गुरबख्श सिंह ग्रेवाल

भारतीय हॉकी का एक स्वर्णिम युग समाप्त : ओलंपियन गुरबख्श सिंह ग्रेवाल ने दुनिया को कहा अलविदा

खेल देश/प्रदेश पंजाब राष्ट्रीय हॉकी

एजेंसी, ज़िरकपुर। Gurbaksh Singh Grewal : भारतीय हॉकी जगत के लिए शुक्रवार का दिन बेहद दुखद रहा, जब 1968 मेक्सिको ओलंपिक में देश का गौरव बढ़ाने वाले दिग्गज खिलाड़ी गुरबख्श सिंह ग्रेवाल का निधन हो गया। उन्होंने पंजाब के मोहाली जिले में स्थित अपने निवास स्थान पर आखिरी सांस ली। उनके जाने से खेल प्रेमियों और हॉकी प्रशंसकों के बीच शोक व्याप्त है।

भाइयों की जोड़ी ने रचा था इतिहास

गुरबख्श सिंह ग्रेवाल के नाम खेल जगत में एक ऐसा अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है जो बहुत कम खिलाड़ियों के हिस्से आता है। उन्होंने अपने भाई बलबीर सिंह ग्रेवाल के साथ मिलकर भारतीय टीम की तरफ से ओलंपिक में हिस्सा लिया था। भारतीय हॉकी के इतिहास में यह गौरवशाली पल हमेशा याद रखा जाएगा जब दो सगे भाइयों ने एक साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगे का मान बढ़ाया।

खेल प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका

मैदान पर अपनी चमक बिखेरने के बाद गुरबख्श सिंह ने प्रशासनिक क्षेत्र में भी अपनी सेवाएं दीं। वे पश्चिम रेलवे में वरिष्ठ खेल अधिकारी के पद पर तैनात रहे और वहां भी उन्होंने खेलों को बढ़ावा देने के लिए काफी काम किया। खिलाड़ी और अधिकारी दोनों ही रूपों में उनका योगदान अविस्मरणीय रहा।

खेल जगत ने जताया गहरा दुख

उनके देहांत पर सुरजीत हॉकी सोसाइटी समेत कई खेल संगठनों ने गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। खेल अधिकारियों का कहना है कि गुरबख्श सिंह का जाना हॉकी के लिए एक ऐसी कमी है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा। विभिन्न सामाजिक और खेल संस्थाओं ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी सहानुभूति जताई है और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है।

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