US Iran Deal

अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते पर हुए हस्ताक्षर : मध्य पूर्व में दशकों पुराना तनाव खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम

अंतर्राष्ट्रीय अमेरिका इजराइल ईरान

एजेंसी, वाशिंगटन डीसी। US Iran Deal : मध्य पूर्व के इलाके में पिछले कई दशकों से चले आ रहे भारी तनाव, युद्ध और आपसी टकराव को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में विश्व स्तर पर एक बहुत बड़ी और अनोखी कामयाबी हासिल हुई है। दुनिया के दो शक्तिशाली देशों अमेरिका और ईरान के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण शांति समझौते के मसौदे को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है। इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच जारी खूनी संघर्ष और गहरे मनमुटाव को हमेशा के लिए खत्म करने का रास्ता साफ हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने देर रात आधुनिक इंटरनेट माध्यम से इस बड़े दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह ऐतिहासिक व्यवस्था तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। महीनों तक चली बेहद गोपनीय और जटिल कूटनीतिक बातचीत के बाद इस ऐतिहासिक समझौते को जमीन पर उतारा जा सका है, जिससे अब पूरे इलाके में शांति की एक नई किरण दिखाई देने लगी है।

शांति समझौते की शुरुआती नींव और तैयारी

इस बेहद महत्वपूर्ण समझौते की मजबूत नींव बीते रविवार को ही रख दी गई थी। उस समय अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य बातचीत करने वाले अधिकारी मोहम्मद बकर कलीबाफ ने इंटरनेट के जरिए इस समझौते के शुरुआती कागजों पर अपने दस्तखत किए थे। उस ऐतिहासिक पल के सीधे गवाह खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बने थे, जिससे यह साफ जाहिर हो रहा था कि दोनों ही देश इस पूरे मामले को लेकर कितने ज्यादा गंभीर हैं। यह शुरुआती दस्तखत दोनों पक्षों के बीच प्रशासनिक और कूटनीतिक स्तर पर बनी बड़ी सहमति का एक बड़ा प्रतीक था। इसके बाद बुधवार को इस समझौते को दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक स्तर पर कानूनी रूप से पक्का करते हुए दोनों देशों के राष्ट्र प्रमुखों ने खुद इस पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी। फ्रांस की राजधानी पेरिस के बेहद मशहूर वर्साय पैलेस में जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक बैठक कर रहे थे, ठीक उसी समय उन्होंने इस ऐतिहासिक दस्तावेज पर अपने हस्ताक्षर किए। इसके तुरंत बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी अपने देश से इस पर हस्ताक्षर कर दिए, जिससे इस पूरी प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत मजबूत आधार मिल गया है। एक बड़े अमेरिकी अफसर ने इस बात की पूरी पुष्टि की है और इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक नया सवेरा बताया है।

समझौते के मुख्य चौदह बिंदुओं की पूरी जानकारी

इस ऐतिहासिक समझौते से जुड़े एक बड़े अमेरिकी अधिकारी ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर पत्रकारों को इस पूरे सौदे की बारीकियों से अवगत कराया है। लगभग आठ सौ शब्दों के इस बेहद महत्वपूर्ण कागजी दस्तावेज में कुल चौदह मुख्य बिंदु शामिल किए गए हैं, जो दोनों देशों के भविष्य की दिशा तय करेंगे।

होर्मुज जलमार्ग को दोबारा खोलना

समझौते की सबसे पहली और बड़ी शर्त यह है कि ईरान अपने प्रभाव वाले होर्मुज जलमार्ग को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए दोबारा पूरी तरह से खोल देगा। हालांकि, इस दस्तावेज में यह साफ लिखा गया है कि यह मुफ्त व्यवस्था केवल साठ दिनों की अवधि के लिए ही लागू रहेगी। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि इन साठ दिनों के दौरान वहां से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों से कोई भी अतिरिक्त कर या भारी फीस नहीं वसूली जाएगी। परंतु, साठ दिन की समय सीमा खत्म होने के बाद ईरान इन जहाजों पर अपनी मर्जी से शुल्क लगाने के लिए पूरी तरह आजाद होगा। युद्ध की शुरुआत होने से पहले ईरान आमतौर पर इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से कोई पैसा नहीं लेता था, लेकिन अब भविष्य में नया टैक्स लगने से दुनिया भर के समुद्री व्यापार की लागत काफी ज्यादा बढ़ सकती है।

परमाणु हथियार न बनाने का बड़ा संकल्प

इस पूरे शांति समझौते का सबसे संवेदनशील और बड़ा हिस्सा ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है। ईरान ने इस दस्तावेज में अमेरिका को यह लिखित भरोसा दिलाया है कि वह भविष्य में कभी भी किसी भी तरह का परमाणु बम या खतरनाक परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही उन्हें हासिल करने का कोई गुप्त प्रयास करेगा। इसके साथ ही, ईरान के पास इस समय मौजूद संवर्धित यूरेनियम के बड़े भंडार का क्या किया जाए, इस पर दोनों देश आगे चलकर आपस में मिलकर एक विशेष नीति तय करेंगे। अभी के लिए दोनों पक्षों में इतनी न्यूनतम सहमति बन गई है कि ईरान के भीतर मौजूद इस परमाणु सामग्री को इस हद तक पतला या कम प्रभावशाली बना दिया जाएगा कि उससे किसी भी हालत में परमाणु बम का निर्माण न किया जा सके। यह पूरी जटिल प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की सीधी देखरेख में पूरी की जाएगी। इस समय ईरान के पास लगभग ग्यारह टन संवर्धित परमाणु सामग्री मौजूद है, जिसमें करीब चार सौ चालीस किलोग्राम ऐसा यूरेनियम भी शामिल है जो साठ प्रतिशत तक संवर्धित हो चुका है। इसे परमाणु बम बनाने के बेहद करीब माना जाता है। इस समझौते में यह साफ नहीं किया गया है कि ईरान इस सामग्री को अपने देश से बाहर भेजेगा या नहीं, क्योंकि ईरान हमेशा से अपनी परमाणु संपत्ति को बाहर भेजने का कड़ा विरोध करता आया है।

ईरान के विकास के लिए अट्ठाईस लाख करोड़ रुपए की बड़ी सहायता

अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय मित्र देशों के साथ मिलकर ईरान की अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने और वहां विकास कार्य शुरू करने के लिए तीन सौ अरब डॉलर यानी करीब अट्ठाईस लाख करोड़ रुपए का एक बहुत बड़ा कोष तैयार करने का वादा किया है। हालांकि, यह भारी-भरकम धनराशि ईरान को तुरंत नहीं सौंपी जाएगी। इसके लिए दोनों देशों को अगले साठ दिनों के भीतर एक अंतिम और स्थाई समझौते पर पहुंचना होगा। उसी अंतिम बातचीत में यह पूरी तरह से तय किया जाएगा कि इस विशाल फंड के लिए पैसा कहां से आएगा और इसे किन-किन विकास कार्यों में खर्च किया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि इस कोष में अमेरिका अपनी जेब से सीधे कोई पैसा नहीं देगा, बल्कि खाड़ी के अमीर देश जैसे सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात इस बड़े फंड के लिए आवश्यक धन उपलब्ध करा सकते हैं।

तेल निर्यात और आर्थिक प्रतिबंधों से बड़ी राहत

इस समझौते के लागू होते ही अमेरिकी वित्त मंत्रालय ईरान के तेल व्यापार पर लगे कड़े प्रतिबंधों में ढील देना शुरू कर देगा। इसके लिए जरूरी कानूनी मंजूरियां और छूट जारी की जाएंगी ताकि ईरान अपना कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में आसानी से बेच सके। यह बड़ी राहत सिर्फ तेल की बिक्री तक ही सीमित नहीं होगी, बल्कि बैंकिंग लेन-देन, जहाजों का बीमा, माल ढुलाई और दूसरी सभी वित्तीय सेवाओं के रास्ते में आने वाली रुकावटों को भी पूरी तरह से हटा दिया जाएगा। इसके अलावा, अमेरिका ने ईरान पर लगे तमाम आर्थिक प्रतिबंधों को एक-एक करके पूरी तरह खत्म करने का भी वादा किया है। अमेरिका इस बड़ी राहत के बदले ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर हमेशा के लिए सख्त शर्तें मानने पर मजबूर करना चाहता है।

जब्त संपत्ति की वापसी और समुद्री नाकेबंदी का खात्मा

समझौते के अंतर्गत अमेरिका ने यह भी स्वीकार किया है कि वह दुनिया भर के बैंकों में जमी हुई ईरान की सभी संपत्तियों को पूरी तरह से मुक्त कर देगा। जानकारों का अनुमान है कि यह राशि चौबीस अरब डॉलर या उससे भी कहीं अधिक हो सकती है। इसके साथ ही, ईरानी बंदरगाहों के आस-पास लगी अमेरिकी नौसेना की कड़ी नाकेबंदी को भी तीस दिनों के भीतर पूरी तरह से हटा लिया जाएगा। नाकेबंदी हटने से ईरान दोबारा अपने समुद्री रास्तों से व्यापार शुरू कर सकेगा, जिससे उसके सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार देश चीन को भारी मात्रा में तेल भेजा जा सकेगा और ईरान के पास विदेशी मुद्रा की आमदनी फिर से शुरू हो जाएगी।

आंतरिक मामलों में दखल न देने और युद्धविराम की घोषणा

दोनों देशों ने एक-दूसरे की आजादी, सीमाओं और संप्रभुता का पूरा सम्मान करने की कसम खाई है और यह तय किया है कि वे एक-दूसरे के घरेलू राजनीतिक मामलों में किसी भी तरह का दखल नहीं देंगे। इसके साथ ही, लेबनान समेत दुनिया के जिन भी इलाकों में दोनों देशों की सेनाएं या उनके मददगार गुट आपस में लड़ रहे हैं, वहां सैन्य कार्रवाई को तुरंत और हमेशा के लिए रोक दिया जाएगा। अमेरिका के लिए यह बिंदु इसलिए बहुत आवश्यक था क्योंकि उसे डर था कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई इस पूरे शांति समझौते को नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि, इजराइल ने पहले ही साफ कह दिया है कि वह लेबनान को लेकर हुई किसी भी अमेरिकी-ईरानी सहमति को स्वीकार नहीं करेगा।

निगरानी प्रणाली और संयुक्त राष्ट्र की अंतिम मंजूरी

जब तक दोनों पक्षों के बीच पूरी तरह से अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक कोई भी देश जमीनी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा। ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को मौजूदा स्तर से आगे नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध या अतिरिक्त सेना तैनात नहीं करेगा। दोनों देश मिलकर एक विशेष निगरानी कमेटी बनाएंगे जो यह देखेगी कि समझौते की सभी शर्तों का पालन ठीक से हो रहा है या नहीं। इस पूरे समझौते को साठ दिनों के भीतर पूरी तरह से अमलीजामा पहनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे दोनों पक्षों की आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप इस समझौते को जल्द से जल्द पूरा करना चाहते हैं ताकि उन्हें आने वाले चुनावों में इसका बड़ा राजनीतिक लाभ मिल सके। सबसे अंत में, जब यह पूरी डील पक्की हो जाएगी, तो इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक बड़े प्रस्ताव के जरिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता भी प्रदान की जाएगी।

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