एजेंसी, भोपाल। Meenakshi Natarajan : मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। सूबे से कांग्रेस की एकमात्र और मुख्य महिला प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा अचानक निरस्त किए जाने के बाद कांग्रेस पार्टी ने सड़क से लेकर सर्वोच्च अदालत तक एक बहुत बड़ी जंग का खुला ऐलान कर दिया है। बुधवार के दिन इस फैसले के खिलाफ राजधानी भोपाल में सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया। युवा कांग्रेस (यूथ कांग्रेस) के सैकड़ों आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के मुख्य गेट के बाहर इकट्ठा होकर एक बेहद उग्र और जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कुछ प्रदर्शनकारियों ने अपना तीखा राजनीतिक संदेश देने के लिए निर्वाचन आयोग कार्यालय के गेट पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की गणवेश (पोशाक) भी टांग दी, जिससे मौके पर भारी तनाव और घमासान की स्थिति निर्मित हो गई।
रोशनपुरा चौराहे पर कांग्रेस दिग्गजों का उपवास, राजधानी का सियासी माहौल हुआ बेहद गर्म
सड़क पर मचे इस भारी बवाल के बीच भोपाल के प्रसिद्ध रोशनपुरा चौराहे पर कांग्रेस के तमाम शीर्ष नेताओं और विधायकों ने एक बड़े उपवास व धरना आंदोलन की शुरुआत कर दी है। इस विशाल विरोध प्रदर्शन में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, वरिष्ठ विधायक आरिफ मसूद, आतिफ अकील सहित पार्टी के कई आला पदाधिकारी और हजारों कार्यकर्ता जमीन पर बैठ गए हैं। पूरी राजधानी इस समय राजनीतिक नारों और सरकार विरोधी प्रदर्शनों से पूरी तरह हिल उठी है। कांग्रेस का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई पूरी तरह से असंवैधानिक है और जानबूझकर विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए चुनी हुई लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक बड़ा कुठाराघात किया गया है।
दिल्ली में अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा संभालेंगे कानूनी मोर्चे की कमान
इस पूरे मामले को कांग्रेस सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा बनाकर नहीं छोड़ना चाहती, बल्कि उसने इसके खिलाफ एक बहुत बड़ी कानूनी घेराबंदी भी शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में वरिष्ठ नेताओं की एक आपात रणनीतिक बैठक बुलाई गई, जिसमें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई दिग्गज शामिल हुए। बैठक में तय किया गया कि पार्टी का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल तुरंत देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय चुनाव आयोग के मुख्य आयुक्त से मुलाकात कर अपनी कड़ी कानूनी आपत्ति दर्ज कराएगा। इसके साथ ही देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में इस फैसले के खिलाफ एक विशेष याचिका दायर करने की तैयारी भी बहुत तेज कर दी गई है। दिल्ली में कांग्रेस के चाणक्य माने जाने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और प्रख्यात कानूनविद व राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर बहुत गहनता से मंथन कर रहे हैं।
सरकार के इशारे पर हुई कार्रवाई, जनआंदोलन में तब्दील होगी यह लड़ाई
धरना स्थल से कांग्रेस के कद्दावर नेता फूलसिंह बरैया ने सरकार पर एक बेहद तीखा और सीधा हमला बोला है। उन्होंने खुलेआम आरोप लगाया कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन किसी तकनीकी कमी या निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया के तहत निरस्त नहीं हुआ है, बल्कि इसे पूरी तरह से मौजूदा सरकार के राजनीतिक दबाव और इशारे पर खारिज किया गया है। बरैया ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस इस तानाशाहीपूर्ण फैसले को किसी भी कीमत पर चुपचाप स्वीकार नहीं करेगी और हर संवैधानिक मंच पर इसे कड़ी चुनौती दी जाएगी। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने यह साफ संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे को पूरे मध्य प्रदेश के भीतर एक बड़ा प्रदेशव्यापी जनआंदोलन बनाने की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं, जिसके तहत हर जिले में बड़े प्रदर्शन किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का करारा पलटवार, कहा- हार के डर से कांग्रेसियों ने खुद रचा यह खेल
दूसरी तरफ, कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे इन सभी गंभीर आरोपों पर सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद सामने आकर मोर्चा संभाला है और कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक बड़ा राजनीतिक बयान जारी करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त होने के पीछे किसी बाहरी व्यक्ति का हाथ नहीं है, बल्कि यह पूरा षड्यंत्र खुद कांग्रेस के बड़े नेताओं ने आपस में मिलकर रचा है। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को पहले से ही इस सीट पर अपनी करारी हार का पूरा डर सता रहा था, इसलिए उन्होंने जानबूझकर और एक सोची-समझी रणनीति के तहत अपने ही प्रत्याशी के फॉर्म के भीतर आपराधिक रिकॉर्ड जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां छुपाकर बड़ी गलती रखी, ताकि फॉर्म निरस्त हो जाए और उन्हें जनता के बीच जाकर अपनी कमजोरी न दिखानी पड़े।
विधायकों पर भरोसा नहीं और नेतृत्व हो चुका है पूरी तरह फेल
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी पर चुटकी लेते हुए आगे कहा कि इस राज्यसभा सीट पर लंबे समय से कांग्रेस के कई बड़े और रसूखदार नेताओं की गिद्ध दृष्टि टिकी हुई थी। जब उन नेताओं को खुद आलाकमान से हरी झंडी और सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने मिलकर अपनी ही पार्टी का खेल बिगाड़ने का यह शर्मनाक काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कितनी हास्यास्पद और छोटी बात है कि जब देश में कोई आम नागरिक पंच या सरपंच का भी पर्चा भरता है, तो उसे पता होता है कि अपने आपराधिक मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है। लेकिन जो नेता 10-10 बार चुनाव लड़ चुके हैं, उनके रहते ऐसी गलती होना यह साबित करता है कि यह एक जानबूझकर की गई अंदरूनी साजिश है। सीएम ने कहा कि कांग्रेस को अपने ही विधायकों पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है, इसीलिए वे अपने विधायकों को डराने और धमकाने के लिए प्लेन लेकर भागने का नाटक रच रहे थे। इंदौर से लेकर पूरे प्रदेश तक कांग्रेस का संगठन और नेतृत्व पूरी तरह बिखर चुका है, ऐसे में अपनी नाकामियों का ठीकरा भाजपा पर मढ़ना बेहद बेबुनियाद है।
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