एजेंसी, नासिक। नासिक TCS केस : महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टीसीएस कार्यालय में सामने आए धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के गंभीर मामले ने अब देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इस विवाद के तूल पकड़ने के बाद कंपनी ने अपने कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी स्टाफ को अगले आदेश तक ‘वर्क फ्रॉम होम’ यानी घर से काम करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस इस मामले में अब तक 9 एफआईआर दर्ज कर चुकी है और 7 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।
सुप्रीम कोर्ट में विशेष अदालत की मांग
गुरुवार को अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। याचिका में तर्क दिया गया है कि धोखे या लालच से कराया गया धर्मांतरण देश की एकता और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। इसमें मांग की गई है कि ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाए। याचिकाकर्ता ने यह भी सुझाव दिया कि संगठित तरीके से कराए जाने वाले जबरन धर्मांतरण को आतंकी गतिविधियों की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
कैसे बनाया जाता था शिकार?
पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपी अक्सर नई महिला कर्मचारियों की निजी और आर्थिक स्थिति का विश्लेषण कर उन्हें अपना निशाना बनाते थे। खासकर उन कर्मचारियों को ‘टारगेट’ किया जाता था जो पारिवारिक समस्याओं या वित्तीय तंगी से जूझ रही थीं। जांच अधिकारियों को 70 से अधिक संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड, ईमेल और चैट मिले हैं, जो इस साजिश की ओर इशारा करते हैं। ऑपरेशंस मैनेजर अश्विनी चेनानी को फिलहाल 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
मैनेजमेंट और एचआर की भूमिका पर सवाल
मामले में एचआर मैनेजर निदा खान की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। उन पर आरोप है कि पॉश कमेटी का सदस्य होने के बावजूद उन्होंने पीड़ितों की शिकायतों को दबाने की कोशिश की और कोई कार्रवाई नहीं की। इसी के चलते अलग-अलग थानों में मामले दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इस घटना को अत्यंत चिंताजनक बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रही है और उत्पीड़न के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर कायम है।
देशद्रोह की धाराएं लगाने की मांग
इस घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। भाजपा विधायक देवयानी फरांदे ने आरोपियों के खिलाफ सख्त लहजे में कहा कि महिला कर्मचारियों पर नमाज पढ़ने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाना असंवैधानिक है। उन्होंने मांग की है कि दोषियों पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाए और उनकी संपत्तियों को जब्त कर कठोरतम दंड दिया जाए। फिलहाल पुलिस वित्तीय लेन-देन के कोण से भी मामले की गहराई से जांच कर रही है।
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