के प्रतिष्ठित उच्च कमान कोर्स और राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज के स्नातक हैं। इसके अलावा उन्होंने फ्रांस की राजधानी पेरिस में जाकर वहां के सबसे प्रतिष्ठित ‘कमांड एंड स्टाफ कोर्स’ को भी सफलतापूर्वक पूरा किया है। पेरिस का यह कोर्स उनके व्यापक अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक नजरिए और समकालीन वैश्विक सैन्य मामलों की उनकी गहरी और आधुनिक समझ को बहुत अच्छी तरह प्रदर्शित करता है। देश को उम्मीद है कि उनके इस विशाल अनुभव और आधुनिक दृष्टिकोण का लाभ आगामी वर्षों में भारतीय सेना को वैश्विक पटल पर और अधिक मजबूत बनाने में मिलेगा।
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