डिंडौरी : रिकॉर्ड में हेराफेरी… एसडीएम और तहसीलदार सहित चार पर होगी एफआईआर, हाईकोर्ट का सख्त आदेश

डिंडौरी प्रादेशिक मध्‍य प्रदेश

डिंडौरी। शहपुरा तहसील के ग्राम बांकी में एक महिला का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर उसकी जमीन ख्रुर्द-बुर्द किए जाने के मामले में हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन तहसीलदार पर भी एफआई आर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में शाहपुरा के तत्कालीन एसडीएम, ग्राम पंचायत बांकी के सरपंच और सचिव सहित एक अन्य पर भी अपराध दर्ज करने के लिए कहा गया है। न्यायालय के आदेश से प्रशासनिक हलके में हड़कंप व्याप्त है।

ये है पूरा मामला
2016 में बांकी निवासी कलावती बाई अपनी रिश्तेदारी में उत्तर प्रदेश गई थी। उसे अधिक समय तक वहां रहना था, इसलिए उसने अपने नाम पर दर्ज 3.6 हेक्टेयर जमीन देखरेख के लिए मौखिक तौर पर गांव की ही सुलोचना साहू को दे दी थी। कलावती जब काफी दिनों तक गांव वापस नहीं लौटी, तो सुलोचना साहू के नाम पर बैक डेट में फर्जी एग्रीमेंट बनवाया गया।सरंपच-सचिव ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया, जिसके आधार पर 20 जनवरी 2017 को, कलावती के नाम पर दर्ज भूमि सुलोचना साहू के नाम पर चढ़ा दी गई। नामांतरण की कार्रवाई तत्कालीन तहसीलदार एससीस परते ने की।

प्रशासन और पुलिस ने नहीं की कार्रवाई
कुछ दिनों बाद कलावती जब तीर्थ यात्रा से वापस लौटी, तब उसे इस षड्यंत्र की जानकारी लगी। कलावती ने इसे लेकर तत्कालीन शाहपुरा एसडीएम वीके कर्ण की अदालत में आवेदन लगाया, लेकिन 17 मई 2018 को एसडीएम ने भी उसके आवेदन को खारिज कर दिया। संभागीय कमिश्नर के यहां भी कलावती की सुनवाई नहीं हुई।

हाईकोर्ट में लेनी पड़ी शरण
नतीजतन उसे हाई कोर्ट की शरण लेना पड़ी। जस्टिस विवेक अग्रवाल ने इस मामले में डिंडौरी-एसपी को तत्कालीन तहसीलदार, सरपंच, सचिव व सुलोचना साहू के खिलाफ 7 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इसी कड़ी में राजस्व सचिव को 90 दिनों के अंदर एसडीएम और तहसीलदार पर विभागीय कार्रवाई के लिए भी लिखा है।

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