भागवत देशभक्ति संदेश

भागवत देशभक्ति संदेश : भारत के लिए जीने का समय, मरने का नहीं, हर इंसान में देशभक्ति जरूरी

अंडमान देश/प्रदेश राष्ट्रीय

एजेंसी, अंडमान। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अंडमान में भागवत देशभक्ति संदेश देते हुए कहा कि भारत के लिए जीने का समय है, मरने का नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर व्यक्ति में देशभक्ति होनी चाहिए और ‘तेरे टुकड़े होंगे’ जैसी भाषा यहां नहीं चलेगी।

भागवत का मुख्य संदेश

भागवत ने समारोह में कहा कि देश को हर चीज से ऊपर रखना चाहिए। उन्होंने दामोदर सावरकर के गीत ‘सागर प्राण तलमाला’ की 115वीं सालगिरह के मौके पर अपने विचार साझा किए। भागवत ने कहा कि समाज में छोटी-छोटी बातों पर टकराव दिखता है, लेकिन एक महान राष्ट्र बनाने के लिए हमें सावरकर के संदेश को याद रखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सावरकर ने कभी किसी खास जाति या राज्य का पक्ष नहीं लिया, बल्कि हमेशा एक राष्ट्र की सोच सिखाई।

देशभक्ति और व्यक्तिगत जिम्मेदारी

भागवत ने दो बड़ी बातें साझा कीं:
–  हमें अपने निजी मतलब को दूर रखना होगा और केवल देश के लिए काम करना चाहिए। सावरकर जी ने बिना स्वार्थ के देशभक्ति का आदर्श प्रस्तुत किया।
– हमें सावरकर के अनुभव किए हुए देशभक्ति के दर्द को महसूस करना चाहिए। चाहे प्रोफेशनल बनें या पैसा कमाएं, देश को कभी न भूलें। देश को महान बनाने के लिए साधु बनना आवश्यक नहीं है।

भागवत देशभक्ति संदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का संदेश

अमित शाह ने भी भागवत देशभक्ति संदेश का समर्थन करते हुए कहा कि सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए वीर सावरकर को उनकी असली पहचान नहीं मिली। उन्होंने हिंदू समाज में प्रचलित बुराइयों के खिलाफ साहसपूर्वक संघर्ष किया और अंग्रेजों की जेल में कैद रहते हुए भी अपने राष्ट्रभक्ति संदेश को जीवित रखा।

सावरकर की जीवनी और योगदान

विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को हुआ था। वे कवि, लेखक और समाज सुधारक थे। सावरकर ने अपने जीवन को देशभक्ति और समाज सुधार के लिए समर्पित किया। उन्हें 1911 में अंग्रेजों ने पोर्ट ब्लेयर की सेलुलर जेल में कैद किया था, जो अब श्री विजया पुरम के नाम से जाना जाता है।

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