मनीषा संजय हवालदार

नीट-यूजी परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले में सीबीआई को मिली बड़ी कामयाबी : सवाल लीक करने वाली मुख्य साजिशकर्ता पुणे से गिरफ्तार

देश/प्रदेश महाराष्ट्र राष्ट्रीय

एजेंसी, पुणे। NEET Paper Leak : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले की परतों को खोलते हुए देश की शीर्ष जांच एजेंसी, केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एक और बहुत बड़ी सफलता हासिल की है। जांच दल ने परीक्षा से ठीक पहले भौतिक विज्ञान के गोपनीय प्रश्नों को बाहर भेजने और लीक करने वाली मुख्य महिला साजिशकर्ता को महाराष्ट्र के पुणे शहर से धर दबोचा है। पकड़ी गई मुख्य आरोपी की आधिकारिक पहचान मनीषा संजय हवालदार के रूप में की गई है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण गिरफ्तारी के बाद से चिकित्सा प्रवेश परीक्षा में सेंध लगाने वाले गिरोह के भीतर खलबली मच गई है और केंद्रीय एजेंसियां अब इस पूरे तंत्र को जड़ से उखाड़ने के लिए जगह-जगह छापेमारी कर रही हैं।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा परीक्षा संचालन के लिए नियुक्त विशेषज्ञ ही निकली गद्दार

जांच से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों और प्रशासनिक अधिकारियों से मिली विस्तृत जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार की गई महिला आरोपी मनीषा संजय हवालदार पुणे के स्थानीय सेठ हीरालाल सराफ प्रशाला नामक एक प्रतिष्ठित संस्थान में कार्यरत है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि देश में इतनी बड़ी परीक्षा का आयोजन करने वाली संस्था, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने स्वयं इस महिला को परीक्षा के सुचारू और सुरक्षित संचालन से जुड़े कार्यों के लिए एक विशेष विशेषज्ञ के तौर पर नियुक्त किया था। इस महत्वपूर्ण पद पर होने के कारण ही महिला को परीक्षा से पहले अत्यंत गोपनीय रखे जाने वाले भौतिक विज्ञान के मूल प्रश्नपत्र और उसके सवालों तक सीधी तथा आसान पहुंच हासिल थी, जिसका फायदा उठाकर उसने पूरी व्यवस्था को धोखा दिया।

पूर्व में पकड़ी गई सह-आरोपी के साथ मिलकर रचा था देशव्यापी लीक का चक्रव्यूह

केंद्रीय जांच ब्यूरो के अधिकारियों को अपनी प्रारंभिक वैज्ञानिक तहकीकात और पूछताछ के दौरान इस बात का पुख्ता शक हुआ है कि मनीषा संजय हवालदार ने इस घिनौने अपराध को अकेले अंजाम नहीं दिया था। उसने इस मामले में पहले ही सलाखों के पीछे भेजी जा चुकी एक अन्य मुख्य महिला आरोपी, मनीषा मठारे के साथ मिलकर बेहद योजनाबद्ध तरीके से प्रश्नपत्र को समय से पहले लीक करने का यह पूरा चक्रव्यूह रचा था। जांच के दौरान जब लीक किए गए संदिग्ध सवालों का मिलान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के असली परीक्षा प्रश्नपत्र से कराया गया, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। प्रयोगशाला और तकनीकी जांच में यह पूरी तरह साबित हो गया कि जो प्रश्न मनीषा ने बाहर भेजे थे, हूबहू वही प्रश्न मुख्य परीक्षा में विद्यार्थियों से पूछे गए थे।

देश के सात प्रमुख शहरों से अब तक कुल ग्यारह बड़े आरोपी पहुंच चुके हैं जेल

भौतिक विज्ञान की इस मास्टरमाइंड महिला की गिरफ्तारी के बाद, देश की इस सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की साख से खिलवाड़ करने वाले पकड़े गए कुल आरोपियों की संख्या अब बढ़कर ग्यारह हो गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने देशव्यापी कार्रवाई करते हुए अब तक देश की मुख्य राजधानी दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर जैसे बड़े तथा रणनीतिक शहरों से इस रैकेट से जुड़े कई शातिर अपराधियों, दलालों और बिचौलियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा के इस लीक मामले की जांच अभी बहुत ही व्यापक स्तर पर जारी है और देश की तमाम केंद्रीय खुफिया एजेंसियां इस पूरे गिरोह के पीछे छिपे बड़े सफेदपोशों और मुख्य सरगनाओं के नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई हैं।

बाईस लाख होनहार विद्यार्थियों की मानसिक प्रताड़ना पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने जताई गहरी संवेदना

इस पूरे राष्ट्रीय विवाद और छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच, देश के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी शुक्रवार को एक बड़े राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखी। शिक्षा मंत्री ने बेहद कड़े शब्दों में यह स्वीकार किया कि राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा के आयोजन में जमीनी स्तर पर बहुत बड़ी अनियमितताएं और गड़बड़ियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा माफिया और भ्रष्ट तंत्र की इस घिनौनी साजिश के कारण देश के लगभग बाईस लाख होनहार और सीधे-साधे विद्यार्थियों को बेहद भारी मानसिक पीड़ा और तनाव के दौर से गुजरना पड़ा है। सरकार इन सभी बच्चों और उनके अभिभावकों के दर्द को पूरी संवेदनशीलता के साथ समझती है और इस पूरी व्यवस्था को दोबारा साफ-सुथरा बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

परीक्षा माफिया के खात्मे के लिए सरकार को उठाने पड़े कुछ बेहद कड़े और अप्रत्याशित कदम

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साफ तौर पर कहा कि व्यवस्था में घुसे इस तरह के परीक्षा माफिया के कारण सरकार किसी भी कीमत पर देश के योग्य, गरीब और रात-दिन मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को उनके हक की सरकारी सीट से वंचित होते हुए नहीं देख सकती। इसी वजह से मूल्यांकनों में भारी गड़बड़ी का अंदेशा होते ही सरकार ने तीन मई को आयोजित हुई पूरी परीक्षा को तुरंत प्रभाव से रद्द करने का एक बेहद कड़ा और बड़ा फैसला लिया था। उन्होंने देश को भरोसा दिलाया कि आने वाली इक्कीस जून को आयोजित होने वाली दोबारा परीक्षा को शत-प्रतिशत त्रुटिहीन, सुरक्षित और पूरी तरह से पारदर्शी बनाने के लिए सरकार और केंद्रीय एजेंसियां युद्धस्तर पर काम कर रही हैं ताकि भविष्य में कोई भी अपराधी इस तरह की हिमाकत न कर सके।

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