एजेंसी, भुवनेश्वर। Jagannath Rath Yatra 2026 : ओडिशा सरकार ने इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान रथों के पास होने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को रोकने के लिए ‘कॉर्डन पास’ की संख्या कम करने का बड़ा निर्णय लिया है। पिछले वर्ष पुरी में रथ यात्रा के दौरान हुई एक दुखद घटना में तीन लोगों की जान चली गई थी, जिसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव अनु गर्ग की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह फैसला किया गया।
क्या है ‘कॉर्डन पास’ और क्यों है इसकी अहमियत?
भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा (आंतरिक घेरा) बनाया जाता है। इस विशेष क्षेत्र में प्रवेश के लिए ‘कॉर्डन पास’ की आवश्यकता होती है। आमतौर पर ये पास केवल उन लोगों को दिए जाते हैं जो धार्मिक अनुष्ठानों या सुरक्षा व्यवस्था से सीधे तौर पर जुड़े होते हैं। 16 जुलाई से शुरू होने वाली इस यात्रा में लाखों भक्तों के पहुंचने की उम्मीद है, इसलिए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है।
ग्रैंड रोड पर भोजन वितरण के नियमों में बदलाव
समीक्षा बैठक के दौरान पुरी के ‘बड़ा डंडा’ (ग्रैंड रोड) पर होने वाले अनुष्ठानों और भीड़ प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने गौर किया कि विभिन्न संगठनों द्वारा सड़क पर पका हुआ भोजन बांटने से अक्सर गंदगी फैलती है और आवाजाही में बाधा आती है। इसे देखते हुए अब मुख्य मार्ग पर भोजन वितरण को प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रशासन इन स्वयंसेवी संस्थाओं को भोजन बांटने के लिए एक अलग और निश्चित स्थान उपलब्ध कराएगा ताकि स्वच्छता और व्यवस्था बनी रहे।
बुनियादी ढांचे और यातायात के लिए विशेष इंतजाम
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे आठ अतिरिक्त टिकट काउंटर खोलने जा रहा है। इसके साथ ही बैठक में सीसीटीवी कैमरे लगाने, सड़कों की मरम्मत, पार्किंग व्यवस्था और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती जैसे मुद्दों पर भी सहमति बनी। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि रथ खींचने के लिए इस्तेमाल होने वाली रस्सियों की मजबूती की तकनीकी जांच की जाए ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।
रथ निर्माण कार्य ने पकड़ी रफ्तार
रथ निर्माण का कार्य 20 अप्रैल (अक्षय तृतीया) से शुरू हो चुका है और रविवार को यह छठे दिन भी जारी रहा। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के अनुसार, रथों के लिए आवश्यक 865 लकड़ी के लट्ठों में से 576 लट्ठे प्राप्त हो चुके हैं। एक विशेष तकनीकी टीम निर्माण की पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रही है ताकि पारंपरिक भव्यता के साथ-साथ सुरक्षा मानकों का भी पूरा पालन हो सके।
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