जगन्नाथ रथ यात्रा का दूसरा दिन : जय जगन्नाथ-हरि बोल जयकारों के बीच अपनी ‘मौसी’ के घर पहुंचे भगवान, यात्रा में देरी पर विपक्ष ने उठाये सवाल

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एजेंसी, पुरी। पुरी में रथ यात्रा शुरू होने के एक दिन बाद शनिवार को भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के रथ अपने गंतव्य गुंडिचा मंदिर पहुंच गए। गुंडिचा मंदिर को देवताओं की ‘मौसी’ का घर माना जाता है जो हर साल जगन्नाथ मंदिर से निकलकर अपनी ‘मौसी’ के घर जाते हैं। गुंडिचा मंदिर 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर से 2.6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। देवता नौ दिन बाद मुख्य मंदिर चले जाएंगे। वापसी की रथ यात्रा को ‘बहुदा यात्रा’ कहा जाता है जो इस साल पांच जुलाई को होगी। इससे पहले दिन में ‘‘जय जगन्नाथ’’ और ‘‘हरि बोल’’ के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने आज सुबह लगभग 10 बजे तीनों रथों को फिर से खींचना शुरू किया। पुरी में 27 जून की रात रथयात्रा रोक दी गई थी। रथों को शुक्रवार शाम तक गुंडिचा मंदिर पहुंचना था, लेकिन भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ के एक मोड़ पर फंस जाने के कारण श्रद्धालुओं को ग्रैंड रोड पर रुकना पड़ा, जिससे अन्य दो रथ भी आगे नहीं बढ़ सके। परंपरा के अनुसार, सबसे आगे ‘तालध्वज’ रहता है, उसके बाद देवी सुभद्रा का रथ ‘दर्पदलन’ और भगवान जगन्नाथ का रथ ‘नंदीघोष’ रहता है।

विधि मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन, मुख्य सचिव मनोज आहूजा, पुलिस महानिदेशक वाई. बी. खुरानिया और अन्य वरिष्ठ अधिकारी को भगवान जगन्नाथ के ‘नंदीघोष’ रथ को खींचते दिखे। रथों के अपने गंतव्य पहुंचने पर इन्हें गुंडिचा मंदिर के बाहर रखा गया। औपचारिक शोभायात्रा के बाद देवताओं को रविवार को मंदिर के अंदर ले जाया जाएगा। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी ने कहा, ‘‘हम रथ यात्रा के संचालन के लिए श्रद्धालुओं समेत सभी हितधारकों को धन्यवाद देते हैं।’’ अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को वार्षिक रथ यात्रा में लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया था और लगभग पांच लाख श्रद्धालु शनिवार को पुरी में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि शनिवार को हल्की बारिश हुई। ओडिशा पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के लगभग 10,000 जवानों की तैनाती के साथ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वार्षिक रथ यात्रा आयोजित की जा रही है। पुलिस ने रथ यात्रा के सुचारू संचालन के लिए सभी प्रबंध किए हैं। पुलिस महानिदेशक खुरानिया ने बताया कि भीड़ पर नजर रखने के लिए 275 से अधिक एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से लैस सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

यात्रा में अत्यधिक देरी पर नवीन पटनायक ने दुख जताया
ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने इस वर्ष पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के आयोजन में हुई “भयानक अव्यवस्था” पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने शनिवार को प्रार्थना करते हुए कहा कि ईश्वर उन लोगों को क्षमा करें, जो इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। पांच बार ओडिशा के मुख्यमंत्री रह चुके और बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कहा कि राज्य के सबसे पवित्र आयोजन के दौरान जो कुछ भी घटित हुआ, उस पर चिंता और दुख व्यक्त किए बिना रह पाना असंभव है। मुंबई के एक अस्पताल में सर्जरी के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे पटनायक ने शनिवार को ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट में लिखा, “हम यहां कल नंदीघोष (भगवान जगन्नाथ) के रथ को खींचने में हुई अत्यधिक देरी के लिए प्रशासन पर उंगली उठाने या उसे दोष देने के लिए नहीं हैं। लेकिन हमारे राज्य में सबसे पवित्र आयोजन के दौरान जिस तरह से चीजें घटित हुईं, उस पर अपनी गहरी चिंता और पीड़ा व्यक्त किए बिना रहना असंभव है।

पटनायक ने यह भी कहा कि यह भूलना कठिन है कि पिछले वर्ष भगवान बलभद्र की मूर्ति ‘अडापा बिजे पहांडी’ (श्री गुंडिचा मंदिर के रास्ते पर जुलूस) के दौरान फिसल गई थी, जिसने असंख्य श्रद्धालुओं को झकझोर दिया था। उन्होंने लंबे सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘और अब इस वर्ष, हमने देखा कि नंदीघोष रथ (भगवान जगन्नाथ का रथ) शाम 7:45 बजे तक सिंहद्वार (12वीं शताब्दी के मंदिर का सिंह द्वार) पर ही खड़ा रहा, और दिन समाप्त होने से ठीक पहले केवल कुछ मीटर ही आगे बढ़ पाया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “इसने स्वाभाविक रूप से उन लाखों श्रद्धालुओं को, जो इस अद्वितीय आयोजन को देखने के लिए दुनिया भर से आए थे, पूरी तरह से निराश और हताश किया है।” पटनायक ने यह भी उल्लेख किया कि भीड़ प्रबंधन की खराब व्यवस्था के कारण सैकड़ों श्रद्धालु घायल हो गए। उन्होंने लिखा, “हम केवल प्रार्थना कर सकते हैं कि महाप्रभु जगन्नाथ इस दिव्य पर्व पर हुई इस गंभीर अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को क्षमा करें। उम्मीद है कि इस सिलसिले में सरकार के सभी लोग गहराई से आत्ममंथन करेंगे।”

रथों को शुक्रवार की शाम तक गुंडिचा मंदिर (जिसे देवी-देवताओं का मौसीघर माना जाता है) पहुंचना था, लेकिन ग्रैंड रोड पर उन्हें रोकना पड़ा, क्योंकि भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ मोड़ लेते समय फंस गया, जिससे बाकी दो रथ आगे नहीं बढ़ सके। ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने शुक्रवार को कहा कि इस बार अनुकूल मौसम के कारण श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य से डेढ़ गुना अधिक रही। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु विशेष रूप से भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने के लिए आए थे, उन्हें यह अवसर अब कल मिलेगा। उन्होंने बताया कि शुक्रवार रात आठ बजे रथ खींचने की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया था, हालांकि सभी अनुष्ठान तय समयानुसार संपन्न कर लिए गए थे। शनिवार को श्रद्धालुओं ने भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के रथों को फिर से खींचना शुरू किया। पुरी में रथयात्रा को 27 जून की रात को रोक दिया गया था। भा

कड़ी सुरक्षा के बीच गुंडिचा मंदिर पहुंचा बलभद्र का रथ, पहले दिन ही 600 श्रद्धालु हुए घायल

श्रद्धालुओं ने शनिवार को फिर से नए उत्साह के साथ भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के रथों को खींचना शुरू किया। बता दें कि पुरी में 27 जून की रात रथयात्रा रोक दी गयी थी। शुक्रवार शाम तक भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ की मौसी का स्थान माने जाने वाले गुंडिचा मंदिर तक पहुंचना था, लेकिन भगवान बलभद्र का तलध्वज रथ के एक मोड़ पर फंस जाने के कारण श्रद्धालुओं को ग्रैंड रोड पर रुकना पड़ा, जिससे अन्य दो रथ भी आगे नहीं बढ़ सके।

कड़ी सुरक्षा के बीच रात भर सड़क पर रखा गया रथ
‘जय जगन्नाथ’ के जयकारों के साथ सुबह के अनुष्ठान पूरे करने के बाद शनिवार सुबह करीब 10 बजे रथ खींचने की प्रक्रिया फिर शुरू हुई। पुरी में रात में ठहरे हजारों श्रद्धालु घंटे एवं शंख की ध्वनि के बीच रथ खींचने में शामिल हुए। रथ अब गुंडिचा मंदिर की ओर अग्रसर हैं। गुंडिचा मंदिर 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर से 2.6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

600 से अधिक श्रद्धालु हुए घायल
अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को रथ यात्रा के दौरान बीमार पड़े 600 से अधिक श्रद्धालुओं का पुरी के विभिन्न अस्पतालों में इलाज किया गया। धक्का-मुक्की के कारण कई लोग घायल हो गए, जबकि 200 से अधिक लोग गर्मी और उमस भरे मौसम के कारण बेहोश हो गए। अधिकारियों ने बताया कि वार्षिक रथ यात्रा के लिए करीब दस लाख श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि शनिवार को हल्की बारिश के बावजूद मौसम अनुकूल रहा।

सीएपीएफ-एनएसजी अन्य के करीब 10,000 जवानों की तैनाती
ऐसा मान्यता है कि रथ के स्पर्श मात्र से ही श्रद्धालुओं पर भगवान जगन्नाथ की कृपा हो जाती है। ओडिशा पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) और अन्य के करीब 10,000 जवानों की तैनाती के साथ अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच वार्षिक रथ यात्रा आयोजित की जा रही है। पुलिस ने रथ यात्रा के सुचारू संचालन के लिए सभी इंतजाम किए हैं। पुलिस माहनिदेशक (डीजीपी) वाई. बी. खुरानिया ने बताया कि भीड़ पर नजर रखने के लिए 275 से अधिक एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से लैस सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

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