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हरियाणा बैंक घोटाला : 590 करोड़ के गबन मामले में सीबीआई की बड़ी छापेमारी, पांच आईएएस अधिकारियों पर लटकी जांच की तलवार

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एजेंसी, चंडीगढ़। Haryana Scam : हरियाणा के चर्चित बैंकिंग और सरकारी फंड घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े 590 करोड़ रुपये के इस घोटाले में सीबीआई ने चंडीगढ़ और पंचकूला के सात अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और संदिग्ध लेन-देन से जुड़े पुख्ता सबूत जब्त किए हैं। इस कार्रवाई के बाद हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि अब जांच की आंच राज्य के वरिष्ठ नौकरशाहों तक पहुंच गई है।

पांच आईएएस अधिकारियों से जल्द हो सकती है पूछताछ

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कड़े रुख के बाद, राज्य सरकार ने पांच आईएएस अधिकारियों के खिलाफ जांच की मंजूरी और 17-ए क्लियरेंस दे दी है। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई इन अधिकारियों से कभी भी पूछताछ कर सकती है। जांच में यह बात सामने आई है कि ये अधिकारी पंचायत एवं विकास विभाग, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम और पंचकूला नगर निगम जैसे महत्वपूर्ण विभागों में अपनी तैनाती के दौरान संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। इस मामले में पहले ही 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और तीन लेखा अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

फर्जी खातों का बिछाया गया था मायाजाल

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे घोटाले को अंजाम देने के लिए फर्जी बैंक खातों का एक व्यवस्थित नेटवर्क तैयार किया गया था। सरकारी विभागों के करोड़ों रुपये के फंड को असली लाभार्थियों के बजाय फर्जी खातों के जरिए इधर-उधर ट्रांसफर किया गया। इन खातों का उपयोग केवल ट्रांजेक्शन रूट बनाने के लिए किया जाता था ताकि पैसे के स्रोत और अंतिम गंतव्य को छिपाया जा सके। सीबीआई अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि इस भ्रष्टाचार के खेल को सरकारी तंत्र के भीतर से किन प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त था।

ऑडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल सबूत बने बड़ी कड़ी

इस पूरे मामले के खुलासे में डिजिटल सबूतों और ऑडियो रिकॉर्डिंग ने अहम भूमिका निभाई है। गिरफ्तार आरोपियों के बयानों और फाइल मूवमेंट की जांच के दौरान कुछ ऐसी रिकॉर्डिंग मिली हैं, जिनमें फंड ट्रांसफर, खातों के संचालन और कानूनी कार्रवाई से बचने के तरीकों पर चर्चा की गई है। सीबीआई इन रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच करवा रही है ताकि बातचीत करने वाले व्यक्तियों की पहचान सुनिश्चित की जा सके। ये रिकॉर्डिंग इस घोटाले में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सबसे बड़ा सुराग साबित हो सकती हैं।

हरियाणा की ब्यूरोक्रेसी में भारी बेचैनी

सीबीआई की इस सक्रियता ने राज्य की नौकरशाही में भारी तनाव पैदा कर दिया है। कई विभागों में पुराने वित्तीय रिकॉर्ड और भुगतान फाइलों की बारीकी से समीक्षा शुरू हो गई है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में जांच एजेंसी कुछ और बड़े नामों का खुलासा कर सकती है। यह मामला अब केवल एक बैंकिंग फ्रॉड तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह हरियाणा के सरकारी सिस्टम में जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार के सख्त निर्देशों के बाद सीबीआई इस घोटाले की हर एक परत को खोलने में जुटी है।

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