लखनऊ जिला अदालत

लखनऊ जिला अदालत के बाहर बुलडोजर कार्रवाई पर भारी बवाल, वकीलों पर लाठीचार्ज और पथराव के बाद पुलिस ने खदेड़ा

उत्तर प्रदेश देश/प्रदेश राष्ट्रीय

एजेंसी, लखनऊ। Lucknow Court News Today : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित जिला अदालत के बाहर रविवार की दोपहर को उस समय भारी हंगामा और बवाल हो गया, जब नगर निगम की बुलडोजर कार्रवाई को देखकर स्थानीय वकील बुरी तरह भड़क गए। अपने चैंबरों को टूटता देख आक्रोशित वकील बड़ी संख्या में बुलडोजर के सामने आकर खड़े हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। मौके पर मौजूद पुलिस के आला अधिकारियों ने जब वकीलों को समझाने और रास्ते से हटाने का प्रयास किया, तो दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते यह विवाद इतना ज्यादा बढ़ गया कि पुलिस ने उग्र हो रही वकीलों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस के जवानों ने वकीलों को दौड़ा-दौड़ाकर उन पर लाठियां बरसाईं, जिसके जवाब में प्रदर्शनकारियों की भीड़ में शामिल कुछ अराजक तत्वों ने पुलिस टीम पर भारी पथराव कर दिया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कुछ पुलिसकर्मी भी आत्मरक्षा में जमीन से पत्थर उठाते हुए नजर आए।

हाईकोर्ट के आदेश पर 10 बुलडोजर और 300 पुलिसकर्मियों के साथ पहुंची टीम

इस पूरे बड़े प्रशासनिक घटनाक्रम की मुख्य वजह इलाहाबाद उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) का एक सख्त आदेश है। हाईकोर्ट ने लखनऊ जिला अदालत परिसर के बाहर फैले सभी तरह के अवैध अतिक्रमण को तुरंत हटाने के निर्देश दिए थे। इस न्यायिक आदेश का पालन करते हुए नगर निगम की टीम ने कोर्ट के बाहर कुल 240 अवैध निर्माणों को चिह्नित किया था, जिनमें से अधिकांश वकीलों के चैंबर और कुछ छोटी-मोटी दुकानें शामिल थीं। रविवार की सुबह ठीक 9 बजे नगर निगम की प्रवर्तन टीम 10 बड़े बुलडोजरों और करीब 300 से अधिक पुलिसकर्मियों के भारी सुरक्षा घेरे के साथ मौके पर पहुंच गई। प्रशासनिक टीम ने कार्रवाई शुरू करते हुए कुछ ही घंटों में करीब 90 अवैध चैंबरों को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया।

वकील ने की आत्महत्या की कोशिश, अन्य ने जोड़े हाथ

नगर निगम की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के दौरान कोर्ट परिसर के बाहर बेहद संवेदनशील और भावुक कर देने वाले नजारे भी देखने को मिले। मलबे को हटाने के साथ ही नगर निगम की टीम वकीलों के चैंबरों के भीतर रखी चटाइयां, मेज और कुर्सियों को जबरन अपनी गाड़ियों में भरकर ले जाने लगी। इसी बीच अपनी आंखों के सामने अपना चैंबर टूटता देख एक वकील इस कदर आहत हुआ कि उसने खुद को एक चैंबर के भीतर बंद कर लिया और फंदे से लटककर अपनी जान देने की कोशिश की। मौके पर मुस्तैद पुलिसकर्मियों ने तुरंत तत्परता दिखाई और बगल के चैंबर की दीवार को तोड़कर उस वकील को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वहीं एक अन्य बुजुर्ग वकील पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर फूट-फूटकर रोने लगा और अपना चैंबर न तोड़ने की गुहार लगाता रहा। पीड़ित वकील का कहना था कि पिछले 36 सालों से वह इसी चैंबर में बैठकर अपनी वकालत कर रहे हैं और यह निर्माण बिल्कुल भी अवैध नहीं है। उन्होंने भावुक होते हुए चेतावनी दी कि यदि उनके इस आशियाने पर बुलडोजर चला, तो वह जिंदा नहीं रहेंगे।

साल 2020 से शुरू हुआ था चैंबरों को हटाने का यह विवाद

इस पूरे विवाद की जड़ें काफी पुरानी हैं। साल 2020 में सदर तहसील इलाके में प्रशासन द्वारा वकीलों के कुछ चैंबर तोड़े गए थे, जिस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया था। अदालत ने सरकार से पूछा था कि बेघर हुए वकीलों के पुनर्वास के लिए प्रशासन ने क्या वैकल्पिक व्यवस्था की है? इसके बाद अक्टूबर 2025 में लखनऊ सिविल कोर्ट परिसर के भीतर सेंट्रल बार एसोसिएशन से जुड़े कुछ वकीलों के अस्थायी चैंबरों को प्रशासन ने ढहा दिया था, जिसका वकीलों ने व्यापक स्तर पर विरोध किया था।

लाल निशान लगाने के बाद हुई आज की बड़ी कार्रवाई

इसके बाद जनवरी 2026 में कोर्ट परिसर के ठीक बाहर बढ़ते अवैध कब्जों और अतिक्रमण को लेकर स्थानीय प्रशासन के पास लगातार गंभीर शिकायतें पहुंचने लगीं। इसी दौरान एडवोकेट सुनीता सिंह समेत कुछ अन्य जागरूक नागरिकों ने इन अवैध चैंबरों और बढ़ते अतिक्रमण के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर दीं। मामलों की सुनवाई करते हुए आगामी 7 मई को हाईकोर्ट ने प्रशासन को अतिक्रमण हटाने का अंतिम आदेश जारी कर दिया। आदेश मिलते ही बीती 12 मई को नगर निगम की टीम ने सभी अवैध चैंबरों और ढांचों पर लाल रंग का क्रॉस (निशान) लगा दिया था और नोटिस जारी कर सभी को 16 मई तक अपना सामान खाली करने की मोहलत दी थी। नोटिस की समयसीमा समाप्त होते ही रविवार को नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल और बुलडोजरों के साथ मौके पर पहुंच गई, जिसके बाद यह पूरा बवाल खड़ा हो गया। फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

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