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डिजिटल बैंकिंग में अब ग्राहक की जमापूंजी होगी और भी सुरक्षित : साइबर फ्रॉड होने पर बैंक को करना होगा पैसों का भुगतान, आरबीआई ने लागू किए सख्त नियम

नई दिल्ली राष्ट्रीय व्यापार

एजेंसी, नई दिल्ली। आरबीआई नए नियम : डिजिटल बैंकिंग की दुनिया में उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि किसी साइबर धोखाधड़ी के कारण आपके खाते से पैसे कटते हैं, तो बैंक को उस नुकसान की भरपाई करनी होगी। हालांकि, यह राहत तभी मिलेगी जब ग्राहक की ओर से कोई लापरवाही न बरती गई हो। बैंक को यह साबित करना होगा कि फ्रॉड ग्राहक की गलती से हुआ है, तभी वह भुगतान से बच सकेगा।

तुरंत मिलेगी राहत और शिकायतों का तय समय में निपटारा

आरबीआई के नए नियमों के तहत, 50 हजार रुपये से कम की धोखाधड़ी होने पर ग्राहक के खाते में तत्काल प्रभाव से 25 हजार रुपये जमा कर दिए जाएंगे। शेष राशि के भुगतान के लिए एक विशेष प्रक्रिया तैयार की जा रही है। यह नियम क्रेडिट कार्ड से होने वाले फ्रॉड पर भी लागू होगा, जहां बैंक और कार्ड कंपनी आपसी समन्वय से तुरंत भरपाई सुनिश्चित करेंगे। ग्राहकों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे किसी भी वित्तीय धोखाधड़ी की जानकारी 5 कार्यदिवसों के भीतर बैंक को दें। बैंक को ऐसी हर शिकायत का निपटारा अधिकतम 30 दिनों के भीतर करना होगा।

बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए ‘थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन’ की सुविधा

70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को साइबर ठगों के चंगुल से बचाने के लिए आरबीआई एक विशेष अतिरिक्त सुरक्षा कवच लाने जा रहा है। इसके अंतर्गत, बुजुर्ग ग्राहक 50,000 रुपये से अधिक के लेनदेन को सत्यापित करने के लिए किसी अन्य भरोसेमंद व्यक्ति को अधिकृत कर सकते हैं। जब तक वह अधिकृत व्यक्ति ट्रांजेक्शन की पुष्टि नहीं करेगा, भुगतान पूरा नहीं होगा। साथ ही, कम टर्नओवर वाले खातों में अगर अचानक 25 लाख रुपये से अधिक की राशि आती है, तो बैंक को इसकी जानकारी देना और खाताधारक से स्पष्टीकरण मांगना अनिवार्य होगा।

1 जुलाई से बदल जाएगी बैंकिंग की तस्वीर

ये नए नियम आगामी 1 जुलाई से प्रभावी हो सकते हैं। आरबीआई ने सभी वाणिज्यिक बैंकों को अपनी डिजिटल सुरक्षा प्रणाली को और अधिक चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए हैं। अब अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए भी ग्राहकों को बार-बार ऑन-ऑफ करने के झंझट से मुक्ति मिलेगी, वे अपनी सुविधानुसार इस सिस्टम को स्थायी रूप से सक्रिय रख सकेंगे। बैंक अब संदिग्ध लेनदेन पर नजर रखने के लिए खातों में विशेष ‘सीलिंग’ और अलर्ट सिस्टम लगाएंगे ताकि साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर लगाम कसी जा सके।

सावधानी भी है जरूरी

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भले ही बैंक सुरक्षा की गारंटी दे रहे हों, लेकिन ग्राहकों को अपनी ओर से सतर्क रहना होगा। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करना, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करना या अपना ओटीपी किसी के साथ साझा करना भारी पड़ सकता है। बैंक की ओर से आने वाले सुरक्षा संदेशों को गंभीरता से लेना और समय-समय पर अपने पासवर्ड बदलते रहना ही डिजिटल सुरक्षा की पहली सीढ़ी है।

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